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    जल संसाधन के प्रबंधन के लिए सेटेलाइट से होगी जलाशयों की निगरानी, केंद्र सरकार और इसरो के बीच हुआ समझौता

    Updated: Tue, 02 Jun 2026 04:00 AM (GMT+05:30)

    जल शक्ति मंत्रालय और इसरो ने जल संसाधन प्रबंधन में सेटेलाइट तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ...और पढ़ें

    जल संसाधन के प्रबंधन के लिए किया जाएगा सेटेलाइट का उपयोग (AI जनरेटेड तस्वीर)

    जल संसाधन के प्रबंधन के लिए किया जाएगा सेटेलाइट का उपयोग (AI जनरेटेड तस्वीर)

    HighLights

    1. जल शक्ति मंत्रालय-इसरो ने जल प्रबंधन हेतु सेटेलाइट उपयोग पर समझौता किया

    2. 2047 तक विकसित भारत के लिए जल सुरक्षा महत्वपूर्ण, 2 करोड़ संरचनाएं बनेंगी

    3. नया जल अनुसंधान मिशन शुरू, प्रति परियोजना ₹20 करोड़ की मदद

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में जल संसाधन के प्रबंधन में सेटेलाइट टेक्नोलाजी का उपयोग किया जाएगा। जल शक्ति मंत्रालय और इसरो ने जल संसाधन प्रबंधन में उपग्रह प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

    जल शक्ति मंत्रालय ने नए जल अनुसंधान मिशन की भी शुरुआत की। इसके तहत प्रति परियोजना 20 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी जाएगी। देशभर में दो करोड़ जल-संरक्षण संरचनाएं बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    डा. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित जल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) पर राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत जल संसाधन विभाग और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जलाशय निगरानी, नदी-प्रवाह विश्लेषण, उपग्रह-आधारित जल गुणवत्ता आकलन और जलाशयों में प्लास्टिक कचरे के बढ़ने पर अध्ययन सहित 24 अनुसंधान क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे।

    कार्यशाला में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जल सुरक्षा महत्वपूर्ण है। जल संबंधी चुनौतियों का समाधान प्रौद्योगिकी, नवाचार, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के माध्यम से किया जाना चाहिए।

    इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा इस साझेदारी से भूजल आकलन, जल संसाधन निगरानी और बाढ़ पूर्वानुमान जैसे क्षेत्रों में मदद मिलेगी।जल शक्ति मंत्री ने जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान के तीसरे चरण का भी शुभारंभ किया और जून 2026 से मई 2027 के बीच दो करोड़ जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य घोषित किया।

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    पाटिल ने कहा कि अभियान के पहले चरण ने 10 लाख जल संरक्षण संरचनाओं के लक्ष्य के मुकाबले 27.5 लाख संरचनाओं का निर्माण किया गया, जून 2025 में शुरू किए गए दूसरे चरण ने एक करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 1.5 करोड़ संरचनाओं का निर्माण किया गया।

    मंत्रालय ने जेएसजेबी-कैच द रेन पोर्टल भी लांच किया। कार्यशाला में जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) की संयुक्त पहल, मिशन फार एडवांसमेंट इन हाई इंपैक्ट एरियाज (एमएएचए)-वाटर प्रोग्राम का शुभारंभ भी हुआ और भारत वाटर इनोवेशन नेटवर्क (भारत विन) प्लेटफार्म के तहत स्टार्टअप और एमएसएमई को खुला आमंत्रण दिया गया।

    एमएएचए- वाटर प्रोग्राम के तहत विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स और उद्योग भागीदारों वाली कंसोर्टियम परियोजनाओं को सहायता दी जाएगी। योग्य परियोजनाओं को 20 करोड़ रुपये तक की धनराशि मिल सकती है।

    इस अवसर पर विज्ञान एवं प्राद्यौगिकी मंत्री राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, यदि हमें 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना है, तो यह तभी संभव है जब हम सब मिलकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लगभग नौ अरब अमेरिकी डालर तक बढ़ गई है। आने वाले वर्षों में इसमें पांच से छह गुना वृद्धि होने की उम्मीद है। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)