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स्वास्थ्य मंत्रालय का बड़ा फैसला, अब लेबल पर छापना होगा स्टरलाइजेशन सुविधा का लाइसेंस नंबर

Updated: Sun, 23 Aug 2026 11:20 PM (IST)

स्वास्थ्य मंत्रालय ने चिकित्सा उपकरणों पर स्टरलाइजेशन सुविधा का लाइसेंस नंबर छापना अनिवार्य कर दिया है, जिससे पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी।

चिकित्सा उपकरणों पर स्टरलाइजेशन लाइसेंस नंबर अनिवार्य

चिकित्सा उपकरणों पर स्टरलाइजेशन लाइसेंस नंबर अनिवार्य

HighLights

  1. चिकित्सा उपकरणों पर स्टरलाइजेशन सुविधा का लाइसेंस नंबर अनिवार्य।

  2. यह कदम पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा बढ़ाएगा।

  3. भारतीय निर्माताओं ने निर्यात और प्रतिस्पर्धा पर चिंता जताई।

आईएएनएस, नई दिल्ली। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

इसके तहत, अब उन सभी चिकित्सा उपकरण निर्माताओं के लिए अपने उत्पादों के लेबल पर स्टरलाइजेशन (कीटाणुमुक्त) सुविधा के लाइसेंस नंबर को प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है जो इस प्रक्रिया को बाहरी या अनुबंधित इकाइयों से पूरा कराते हैं।

जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि मंत्रालय ने मेडिकल डिवाइसेस रूल्स, 2017 के नियम 44 में गैजेट नोटिफिकेशन के माध्यम से यह संशोधन किया है।

स्टरलाइजेशन का मतलब है माइक्रोबियल कंटैमिनेशन (सूक्ष्मजीवों से होने वाली गंदगी) को खत्म करना या उसे इतने कम स्तर पर लाना कि चिकित्सा उपकरण अस्पतालों और क्लीनिकों में इस्तेमाल के लिए सुरक्षित हों और मरीजों की जान को कोई जोखिम न हो।

सरकार का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि किसी भी आपात स्थिति या तकनीकी खामी के दौरान यह आसानी से पता लगाया जा सके कि संबंधित उपकरण को किस अधिकृत इकाई में स्टरलाइज किया गया था। इससे पूरी आपूर्ति श्रृंखला में जवाबदेही तय होगी।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अनुपालन के मोर्चे पर चुनौतियां दूसरी ओर, घरेलू चिकित्सा उपकरण निर्माताओं ने इस नए नियम पर अपनी गहरी चिंताएं व्यक्त की हैं।

'एसोसिएशन आफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री' के फोरम कोआर्डिनेटर राजीव नाथ के अनुसार, इस नियम से विशेष रूप से एक्सपोर्ट शिपमेंट में भारी रुकावट आ सकती है।

निर्माताओं के लिए उपलब्ध क्षमता और समय के आधार पर स्वीकृत स्टरलाइजेशन सुविधाओं के बीच उत्पादन स्थानांतरित करना अब मुश्किल हो जाएगा।

वैश्विक नियामक ढांचे में गुणवत्ता और ट्रेसबिलिटी की मुख्य जिम्मेदारी आमतौर पर निर्माता की अपनी होती है, और बैच-स्तर की जवाबदेही के दस्तावेज कंपनी के पास सुरक्षित रहते हैं। उद्योग जगत का तर्क है कि दुनिया के किसी अन्य प्रमुख देश में सब-कंट्रैक्टर का विवरण पैकेजिंग पर छापने की बाध्यता नहीं है।

ऐसे में, यह नियम भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी मोर्चे पर थोड़ी मुश्किल में डाल सकता है।