यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 10, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
शोध: तनाव की स्थिति में शरीर के अंग करते हैं आपस में संवाद, व्यायाम के दौरान हमारा हृदय करता है यह काम
एक नए अध्ययन ने यह दिखाया है कि शारीरिक तनाव मसलन व्यायाम या नींद की कमी के दौरान शरीर के विभिन्न अंग एक-दूसरे के साथ कैसे संवाद करते हैं? शोधकर्ताओं ...और पढ़ें

HighLights
- व्यायाम के दौरान अन्य अंगों से सबसे अधिक इनपुट प्राप्त करता है हमारा हृदय
- शोधकर्ताओं ने 'ट्रांसफर एंट्रापी' का उपयोग कर बनाया मानचित्रों का नेटवर्क
पीटीआई, नई दिल्ली। एक नए अध्ययन ने यह दिखाया है कि शारीरिक तनाव मसलन व्यायाम या नींद की कमी के दौरान शरीर के विभिन्न अंग एक-दूसरे के साथ कैसे संवाद करते हैं? शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे किसी बीमारी का पहले निदान करने में मदद मिल सकती है।
जर्नल ऑफ फिजियोलाजी में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ
जर्नल ऑफ फिजियोलाजी में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है। पोर्ट्समाउथ विश्वविद्यालय और यूनिवर्सिटी कालेज लंदन के शोधकर्ताओं ने कहा कि यह अध्ययन हृदय या श्वास दर जैसे अलग-अलग मापों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय शरीर क्रिया विज्ञान के ''संपूर्ण शरीर'' दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करता है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि 'ट्रांसफर एंट्रापी' (शरीर के संकेतों की निगरानी की एक विधि) का उपयोग करते हुए मानचित्रों का एक नेटवर्क बनाया गया, जो यह दर्शाता है कि तनाव की स्थिति में शरीर के कौन से अंग 'सूचना केंद्र' के रूप में कार्य करते हैं।
शरीर को व्यायाम के अनुकूल बनाने में अग्रणी भूमिका निभाता है हृदय
उदाहरण के लिए शोधकर्ताओं ने बताया कि व्यायाम के दौरान हृदय मांसपेशियों में रक्त प्रवाहित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा होता है। उस समय यह अन्य अंगों से सबसे अधिक इनपुट प्राप्त करता है। इसलिए यह शरीर को व्यायाम के अनुकूल बनाने में अग्रणी भूमिका निभाता है।
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हमारा शरीर एक समय में केवल एक ही चीज पर प्रतिक्रिया नहीं करता
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में एसोसिएट प्रोफेसर और नेटवर्क फिजियोलाजी लैब के प्रमुख अलीरेजा मनी ने कहा कि हमारा शरीर एक समय में केवल एक ही चीज पर प्रतिक्रिया नहीं करता है। यह एकीकृत तरीके से और बुद्धिमानी से प्रतिक्रिया दे रहा होता है। इसका मानचित्र बनाकर हम सीख रहे हैं कि सामान्य पैटर्न कैसा दिखता है, ताकि हम यह पता लगा सकें कि कब चीजें गलत हो रही हैं।