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    रात 1 बजे के बाद आया कोर्ट का फैसला: पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त, गिरफ्तारी की तलवार लटकी

    Updated: Thu, 28 May 2026 08:14 AM (IST)

    हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को भोपाल को कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी। ...और पढ़ें

    पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त (फोटो- एक्स)

    पूर्व जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त (फोटो- एक्स)

    HighLights

    1. बुधवार को पौने तीन घंटे चली बहस के बाद गुरुवार को रात एक बजे के बाद बाहर आया आदेश

    2.  त्विषा की शादी नौ दिसंबर, 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी         

    जेएनएन, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह को भोपाल को कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी। बुधवार को पौने तीन घंटे की बहस के बाद रिजर्व किया गया ऑर्डर गुरुवार को रात्रि एक बजे के बाद बाहर आया। दरअसल, कोर्ट ने बुधवार को शाम पांच बजकर 20 मिनट पर ही साफ कर दिया था कि आदेश पारित करेंगे।

    बुधवार की सुनवाई में सीबीएसई ने दोनों मामलों में पक्षकार बनाए जाने और संशोधन के लिए आवेदन दायर किए, जिन्हें कोर्ट ने स्वीकार किया था। मामला त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना से जुड़ा है। त्विषा की शादी नौ दिसंबर, 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी।

    12 मई, 2026 को त्विषा की मौत फांसी पर लटकी अवस्था में हुई। बाद में कटारा हिल्स थाने में एफआईआर दर्ज हुई। 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश भोपाल ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी थी, जिसे चुनौती दी गई।

    मृतका के पिता की ओर से कहा गया कि व्हाट्सऐप चैट्स में पति और ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ना, गर्भ पर संदेह और गर्भपात के लिए दबाव की बातें सामने आईं।

    आरोप लगाया गया कि ससुराल पक्ष मृतका को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था और उसके चरित्र पर संदेह करता था। यह भी कहा गया कि गिरिबाला सिंह ने जमानत मिलने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मृतका की छवि खराब करने की कोशिश की।

    अभियोजन ने कोर्ट को बताया कि पोस्टमार्टम में फांसी के अलावा शरीर पर छह अन्य चोटें भी मिलीं। एम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि ये चोटें शव को नीचे उतारने या अस्पताल ले जाने से नहीं हुईं।

    सीबीआई और राज्य सरकार ने तर्क दिया कि जांच शुरुआती चरण में है और आरोपित का कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी है। हाई कोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

    हाई कोर्ट ने कहा कि वाट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयानों में सास गिरिबाला सिंह के विरुद्ध भी स्पष्ट आरोप हैं। हाई कोर्ट ने यह भी माना कि जमानत मिलने के बाद आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि जमानत आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित हो तो उसे निरस्त किया जा सकता है।

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    न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने 15 मई, 2026 को दी गई अग्रिम जमानत को निरस्त करते हुए आदेश निरस्त कर दिया। दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त कर दी।