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बर्फ से ढके पहाड़ हो जाएंगे वीरान? हिमालय पर कम स्नोफॉल से नदियों पर मंडरा रहे संकट के बादल

Published: Wed, 14 Jan 2026 11:14 AM (IST)

जलवायु परिवर्तन के कारण हिंदू-कुश हिमालय में पिछले 23 सालों में सबसे कम बर्फबारी दर्ज की गई है। ICIMOD की ...और पढ़ें

हिंदू-कुश में बर्फबारी पिछले 23 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंची। फाइल फोटो

हिंदू-कुश में बर्फबारी पिछले 23 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंची। फाइल फोटो

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन दुनिया की वो हकीकत बन चुकी है, जिससे मुंह फेरना नामुमकिन है। धरती के बढ़ते तापमान का असर मौसम पर साफ देखने को मिल रहा है। देर से दस्तक देती ठंड, पहाड़ों पर पिघलती बर्फ और समुद्र का बढ़ता जलस्तर चीख-चीख कर आने वाली आपदा के संकेत दे रहे हैं। इसी बीच हिंदू- कुश हिमायलय का चौंकाने वाला डेटा सामने आया है, जिसने क्लाइमेट चेंज पर एक बार फिर मुहर लगा दी है।

इंटरनेशनल सेंटर ऑफ इंटिग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) ने हिंदू-कुश पर्वत का सैटेलाइट डेटा पेश किया है। इसके अनुसार, पिछले दो दशकों में इस बार हिमालय पर सबसे कम बर्फबारी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 23 सालों में हिंदू-कुश हिमालय पर इस बार स्नो सीजन बेहद कम रहा है।

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IPCC ने दी थी चेतावनी

इससे पहले जलवायु परिवर्तन से संबंधित अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) ने भी अपनी रिपोर्ट में बढ़ते तापमान को लेकर चेतावनी जारी की थी। IPCC ने दावा किया था कि धरती के तापमान में बढ़ोत्तरी के कारण बर्फबारी के सीजन में कमी आ सकती है। ऊंचाई वाली जगहों पर कम समय के लिए बर्फबारी होगी और बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां धीरे-धीरे पथरीली नजर आएंगी।

एशिया का 'वॉटर टावर'

बता दें कि हिंदू-कुश को एशिया का 'वॉटर टावर' कहा जाता है, जो कई बड़ी नदियों का स्रोत है। इन्हीं नदियों के कारण मैदानी इलाकों में हरियाली देखने को मिलती है। ऐसे में कम बर्फबारी और तेजी से पिघलती बर्फ सभी के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है।

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हिंदू-कुश हिमालय

हिंदू-कुश हिमालय लगभग 800 किलोमीटर की पर्वत श्रृंखला है, जो अफगानिस्तान से लेकर उत्तरी पाकिस्तान और ताजिकिस्तान में फैली है। हिमालय पर्वतों को भी हिंदू-कुश का विस्तार माना जाता है। इन पहाड़ों में हजारों  बड़े ग्लेशियर मौजूद हैं, जो गंगा, सिंधू और ब्रह्मपुत्रा समेत कई बड़ी नदियों के मुख्य स्रोत हैं।

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