DGP नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- 'राज्यों को मानना होगा कानून या हमारा दिशा-निर्देश'
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। चीफ जस्टिस (सीजेआइ) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली ...और पढ़ें

डीजीपी नियुक्ति: राज्यों को निर्देश - 'कानून का पालन करें या कोर्ट के दिशा-निर्देशों का' (फोटो- AI Generated)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर दी महत्वपूर्ण व्यवस्था
कोर्ट ने यह व्यवस्था तब दी, जब उसे बताया गया कि झारखंड, यूपी जैसे राज्यों ने अपनी अलग नियमावली बनाई है
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है।
चीफ जस्टिस (सीजेआइ) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए अपना अलग कानून बनाया है, उन्हें उस कानून का पालन करना होगा।
लेकिन, जिन राज्यों में ऐसा कोई कानून नहीं है, उन्हें 'प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।
प्रकाश सिंह मामला और यूपीएससी की भूमिका सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था तब दी, जब उसे बताया गया कि झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने अपनी अलग नियमावली बनाई है।
प्रकाश सिंह मामले के दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को पात्र अधिकारियों के नाम भेजने होते हैं। यूपीएससी इनमें से तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल चुनता है, जिनमें से राज्य सरकार एक को डीजीपी नियुक्त करती है, जिसका कार्यकाल दो वर्ष का होता है।
कोर्ट ने बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी क्योंकि उन्होंने यूपीएससी को प्रस्ताव भेज दिए थे। हालांकि, छत्तीसगढ़ और झारखंड से नियुक्ति प्रक्रिया पर दो सप्ताह में जवाब मांगा गया है।
''पैनल नहीं, सरकार का विश्वास जरूरी''
कोर्ट ने एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) राजू रामचंद्रन के उस सुझाव से सहमति जताई कि डीजीपी की नियुक्ति किसी बाहरी पैनल के बजाय राज्य सरकार के विवेक पर होनी चाहिए।
रामचंद्रन ने तर्क दिया, ''डीजीपी, मुख्य सचिव और गृह सचिव जैसे पदों पर नियुक्ति सरकार के आत्मविश्वास का मामला है। शासन चलाने के लिए मौजूदा सरकार का इन शीर्ष अधिकारियों पर भरोसा होना आवश्यक है।''
तदर्थ नियुक्तियों पर यूपीएससी की चिंता यूपीएससी ने कोर्ट को बताया कि कई राज्य जानबूझकर प्रस्ताव भेजने में देरी करते हैं और नियमित नियुक्ति के बजाय 'कार्यकारी डीजीपी' (तदर्थ) की व्यवस्था को प्राथमिकता देते हैं।
आयोग के अनुसार, इस देरी से योग्य और वरिष्ठ अधिकारी विचार किए जाने के अवसर से वंचित रह जाते हैं।
सुनवाई के दौरान सीजेआइ सूर्यकांत ने बंगाल के संदर्भ में चुटकी लेते हुए कहा, ''बंगाल की रुचि डीजीपी को राज्यसभा भेजने में अधिक है। उम्मीद है अब राज्य को एक स्थायी डीजीपी मिलेगा क्योंकि अब राज्यसभा में कोई रिक्ति नहीं है।''