DMK-AIADMK का किला ढहा, विजय के सिर सजा मुख्यमंत्री का ताज
अभिनेता-राजनेता सी. जोसेफ विजय ने चेन्नई में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्य में छह दशकों से ...और पढ़ें
HighLights
सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
डीएमके-एआईएडीएमके के छह दशक के शासन का अंत हुआ।
टीवीके ने अन्य दलों के समर्थन से सरकार बनाई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने आज रविवार (10 मई, 2026) को चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। लगभग पिछले छह दशकों से चले आ रहे डीएमके और एआईएडीएमके के बारी-बारी शासन का अब अंत हो गया है।
उन्होंने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के सामने बहुमत साबित करने के लिए कई दिनों तक चले संघर्ष के बाद शपथ ली। तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने शपथ दिलाई।
इस बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, विजय के माता-पिता, अभिनेत्री तृषा कृष्णन और अन्य लोग इस अवसर का हिस्सा बनने के लिए जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मौजूद थे। राज्यपाल ने अभिनेता-राजनेता विजय को निर्देश दिया कि वे 13 मई को या उससे पहले विधानसभा में विश्वास मत हासिल करें।
द्रविड़ पार्टियों की विरासत पर विजय ने लगाया विराम
विजय की पार्टी टीवीके ने तमिलनाडु चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की। उन्होंने द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) जैसी पारंपरिक ताकतों को पछाड़ दिया। इन द्रविड़ पार्टियों का राज्य की राजनीति में कई दशकों से दबदबा था। विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर एम.के. स्टालिन की जगह ली है।
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वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन से बनी सरकार
शनिवार को विदुथलाई चिरुथैगल काची और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने टीवीके को बिना किसी शर्त के समर्थन दिया। इस समर्थन की मदद से विजय 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 120 सीटों का आंकड़ा पार करने में सफल रहे। कांग्रेस, सीपीआई और सीपीएम ने पहले ही टीवीके का समर्थन दे दिया था।
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नौ मंत्रियों ने भी ली शपथ
तमिलगा वेट्री कझगम के नौ नेताओं ने रविवार को तमिलनाडु के मंत्री के रूप में शपथ ली। इनमें अनुभवी नेता के.ए. सेंगोत्तैयन भी शामिल थे, जो एआईएडीएमके से निकाले जाने के बाद विजय पार्टी में शामिल हुए थे।
विजय के साथ शपथ लेने वाले अन्य लोगों में आधव अर्जुन शामिल थे, जिन्हें विजय के भरोसेमंद रणनीतिकारों में से एक माना जाता है। सीटीआर निर्मल कुमार, जो बीजेपी के पूर्व पदाधिकारी थे और मदुरै के तिरुपरनकुंड्रम से जीते थे।
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'बुस्सी' आनंद, जो टीवीके के महासचिव हैं। राजमोहन, जो टीवी और फिल्म जगत की जानी-मानी हस्ती हैं। केटी प्रभु, जो पेशे से डेंटिस्ट थे और बाद में राजनेता बने और कराईकुडी से जीत हासिल की। अरुणराज, जो भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी हैं। पी वेंकटरमणन, जो चेन्नई के मायलापुर से विधायक हैं और 28 साल की एस कीर्तना, जो कैबिनेट में सबसे कम उम्र का चेहरा हैं।
दो साल पहले हुआ था टीवीके का गठन
मात्र दो साल पहले गठित हुई टीवीके ने पिछले महीने हुए विधानसभा चुनावों में जबरदस्त शुरुआत की और राज्य की 234 सीटों में से 108 सीटें जीतीं। हालांकि, पार्टी बहुमत के आंकड़े 118 तक पहुंचने में असफल रही।
इसके बाद विजय ने संभावित सहयोगियों के साथ गठबंधन को लेकर कई दौर की बातचीत की और यह साबित करने के लिए कि सरकार बनाने के लिए उनके पास पर्याप्त संख्या बल है, वे राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से चार बार मिले।
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चूंकि विजय दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुने गए थे और उन्हें एक सीट खाली करनी होगी। इसलिए गठबंधन का कुल आंकड़ा 116 रहा जो साधारण बहुमत के लिए जरूरी जादुई आंकड़े से दो कम है।
विजय की घोषणाएं
सीएम जोसेफ विजय ने बच्चों का शुक्रिया अदा किया और कहा कि टीवीके की जीत उन्हीं की वजह से हुई, क्योंकि उन्होंने अपने परिवारों को उनकी पार्टी के लिए वोट देने के लिए राजी किया। इसके साथ ही उन्होंने सरकार बनाने के लिए अपनी पार्टी को समर्थन देने के लिए कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दलों का धन्यवाद किया।
सीएम विजय ने कहा कि एक ताजा और नई शासन-व्यवस्था की शुरुआत हो गई है। अब वास्तविक, धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय के एक नए युग का आरंभ हो रहा है। उनका कहना है कि उनके अलावा कोई अन्य सत्ता केंद्र नहीं होगा। सत्ता का एकमात्र केंद्र वही होंगे।
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विजय ने नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया और कहा, "मैं लोगों का एक भी पैसा नहीं छूऊंगा।" उन्होंने लोगों से अपील की कि वे उन्हें बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए उचित समय दें।
फिल्मों से राजनीति तक विजय का सफर
विजय का जन्म 22 जून, 1974 को चेन्नई (तब मद्रास) में हुआ। वह पहली बार स्क्रीन पर एक बाल कलाकार के रूप में फिल्म 'वेट्री' (1984) में नजर आए थे। इस फिल्म में मुख्य भूमिका विजयकांत ने निभाई थी और इसका निर्देशन विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने किया था।
1992 में 18 साल की उम्र में उन्होंने 'नालैया थीरपू' के साथ मुख्य अभिनेता के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। अगले ही साल वे अपनी दूसरी फिल्म 'सेंदूरपांडी' में विजयकांत के छोटे भाई की भूमिका में दिखाई दिए।
विजय को 'थलापति' की उपाधि तब मिली, जब 1994 में उनकी तीसरी फिल्म 'रसिगन' के लिए उनके परिवार ने "इलया थलापति" (युवा कमांडर) नाम के एक प्रचारक उपाधि की शुरुआत की।
इसके बाद उन्होंने 'थुप्पाक्की' (2012), 'कत्थी' (2014), 'मर्सल' (2017), 'बिगिल' (2019) और 'लियो' (2023) जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। फिर उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी और 2024 में अपनी पार्टी टीवीके को लॉन्च करके राजनीति में कदम रखा।
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