दिव्यांगजन टोल फ्री फास्टैग का बदला नियम, हर साल रिन्यूअल से मिली छूट; जानिए हर सवाल का जवाब
केंद्र सरकार ने दिव्यांगों के फास्टैग छूट नियमों में बदलाव किया है, जिसके तहत अब उन्हें हर साल रिन्यू नहीं कराना होगा।

फास्टैग के नियमों में बदलाव। (फाइल फोटो।)
HighLights
दिव्यांगों के फास्टैग नियमों में केंद्र सरकार ने बदलाव किया।
अब हर साल फास्टैग रिन्यू कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर 3 से 5 साल तक वैधता।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिव्यांगों के छूट वाले फास्टैग के नियम बदल दिए हैं, जो 2 अक्टूबर से लागू हो गए। बदले नियमों के मुताबिक, अब दिव्यांगों को फास्टैग छूट के लिए हर साल रिन्यू कराने की जरूरत नहीं होगी।
दिव्यांगता प्रमाण-पत्र या यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड में दर्ज दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर इसकी वैधता 3 से 5 साल तक की होगी।
क्या बदलाव हुआ?
दिव्यांगजनों के लिए जारी होने वाला खास फास्टैग है। पात्र वाहनों को नेशनल हाइवे फीस नियम, 2008 के तहत टोल में पूरी छूट मिलती है। पहले हर साल रिन्यू कराना जरूरी था।
कैसे मिलेगी छूट?
नियम के अनुसार, छूट उन वाहनों के लिए है, जो शारीरिक दिव्यांगता वाले व्यक्ति के उपयोग के लिए विशेष रूप से डिजाइन और बनाए गए हों या 'दिव्यांगजन' स्वामित्व श्रेणी में रजिस्टर्ड हों। यानी केवल दिव्यांगता प्रमाण-पत्र होने से हर गाड़ी टोल-फ्री नहीं होगी।
दिव्यांगता वैधता कितने साल की होगी?
70% से 100% दिव्यांगता वालों का फास्टैग 5 साल के लिए वैध होगा। 40% से 70% दिव्यांगता वालों का फास्टैग 3 साल के लिए वैध होगा। इस अवधि के बाद फास्टैग को रिन्यू कराना होगा। हर साल रिन्यू से राहत मिलेगी।
फास्टैग छूट के लिए आवेदन कहां करें?
हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लि. के अनुसार, आवेदन फॉर्म, वाहन का आरसी, पहचान-पत्र और छूट का प्रमाण देना होता है। दिव्यांगों के मामले में वैध दिव्यांगता प्रमाण-पत्र/यूनिक डिसएबिलिटी जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। आवेदन फास्टैग पोर्टल पर करके एनएचएआई के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को चुनना होता है।
