नेपाल में भीषण तबाही क्यों मची, कैसे आ गई अचानक बाढ़? ISRO ने सैटेलाइट तस्वीरों से खोला राज
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की शाखा NRSC ने नेपाल के रसुवा में आई अचानक बाढ़ का सैटेलाइट-आधारित आकलन किया है।

नेपाल में बाढ़ पर इसरो का आकलन।
HighLights
भारतीय NRSC ने नेपाल के रसुवा बाढ़ का सैटेलाइट से आकलन किया।
4.9 तीव्रता के भूकंप से सर्क ग्लेशियर ढहा, हिमस्खलन हुआ।
नदी अवरुद्ध होकर टूटी, जिससे विनाशकारी अचानक बाढ़ आई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेपाल के रसुवा इलाके में आई भयानक अचानक बाढ़ ने पूरे दक्षिण एशिया के वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की एक अहम शाखा भारत के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) ने इस आपदा का शुरुआती सैटेलाइट-आधारित आकलन किया है।
भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल करके एनआरएससी के वैज्ञानिकों ने तबाही के दायरे का पता लगाया है और उन घटनाओं के क्रम को समझने में मदद की है, जिनकी वजह से हाल के वर्षों में इस इलाके में पहाड़ों से जुड़ी सबसे बुरी आपदाओं में से एक हुई। आज भारत के 56 सैटेलाइट ऑर्बिट में हैं।
एनआरएससी ने क्या आकलन किया?
एनआरएससी के आकलन के अनुसार, यह आपदा तिब्बत के ऊंचे पहाड़ों में शुरू हुई लगती है। शुरुआती अनुमान बताते हैं कि 4.9 तीव्रता के भूकंप के कारण सर्क ग्लेशियर (cirque glacier) नाम के ग्लेशियर का एक हिस्सा ढह गया होगा। ये ढहने से बर्फ और चट्टानों का एक विशाल हिमस्खलन हुआ, जो पहाड़ की खड़ी घाटी में तेजी से नीचे की ओर बढ़ा।
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माना जाता है कि इस हिमस्खलन ने कुछ समय के लिए नदी के बहाव को रोक दिया था। बाद में जब यह रुकावट टूटी तो पानी, कीचड़, चट्टानों और मलबे का एक विशाल सैलाब नीचे की ओर बह निकला। इसके परिणामस्वरूप आई अचानक बाढ़ त्रिशूली नदी प्रणाली में तेजी से फैली, जिससे तेजी से जलभराव हुआ और बड़े पैमाने पर तबाही मची।
सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों की रिपोर्टों में इस आपदा का संभावित कारण सर्क ग्लेशियर का ढहना और उसके बाद हुआ बर्फ और चट्टानों का हिमस्खलन बताया गया है।
भूकंप भी आया
भारत के भूकंप निगरानी नेटवर्क ने सुबह 8:22 बजे (IST) 10 किलोमीटर की गहराई पर 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने 28.076 अक्षांश और 86.494 देशांतर पर भूकंप दर्ज किया, जो रसुवा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। हिमालयी क्षेत्र भूकंप के प्रति बहुत संवेदनशील है।
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इस घटना के दायरे और असर को समझने के लिए हैदराबाद में एनआरएससी ने तेजी से जियोस्पेशियल असेसमेंट (भौगोलिक-स्थान संबंधी आकलन) किया। वैज्ञानिकों ने 24 अगस्त को यूरोप के सेंटिनल-2 सैटेलाइट से ली गई आपदा से पहले की तस्वीरों की तुलना 26 अगस्त को इसरो के रिसोर्ससैट-2A से ली गई आपदा के बाद की तस्वीरों से की।
इसके अलावा, जमीन में आए बदलावों का आकलन करने और नुकसान वाले इलाकों की पहचान करने के लिए बाढ़ के बाद की ताजा तस्वीरों के साथ-साथ 4 अप्रैल, 2026 की रिसोर्ससैट-2A की पुरानी तस्वीर की भी जांच की गई।
क्यों आई अचानक बाढ़?
सैटेलाइट से की गई तुलना में नदी के रास्ते में बड़े बदलाव दिखे। मलबे के जमा होने और बाढ़ की वजह से इसके कई बड़े हिस्से प्रभावित हुए। इन तस्वीरों की मदद से वैज्ञानिक बदले हुए इलाके का नक्शा बना पाए और यह समझ पाए कि पहाड़ी इलाकों में यह आपदा कैसे फैली।
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इस घटना ने एक बार फिर आपदा प्रबंधन में अंतरिक्ष तकनीक के महत्व को उजागर किया है। चक्रवात और भूस्खलन से लेकर बाढ़ और जंगल की आग तक सैटेलाइट-आधारित निगरानी आपातकालीन स्थिति में काम करने वालों के लिए एक जरूरी साधन बन गई है। रासुवा बाढ़ के मामले में आपदा से पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना करने की क्षमता ने प्रभावित इलाके की तेजी से पहचान करना और बाढ़ के कारणों को समझना संभव बना दिया।
सर्क ग्लेशियर की भूमिका अहम
इस जांच में सर्क ग्लेशियर की भूमिका अहम है। सर्क ग्लेशियर पहाड़ के किनारे कटोरे जैसी आकृति वाले गड्ढे में बनता है, जहां लंबे समय तक बर्फ और हिम जमा होती रहती है। इन ग्लेशियरों को अक्सर ऊंची ढलानों से आने वाले हिमस्खलनों से बर्फ और मलबा मिलता है। जब भू-वैज्ञानिक या मौसम संबंधी कारणों से इनका संतुलन बिगड़ता है तो इनसे भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानें ढलान से नीचे की ओर गिर सकती हैं।
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शुरुआती विश्लेषण से पता चलता है कि तिब्बत में ठीक ऐसी ही प्रक्रिया हुई होगी, जिससे एक ऐसी चेन रिएक्शन शुरू हुई जिसके कारण विनाशकारी बाढ़ आई। सैटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि इस घटनाक्रम में शायद बर्फ और चट्टानों का मलबा खिसकने, कुछ समय के लिए नदी का रास्ता रुकने, जमा हुए पानी का एक जलाशय बनने और फिर अचानक जमा हुए पानी और मलबे के बह निकलने जैसी घटनाएं शामिल थीं।
इन घटनाओं के मेल ने पहाड़ के एक हिस्से के गिरने की स्थानीय घटना को एक विनाशकारी बाढ़ की लहर में बदल दिया, जो नदी के बहाव की दिशा में काफी दूर तक फैल गई।
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