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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 17, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    खाद्य सचिव का दावा सरकारी गोदामों में गेहूं व चावल का पर्याप्त स्टॉक, वस्तुओं की महंगाई पर सरकार की नजर

    By Jagran NewsEdited By: Shashank Mishra
    Updated: Mon, 17 Oct 2022 09:23 PM (IST)

    खाद्य सचिव का दावा सरकारी गोदामों में गेहूं व चावल जैसे खाद्यान्न का पर्याप्त स्टॉक है। चालू सीजन में 771 लाख टन धान की खरीद का अनुमान है। केंद्रीय खा ...और पढ़ें

    केंद्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने कहा, बाजार में खाद्य वस्तुओं की महंगाई को लेकर सरकार की कड़ी नजर है।
    केंद्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने कहा, बाजार में खाद्य वस्तुओं की महंगाई को लेकर सरकार की कड़ी नजर है।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। घरेलू बाजार में महंगाई के हद पार करने पर ही सरकार हस्तक्षेप करेगी। केंद्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा, बाजार में महंगाई बेकाबू नहीं है। सरकारी गोदामों में खाद्यान्न का पर्याप्त स्टॉक है जिसकी जरूरत पड़ने पर बाजार में सरकार उतारेगी। पांडेय सोमवार को यहां आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे। एक सवाल के जवाब में पांडेय ने कहा कि खाद्य वस्तुओं की कीमतें सामान्य से ऊपर नहीं है, जिसे असामान्य नहीं कहा जा सकता है।

    चालू खरीफ सीजन में कुल 771 लाख टन धान की खरीद का अनुमान

    न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं व चावल की सरकारी खरीद पर अन्य लागत जोड़ने पर ही कीमतें असामान्य नहीं हैं। हालांकि बाजार में खाद्य वस्तुओं की महंगाई को लेकर सरकार की कड़ी नजर है। लगातार निगरानी की जा रही है।

    भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अशोक मीना ने इस दौरान सेंट्रल पूल के स्टॉक का ब्योरा देते हुए कहा कि फिलहाल यानी एक अक्टूबर 2022 को पूल में 227 लाख टन गेहूं था, जबकि बफर स्टॉक के हिसाब से 205 लाख टन होना चाहिए। यह स्टॉक एक अप्रैल 2023 को 113 लाख होगा, जबकि बफर स्टॉक 75 लाख टन होना चाहिए।

    इसी तरह चावल का स्टॉक अक्तूबर 2022 तक 205 लाख टन था, जबकि बफर स्टॉक 103 लाख टन होना चाहिए। इसके मुकाबले एक अप्रैल 2023 को चावल का स्टॉक 237 लाख टन होगा, उस समय बफर स्टॉक 136 लाख टन होना चाहिए। लिहाजा सरकारी गोदामों में पर्याप्त भंडार होगा।

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    सीएमडी मीना ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत सार्वजनिक राशन प्रणाली (पीडीएस) और अन्य कल्याणकारी योजना की जरूरतों के बाद यह स्टॉक होगा जो बफर मानक से अधिक होगा। कोविड-19 के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सात चरणों में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज वितरित किया गया। यह योजना दिसंबर 2022 तक जारी रहेगी। इन सात चरणों में कुल 1121 लाख टन अनाज का वितरण किया गया, जिसकी कुल लागत 3.91 लाख करोड़ रुपए की लागत का अनुमान है।

    खाद्य सचिव पांडेय ने बताया कि चालू खरीफ सीजन 2022-23 में कुल 771 लाख टन धान की खरीद का अनुमान है, जिससे 518 लाख टन चावल तैयार होगा।

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    इसमें रबी सीजन के धान को जोड़ लिया जाए तो धान की कुल मात्रा 900 लाख टन हो सकती है, जिससे 600 लाख टन चावल तैयार होगा। चालू खरीफ सीजन में मोटे अनाज की खरीद पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित करने के उपलक्ष्य में सरकार इस वर्ग के अनाज पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

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