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साइबर फ्रॉड का हुए हैं शिकार तो तुरंत करें ये काम? जानिए कैसे वापस मिलेंगे पैसे

Updated: Thu, 20 Aug 2026 10:09 PM (IST)

साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए राहत की खबर है, अब वे अपनी फ्रीज की गई रकम को ऑनलाइन मनी रीस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) के जरिए वापस पा सकते हैं।

साइबर फ्रॉड होने पर करें शिकायत (जागरण)

साइबर फ्रॉड होने पर करें शिकायत (जागरण)

HighLights

  1. साइबर ठगी की रकम ऑनलाइन वापस पाने का मौका।

  2. गृह मंत्रालय ने मनी रीस्टोरेशन माड्यूल (MRM) किया लॉन्च।

  3. शिकायत के बाद फ्रीज रकम के लिए ऑनलाइन आवेदन करें।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। साइबर ठगी में रकम गंवाने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। अगर शिकायत के बाद ठगी की रकम को बैंक खाते में सफलतापूर्वक फ्रीज या होल्ड कर लिया गया है तो उसे वापस पाने के लिए अब आनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आइ4सी) ने इसके लिए मनी रीस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) शुरू किया है। कानूनी प्रक्रिया, पुलिस की जांच और संबंधित बैंक की कार्रवाई के आधार पर रकम वापस पाई जा सकेगी।

आइ4सी के अनुसार साइबर ठगी का शिकार व्यक्ति पहले 1930 हेल्पलाइन या नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज कराएं।

शिकायत के बाद यदि रकम को होल्ड किया गया है और पीड़ित बहाली के लिए पात्र है तो उसे एमआरएम पर रीस्टोरेशन रिक्वेस्ट जमा करने का विकल्प मिलेगा।

ऐसे करें रिफंड के लिए आवेदन

पीड़ित को एमआरएम पर लाग-इन कर 'रेज रिफंड रिक्वेस्ट' विकल्प चुनना होगा। इसके बाद साइबर अपराध की शिकायत के समय मिला 14 अंकों का एनसीआरपी एकनॉलेजमेंट नंबर डालकर ओटीपी से सत्यापन करना होगा। पोर्टल पर शिकायत और बहाली के लिए उपलब्ध रकम की जानकारी दिखाई देगी।

इसके बाद पीड़ित को 'रिफंड एकाउंट डिटेल्स' टैब में उस बैंक खाते की जानकारी देनी होगी जिसमें बहाल की जाने वाली रकम जमा की जानी है। पोर्टल पर मांगे जाने वाले दस्तावेज, जैसे पैन कार्ड और अन्य जरूरी जानकारी भी देनी होगी।

यदि मामले में कोर्ट का आदेश हो तो उसे भी 'सेलेक्ट कोर्ट आर्डर' विकल्प के जरिए अपलोड किया जा सकता है। जानकारी की जांच के बाद रिक्वेस्ट सबमिट करनी होगी।

इसके बाद एक यूनिक रिक्वेस्ट आइडी मिलेगी, जिसे भविष्य में आवेदन की स्थिति जानने के लिए सुरक्षित रखना चाहिए। गलत बैंक विवरण या अन्य गलत जानकारी देने पर प्रक्रिया में देरी हो सकती है।

पहले शिकायत करना जरूरी

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एमआरएम उन मामलों के लिए है जिनमें ठगी की रकम को बैंकिंग प्रणाली में समय रहते रोक लिया गया है।

यदि ठगी की रकम पहले ही निकाल ली गई या आगे दूसरे खातों में भेज दी गई और उसे फ्रीज नहीं किया जा सका, तो एमआरएम के जरिये उसकी तत्काल बहाली की गारंटी नहीं है।

आइ4सी की व्यवस्था में शिकायत के बाद रकम को रोकने और आगे की कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित बैंकों, वित्तीय संस्थानों और राज्य या केंद्रशासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय से निभाई जाती है।

गृह मंत्रालय के अनुसार, आइ4सी के तहत संचालित सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्राड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) के माध्यम से 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम बचाई गई है।

सीएफसीएफआरएमएस का उद्देश्य वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की तत्काल सूचना मिलने पर रकम को आगे जाने से रोकना है।

साइबर ठगी की शिकायत और रकम वापसी प्रक्रिया

  • साइबर ठगी होते ही 1930 पर काल करें या एनसीआरपी पर शिकायत दर्ज करें।
  • चेक करें, शिकायत के बाद रकम बैंक खाते में होल्ड/फ्रीज कर ली गई है या नहीं।
  • यदि रकम बहाली के लिए पात्र पाई जाती है, तभी रिस्टोरेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
  • मनी रिस्टोरेशन माड्यूल पर जाकर 'रेज रीफंड रिक्वेस्ट' विकल्प चुनें।
  • शिकायत के समय मिले 14 अंकों के एनसीआरपी एकनालेजमेंट नंबर को दर्ज करें।
  • रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी से लाग-इन/सत्यापन करें।
  • पोर्टल पर शिकायत, उपलब्ध बहाली योग्य रकम और रिफंड अकाउंट डिटेल्स की जांच करें।
  • जिस बैंक खाते में रकम वापस चाहिए, उसकी सही जानकारी दर्ज करें।
  • मांगे जाने पर पैन कार्ड की कापी अपलोड करें।
  • कोर्ट का आदेश हो तो 'सेलेक्ट कोर्ट आर्डर' विकल्प के जरिए उसे अपलोड करें।
  • कैप्चा भरने के बाद डिटेल चेक करें और रिस्टोरेशन रिक्वेस्ट सबमिट करें।
  • 14 अंकों की यूनिक रिक्वेस्ट आइडी (यूआरएन) सुरक्षित रखें।
  • अगले चरण में संबंधित पुलिस/जांच एजेंसी को इंडेम्निटी बांड (क्षतिपूर्ति बांड) देना पड़ सकता है।
  • रकम की बहाली संबंधित कानूनी प्रक्रिया, पुलिस की कार्रवाई और बैंक की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

(समाचार एजेंसी एएनआइ के इनपुट के साथ)

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