बंकिम चंद्र चटर्जी के नाम पर होगा बंगाल के लोक भवन के एक द्वार का नाम, राज्यपाल ने लिया निर्णय
बंगाल के राज्यपाल डॉ सीवी आनंद बोस ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम की रचना के 150 साल पूरे होने पर एक साल तक चलने वाले जश्न क ...और पढ़ें
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वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में लिया निर्णय (फाइल फोटो)
HighLights
राज्यपाल ने की एक साल तक चलने वाले जश्न की घोषणा
लोक भवन के दक्षिण-पश्चिम द्वार का नाम बदला जाएगा
वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर कार्यक्रम
राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल के राज्यपाल डॉ सीवी आनंद बोस ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम की रचना के 150 साल पूरे होने उपलक्ष्य में एक साल तक चलने वाले जश्न कार्यक्रमों की घोषणा की है।
इसी के साथ राज्यपाल ने लोक भवन (पूर्व में राजभवन) के दक्षिण-पश्चिम द्वार का नाम बंकिम चंद्र चटर्जी के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। लोक भवन के एक अधिकारी ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि राज्यपाल रविवार को लोक भवन में वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में होने वाले कार्यक्रम में दक्षिण-पश्चिम द्वार का नाम औपचारिक रूप से बंकिम चंद्र चटर्जी के नाम पर रखेंगे।
लोक भवन ने बयान किया जारी
लोक भवन द्वारा जारी एक बयान में बताया गया कि वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर एक साल तक चलने वाले कार्यक्रम की शुरुआत 10 नवंबर को राज्यपाल के नेतृत्व में वंदे मातरम् मार्च के साथ ही शुरू हो गया था, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों, शिक्षकों और बंगाली समाज के हर तबके के लोग शामिल हुए थे।
राज्यपाल ने वंदे मातरम के दूरगामी असर और रेलिवेंस पर काम करने, रिसर्च करने, पब्लिकेशन निकालने और वर्कशाप और सेमिनार करने के लिए लोक भवन में एक बंदे मातरम चेयर भी शुरू की है। इसके अलावा लोक भवन ने बांग्ला भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए वंदे मातरम पुरस्कार भी शुरू किए हैं।
रविवार को राज्यपाल वंदे मातरम की लौ को बनाऐ रखने के लिए लोक भवन में नित्यशिखा जलायेंगे। बयान में बताया गया कि समारोह की शुरुआत हुगली जिले के चुंचुड़ा में एक कार्यक्रम से होगी, जहां बंकिम चंद्र ने वंदे मातरम गीत लिखा था।
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150 जगहों पर आयोजित किया जाएगा कार्यक्रम
बंडेल, चिनसुरा, हुगली से एक रंगारंग जुलूस निकाला जाएगा। वंदे मातरम थीम पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में 150 जगहों पर आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में राज्यपाल स्वयं या लोक भवन के अधिकारी शामिल होंगे।