पेपर लीक मामले में आरोपियों की कितनी संपत्ति हुई जब्त? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने वाले आरोपियों और उनके परिवार की संपत्ति जब्त करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है।
-1787070582459_m.webp)
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब (फोटो-पीटीआई)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने पेपर लीक पर केंद्र-राज्यों से जवाब मांगा।
याचिका में आरोपियों व परिवार की संपत्ति जब्त करने की मांग।
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने जनहित याचिका दायर की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करने वाले आरोपितों और उनके परिवार के सदस्यों की संपत्ति जब्त करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने मंगलवार को अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब
सुनवाई के दौरान उपाध्याय ने कहा कि अब वह पेपर लीक मामलों की जांच और ट्रायल के लिए समयसीमा तय करने की मांग नहीं कर रहे हैं, क्योंकि सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित हो चुका है। उनका जोर अब पेपर लीक से जुड़े अपराधियों के खिलाफ आर्थिक और अन्य कड़ी कार्रवाई पर है।
याचिका में मांग की गई है कि पेपर लीक के आरोपितों और उनके परिवार की संपत्ति का आकलन कराया जाए और मामले की प्रकृति के अनुसार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धनशोधन निवारण अधिनियम, बेनामी संपत्ति कानून और काले धन से जुड़े कानूनों के प्रविधान लागू किए जाएं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि दोषियों को लगातार और प्रभावी सजा मिलने से ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है।
याचिका में कानून आयोग को भी पेपर लीक रोकने के लिए दूसरे देशों में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं का अध्ययन करने और तीन महीने के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश देने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक के मामलों में अधिकारियों की बार-बार होने वाली विफलता से छात्रों के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं।
इसका असर केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि छात्रों और उनके परिवारों को मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान, पढ़ाई और नौकरी के अवसरों के नुकसान तथा कर्ज के बढ़ते बोझ का सामना करना पड़ता है। याचिका में ऐसे मामलों के चलते आत्महत्या की घटनाओं में बढ़ोतरी का भी उल्लेख किया गया है।
याचिकाकर्ता ने कहा है कि जून 2025 से लागू सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के बावजूद व्यवस्था में कुछ कमियां बनी हुई हैं। इनमें जांच और ट्रायल के लिए स्पष्ट समयसीमा का अभाव भी शामिल है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
यह भी पढ़ें- बच्चों के यौन शोषण वाले कंटेंट पर सरकार सख्त, फेसबुक-इंस्टाग्राम की कानूनी सुरक्षा वापस लेने की दी चेतावनी
