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80 साल, 4 जंग और अविश्वास की कहानी... भारत-पाक सरहद पर क्यों आज भी मौजूद है बारूद की गंध?

Updated: Fri, 14 Aug 2026 09:05 PM (IST)

प्यू रिसर्च सेंटर के 2026 के सर्वे के अनुसार, विभाजन के आठ दशक बाद भी भारत और पाकिस्तान के बीच गहरा अविश्वास और दुश्मनी कायम है।

प्यू सर्वे: 54% भारतीय पाकिस्तान को सबसे बड़ा खतरा मानते हैं।

प्यू सर्वे: 54% भारतीय पाकिस्तान को सबसे बड़ा खतरा मानते हैं।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 1947 के विभाजन के करीब आठ दशक बाद भी भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में अविश्वास और दुश्मनी की गहरी छाप कायम है। दोनों परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी देशों के लोग आज भी एक-दूसरे को अपने देश के लिए सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा मानते हैं।

'प्यू रिसर्च सेंटर' के 2026 के सर्वे में भारत-पाकिस्तान के लोगों की एक-दूसरे को लेकर सोच की यह तस्वीर सामने आई है। फरवरी से मई 2026 के बीच दक्षिण एशिया में किए गए इस सर्वे के मुताबिक, 54 प्रतिशत भारतीयों ने पाकिस्तान को देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।

वहीं, 43 प्रतिशत पाकिस्तानियों ने भारत को अपना सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा माना। भारत में पाकिस्तान के बाद चीन 21 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। पाकिस्तान में भारत के बाद इजरायल और अमेरिका 24-24 प्रतिशत के साथ प्रमुख खतरे माने गए हैं।

78% लोगों की पाक पर राय नकारात्मक

सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि दोनों देशों के बीच नकारात्मक धारणा कितनी गहरी है। भारत में 78 प्रतिशत लोगों ने पाकिस्तान के बारे में नकारात्मक राय जताई। इनमें 65 प्रतिशत की राय बहुत नकारात्मक रही।

दूसरी ओर, पाकिस्तान में करीब नौ में से आठ लोगों ने भारत के प्रति नकारात्मक राय जाहिर की। इनमें 73 प्रतिशत ने भारत को लेकर बहुत प्रतिकूल राय व्यक्त की।

प्यू रिसर्च के मुताबिक, भारत में पाकिस्तान को लेकर नकारात्मक सोच कोई हालिया बदलाव नहीं है। 2013 के बाद से पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक राय रखने वाले भारतीयों का अनुपात कभी 20 प्रतिशत से ऊपर नहीं गया।

पाकिस्तान में भी भारत को लेकर लंबे समय से नकारात्मक धारणा रही है। वहां भारत के प्रति सकारात्मक राय रखने वालों का आंकड़ा आमतौर पर एकल अंक से लेकर करीब एक-तिहाई तक ही रहा है।

भारतीय मुस्लिमों की राय में दिखा अंतर

सर्वे में भारत के भीतर भी एक महत्वपूर्ण अंतर सामने आया। 21 प्रतिशत भारतीय मुस्लिमों ने पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि भारतीय हिंदुओं में यह आंकड़ा केवल 6 प्रतिशत रहा।

इसी तरह पाकिस्तान को सबसे बड़ा खतरा मानने वाले भारतीय मुस्लिमों का अनुपात 34 प्रतिशत रहा, जबकि हिंदुओं में यह आंकड़ा 57 प्रतिशत था।

दोनों देशों के लोग अपने पक्ष को मानते हैं सही

भारत-पाकिस्तान संबंधों में अविश्वास का एक और पहलू सर्वे में सामने आया। दोनों देशों के लोग मानते हैं कि उनकी अपनी सरकार और जनता पड़ोसी देश के साथ अच्छे संबंध चाहती है, लेकिन दूसरे देश की सरकार और जनता की नीयत पर भरोसा नहीं करते।

अधिकांश भारतीयों का मानना है कि भारत सरकार और भारतीय जनता पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहती है। लेकिन पाकिस्तानियों का बड़ा हिस्सा इस बात से असहमत है और मानता है कि भारत सरकार और भारतीय जनता बेहतर संबंधों के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं।

पाकिस्तान में भी तस्वीर बिल्कुल उलट है। अधिकांश पाकिस्तानियों का मानना है कि उनकी सरकार और जनता भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहती है। इसके विपरीत अधिकांश भारतीयों को लगता है कि पाकिस्तान की सरकार और जनता संबंध सुधारने के लिए गंभीर नहीं हैं। करीब एक-चौथाई भारतीय इस सवाल पर असमंजस में भी रहे।

