क्लीन एनर्जी, ब्लू इकोनॉमी से ग्रीन शिपिंग तक... भारत-नार्वे बने ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनर, कैसे होगा फायदा?
भारत और नॉर्वे ने स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन और समुद्री अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए हरित रणनीतिक साझेदारी स्थापित की है।

भारत-नॉर्वे ने हरित रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत और नार्वे ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को हरित रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया है। पीएम नरेन्द्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे के बीच सोमवार को हुई द्विपभीय बैठक में यह फैसला किया गया।
ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनर बने भारत-नॉर्वे
इसके पहले भारत ने वर्ष 2020 में डेनमार्क के साथ 'ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' स्थापित किये थे। इस साझेदारी का मतलब यह हुआ कि दोनों देश अब क्लीन एनर्जी, जलवायु बदलाव, समुद्री अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में ज्यादा व्यापक तौर पर सहयोग स्थापित करें।
पीएम मोदी ने बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि, 'स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप से क्लीन एनर्जी से लेकर क्लाइमेट रिजिल्यन्स, ब्लू इकोनॉमी से लेकर ग्रीन शिपिंग, हर क्षेत्र में भारत की स्केल, स्पीड और टैलेंट को नॉर्वे की टेक्नोलॉजी और कैपिटल के साथ जोड़कर हमारी कंपनियां वैश्विक समाधान विकसित करेंगी। आइए हम अपनी साझेदारी के माध्यम से, एक विश्वस्त, भविष्योन्मुखी व दीर्घकालिक साझेदारी का नया अध्याय लिखे।
क्या बोले पीएम मोदी?
'प्रधानमंत्री मोदी यूरोप के चार देशों की महत्वपूर्ण यात्रा के तीसरे चरण में आज नॉर्वे पहुंचे हैं। इससे पहले उन्होंने नीदरलैंड और स्वीडन का दौरा किया है। पीएम मोदी ने कहा कि, 'भारत और नॉर्वे, दोनों कानून सम्मत व्यवस्ता, वार्ता और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। हम एकमत हैं कि सैन्य संघर्ष से किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं निकल सकता।
यूक्रेन हो या पश्चिमी एशिया हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति के हर प्रयास का समर्थन करते हैं और समर्थन करते रहेंगे। हम इस बात पर भी एकमत हैं, कि बढ़ते हुए वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार अनिवार्य है और आतंकवाद के हर रूप को जड़ से समाप्त करना हमारी साझी प्रतिबद्धता है।'
भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन
पीएम मोदी मंगलवार, 19 मई को ओस्लो में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे। भारत-नॉर्डिक सम्मेलन दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। भारत इस सम्मेलन को अत्यंत रणनीतिक महत्व दे रहा है।
नॉर्डिक देश विश्व में हरित प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, समुद्री अर्थव्यवस्था, आर्टिक अध्ययन और सस्टेनेबल विकास के क्षेत्र में अग्रणी हैं। यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हो जाने के बाद भारत इन देशों से उन्नत तकनीकी हस्तांतरण, निवेश और हरित संक्रमण में गहरा सहयोग चाहता है।
किन-किन मुद्दों पर समझौता
यह सम्मेलन भारत को न केवल आर्थिक अवसर बल्कि जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और स्थायी विकास की वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मजबूत रणनीतिक साझेदार प्रदान करेगा। नार्डिक में पांच देश (नार्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड तथा आइसलैंड) हैं। यह तीसरा भारत-नार्डिक सम्मेलन होगा।
इसमें भारत में निवेश बढ़ाने, एआइ, 6जी, क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, रक्षा व सुरक्षा सहयोग, आर्कटिक शासन तथा स्पेस क्षेत्र में साझेदारी जैसे विषयों पर विमर्श होगा। भारत-नार्डिक सम्मेलन के साथ ही पीएम मोदी आइसलैंड, डेनमार्क और फिनलैंड के प्रधानमंत्रियों से अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातें करेंगे। इन बैठकों के बाद वे इटली के लिए रवाना हो जाएंगे।
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