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'एथनॉल नहीं होता तो पेट्रोल 125 रुपये लीटर बिकता', E-20 फ्यूल पर संसद में सरकार का दावा

Published: Sat, 01 Aug 2026 12:39 PM (IST)

केंद्र सरकार ने संसद में एथनॉल मिश्रण नीति का बचाव किया, दावा किया कि इसके बिना पेट्रोल 125 रुपये प्रति लीटर होता।

एथनॉल नहीं होता तो पेट्रोल 125 रुपये लीटर बिकता (फाइल फोटो)

एथनॉल नहीं होता तो पेट्रोल 125 रुपये लीटर बिकता (फाइल फोटो)

HighLights

  1. एथनॉल के बिना पेट्रोल 125 रुपये प्रति लीटर होता

  2. उपभोक्ताओं को 30 रुपये प्रति लीटर की सीधी बचत

  3. E-20 ईंधन वैज्ञानिक और चरणबद्ध तरीके से लागू

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण की नीति का संसद में जोरदार बचाव किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि अगर यह कदम न उठाया गया होता, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने पर देश में पेट्रोल की कीमत 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती।

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, घरेलू स्तर पर तय कीमतों पर खरीदे गए एथनॉल के कारण मिडिल ईस्ट संकट के दौरान उपभोक्ताओं को लगभग 30 रुपये प्रति लीटर की सीधी बचत हुई और उन्हें 94.77 रुपये प्रति लीटर का ही भुगतान करना पड़ा।

क्योंकि, भारत में पेट्रोल में 20% एथनॉल मिलाया जा रहा था। इथेनॉल अपने ही देश में बनता है और इसकी कीमत पहले से तय रहती है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने का इस पर कोई असर नहीं पड़ा।

मंत्रालय ने उन आरोपों का भी खंडन किया कि गरीबों के लिए निर्धारित अनाज को एथनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किया जा रहा था, या सब्सिडी वाले एफसीआई चावल का उपयोग कार्यक्रम का समर्थन करने के लिए किया जा रहा था।

अभी कितने रुपये है पेट्रोल?

गौरतलब है कि 28 फरवरी, 2026 को मिडिल ईस्ट में शुरू हुए युद्ध के बाद भारत में सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लगभग 75 दिनों तक स्थिर रखा, फिर मई में इनमें 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। दिल्ली में अब स्टैंडर्ड E-20 पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है, जबकि बिना एथनॉल वाले पेट्रोल की कीमत 169 रुपये है।

वाहनों की माइलेज

सड़क परिवहन मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि E-10 ईंधन के लिए डिजाइन किए गए BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों में E20 पेट्रोल डालने पर गाड़ी की माइलेज या ईंधन दक्षता में 2% से 6% की कमी आ सकती है।

इससे पहले पेट्रोलियम मंत्रालय ने माइलेज में 3% से 5% तक की ही कमी होने की बात कही थी। दोनों मंत्रालयों ने साफ किया कि एथेनॉल मिश्रण का काम अचानक नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक और चरणबद्ध (Step-by-step) तरीके से किया गया है। इसके लिए देश में एथनॉल उत्पादन क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर को धीरे-धीरे बढ़ाया गया।

जांच और टेस्टिंग के बाद लिया गया फैसला

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में बताया कि E-20 पेट्रोल शुरू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल कंपनियों से सलाह ली गई। यह फैसला गाड़ी के इंजन की मजबूती, पार्ट्स की अनुकूलता और प्रदूषण के स्तर की पूरी जांच और सत्यापन के बाद लिया गया।

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