दक्षिण एशिया में श्रीलंका सबसे अलग

प्यू सर्वे में भारत और पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश और श्रीलंका को भी शामिल किया गया। चारों देशों की तुलना में श्रीलंका ऐसा देश रहा, जिसे बाकी तीनों देशों में सकारात्मक रेटिंग अधिक मिली।

भारत के प्रति श्रीलंका में सबसे ज्यादा सकारात्मक भावना दिखी। 79 प्रतिशत श्रीलंकाई लोगों ने भारत के बारे में अनुकूल राय जताई। बांग्लादेश में यह आंकड़ा 42 प्रतिशत रहा, जबकि पाकिस्तान में सिर्फ 7 प्रतिशत।

श्रीलंका में भारत को सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी मानने वालों की संख्या भी काफी ज्यादा रही। 63 प्रतिशत श्रीलंकाई लोगों ने भारत को अपना सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी बताया।

इसके विपरीत बांग्लादेश और पाकिस्तान में भारत को सबसे बड़े खतरे के रूप में देखने की प्रवृत्ति अधिक रही।

पीएम मोदी को लेकर भी दिखा बड़ा अंतर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी चारों देशों में राय अलग-अलग रही। सर्वे में 70 प्रतिशत श्रीलंकाई लोगों ने मोदी पर विश्व मामलों में सही कदम उठाने का भरोसा जताया। बांग्लादेश में यह आंकड़ा 42 प्रतिशत रहा, जबकि पाकिस्तान में सिर्फ 4 प्रतिशत।

पाक पर भारत सबसे ज्यादा नकारात्मक

पाकिस्तान की छवि भारत में दक्षिण एशिया के बाकी देशों की तुलना में सबसे ज्यादा नकारात्मक नजर आई। केवल 8 प्रतिशत भारतीयों ने पाकिस्तान के प्रति अनुकूल राय व्यक्त की।

इसके विपरीत पाकिस्तान को लेकर श्रीलंका और बांग्लादेश में सकारात्मक धारणा रही। 57 प्रतिशत श्रीलंकाई और 54 प्रतिशत बांग्लादेशी लोगों ने पाकिस्तान के प्रति सकारात्मक राय जताई।

बांग्लादेश को भी पाकिस्तान और श्रीलंका में काफी सकारात्मक नजरिए से देखा गया। 66 प्रतिशत पाकिस्तानियों और 56 प्रतिशत श्रीलंकाई लोगों ने बांग्लादेश के प्रति अनुकूल राय जताई। भारत में करीब एक-चौथाई लोगों ने बांग्लादेश को लेकर सकारात्मक राय जाहिर की।

रूस भारत का सबसे अहम सहयोगी

सर्वे में दोनों देशों के वैश्विक नजरिए में भी बड़ा अंतर सामने आया। भारत में 36 प्रतिशत लोगों ने रूस को देश का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी बताया, जबकि 16 प्रतिशत ने अमेरिका का नाम लिया।

रूस को लेकर भारत में सकारात्मक राय भी मजबूत रही। 58 प्रतिशत भारतीयों ने रूस के प्रति अनुकूल राय जताई और 51 प्रतिशत ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर भरोसा जताया।

पाकिस्तान में रूस को लेकर सकारात्मकता अपेक्षाकृत कम रही। वहां 39 प्रतिशत लोगों ने रूस के प्रति अनुकूल राय जाहिर की और 32 प्रतिशत ने पुतिन पर भरोसा जताया।

चीन पर भारत-पाक की सोच बिल्कुल अलग

चीन को लेकर दोनों देशों के लोगों की सोच में बड़ा अंतर देखने को मिला। 90 प्रतिशत पाकिस्तानियों ने चीन के प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि 83 प्रतिशत ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग पर भरोसा जताया।

करीब 75 प्रतिशत पाकिस्तानियों ने चीन को अपने देश का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी माना। इसके बाद सऊदी अरब 12 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

भारत में चीन और शी चिनफिंग को लेकर तस्वीर इसके बिल्कुल विपरीत रही। करीब एक-चौथाई भारतीयों ने ही चीन या शी के प्रति सकारात्मक राय जताई। भारतीय मुस्लिमों में चीन को लेकर हिंदुओं की तुलना में सकारात्मकता कुछ ज्यादा रही, लेकिन कुल मिलाकर दोनों के प्रति नकारात्मक राय ही हावी रही।

आठ दशक बाद भी नहीं टूटा अविश्वास 

प्यू रिसर्च सेंटर का यह सर्वे बताता है कि भारत-पाकिस्तान का विवाद केवल सरकारों, सेनाओं या सीमा तक सीमित नहीं है।

दोनों देशों के आम लोगों की सोच में भी दशकों के संघर्ष, विभाजन की विरासत और एक-दूसरे के खिलाफ बनी राष्ट्रीय धारणाओं का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।

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