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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 24, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Dhemaji Blast 2004: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने पलटा जिला अदालत का फैसला, धेमाजी विस्फोट मामले में सभी छह लोग बरी

    By AgencyEdited By: Devshanker Chovdhary
    Updated: Thu, 24 Aug 2023 04:07 PM (GMT+05:30)

    गुवाहाटी हाई कोर्ट ने गुरुवार को 2004 के धेमाजी बम विस्फोट मामले में सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया। हाई कोर्ट ने जिला और सत्र अदालत के फैसले को पलटते ...और पढ़ें

    गुवाहाटी हाई कोर्ट ने 2004 के धेमाजी विस्फोट में सभी छह लोगों को बरी कर दिया। (फाइल फोटो)
    गुवाहाटी हाई कोर्ट ने 2004 के धेमाजी विस्फोट में सभी छह लोगों को बरी कर दिया। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. धेमाजी में 2004 में बम धमाका हुआ था।
    2. बम धमाके में 18 लोगों की मौत हुई थी।
    3. उल्फा ने बम धमाके की जिम्मेदारी ली थी।

    गुवाहाटी, पीटीआई। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने गुरुवार को 2004 के धेमाजी बम विस्फोट मामले में सभी छह आरोपियों को बरी कर दिया। हाई कोर्ट ने जिला और सत्र अदालत के फैसले को पलटते हुए यह आदेश जारी किया।

    हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला

    न्यायमूर्ति माइकल जोथनखुमा और मृदुल कुमार की खंडपीठ ने धेमाजी जिला और सत्र अदालत के 2019 के आदेश को पलट दिया, जिसमें चार लोगों को आजीवन कारावास और दो अन्य को चार साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

    पहले छह को ठहराया गया था दोषी

    हाई कोर्ट ने 24 जुलाई को छह आरोपियों द्वारा दायर अपील पर सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया है। जिला और सत्र अदालत नेदीपांजलि बुरागोहेन, मुही हांडिक, जतिन दुबोरी और लीला गोगोई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और प्रशांत भुइयां व हेमेन गोगोई को चार साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

    धेमाजी बम धमाके में 18 लोगों की हुई थी मौत

    बता दें कि असम के धेमाजी में 2004 में बम धमाका हुआ था। स्वतंत्रता दिवस के दिन हुए भीषण बम विस्फोट में 13 स्कूली बच्चों सहित 18 लोग मारे गए थे। यह विस्फोट स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान धेमाजी कॉलेज मैदान में हुआ था।

    उल्फा ने ली थी विस्फोट की जिम्मेदारी

    आतंकवादी समूह यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) ने इस धमाके की जिम्मेदारी ली थी। विस्फोट में मारे गए लोगों के अलावा लगभग 45 लोग घायल हो गए थे।

    इससे पहले कोर्ट ने 2019 में छह को दोषी करार दिया था और आठ को बरी कर दिया था। पुलिस ने 15 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिसमें 14 लोग गिरफ्तार हुए थे।

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