'विपक्ष की एकजुटता से पूरे सत्र डरी और घबरायी रही सरकार', कांग्रेस बोली- परिसीमन-FCRA बिल रोकना हमारी उपलब्धि
कांग्रेस ने मानसून सत्र के हंगामेदार रहने का आरोप सत्तापक्ष पर लगाया, दावा किया कि सरकार छात्रों पर हिंसा और चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर सवालों से भागती रही।
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कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश।
HighLights
सरकार छात्रों पर हिंसा, चढ़ावा चोरी पर सवालों से बची।
विपक्ष ने वन नेशन वन इलेक्शन बिल टलवाया, कई बिल रोके।
पीएम-गृह मंत्री संसदीय कार्यवाही से पूरी तरह गायब रहे।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मानसून सत्र धुलने के लिए सत्तापक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए दावा किया कि छात्रों पर हिंसा तथा चढ़ावा चोरी मामले को लेकर लगातार डर और घबराहट के कारण सरकार सवालों का जवाब देने से भागती रही।
विपक्ष की एकजुटता के बल पर सरकार को बैकफुट पर रखने का दावा करते हुए मुख्य विपक्षी ने वन नेशन वन इलेक्शन, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, पीएम-मंत्रियों को गिरफ्तारी के बाद स्वत: बर्खास्त करने संबंधी बिल, परिसीमन बिल और एफसीआरए बिल को रोकने को विपक्षी दलों की उपलब्धि करार दिया। वहीं सहकारिता तथा माइंस और मिनरल बिल संसद में बिना चर्चा पारित होने को विपक्ष के लिए झटका बताते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
इतनी डरी हुई नहीं दिखी कोई सरकार- रमेश
मानसून सत्र खत्म होने के बाद कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश तथा लोकसभा में पार्टी के उपनेता गौरव गोगोई ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा कि पहले कभी कोई सरकार इतनी डरी और घबराई हुई नहीं थी जितनी मोदी सरकार सत्र में दिखी।
रमेश ने सरकार के रक्षात्मक रूख का श्रेय विपक्षी एकजुटता को देखते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में पहले दिन से आखिर तक हमने मिलकर जो रास्ता तय किया उस पर हम साथ-साथ चले। इसकी वजह से ही विपक्ष को पांच उपलब्धि हासिल हुई जिसमें पहला यह रहा कि वन नेशन, वन इलेक्शन बिल सरकार ने शीत सत्र के लिए टाल दिया क्योंकि विपक्ष ने संसदीय समिति में कई सवाल उठाए थे।
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025 की रिपोर्ट भी रोक दी गई जिसके कारण बिल नहीं आया। तीसरी कामयाबी पीएम-मंत्रियों को गिरफ्तारी के 30 दिन बाद स्वत: बर्खास्त किए जाने का बिल था जो विपक्ष के सामूहिक दबाव के कारण नहीं आ सका।
एफसीआरएफ विधेयक पर भी बोले रमेश
जयराम ने कहा कि एफसीआरए विधेयक वापस लेने की हमारी मांग थी मगर इसे जेपीसी को भेजना भी विपक्ष तथा उन तमाम लोगों की सफलता है जिन्होंने इसके खिलाफ सवाल उठाए। जयराम ने कहा कि 2015 में व्यापम घाेटाले के मुद्दे पर मानसून सत्र धूल गया था और इस बार नीट पेपर लीक पर सत्र नहीं चला।
मानसून सत्र से पहले परिसीमन बिल लाने की कसरत में शिवसेना यूबीटी तथा तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसदों को तोड़े जाने का जिक्र करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि कलंकित दो तिहाई बहुमत जुटाने का प्रयास किया गया लेकिन विपक्ष ने सरकार के इरादों को अपनी एकता की ताकत से विफल कर दिया।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ पारित प्रस्ताव के बाद स्पष्ट है कि सरकार इसको लेकर दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाएगी मगर फिर भी हम बेफ्रिक नहीं रहेंगे क्योंकि यह सरकार अचानक कुछ भी कर सकती है। पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह संसदीय कार्यवाही से पूरी तरह गायब थे।
राम मंदिर चोरी और छात्र आंदोलन पर बोले गोगोई
गौरव गोगोई ने कहा कि नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों पर पुलिस हिंसा तथा श्रीराम मंदिर में चंदा चोरी जैसे विषय पर पीएम तथा गृहमंत्री से हम लगातार सवाल करते रहे मगर वे चुप रहे और सदन में नहीं आए। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को भी गोगोई ने छात्रों के साथ विपक्ष के दबाव का सार्थक नतीजा बताया।
