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    अमीर-गरीब सभी देशों की हो AI तक पहुंच, एआई इंपैक्ट समिट के जरिए भारत ने बनाया नया लक्ष्य

    By RAJEEV KUMAREdited By: Garima Singh
    Updated: Mon, 16 Feb 2026 10:55 PM (IST)

    भारत ने 2023 के G20 में ग्लोबल साउथ के लिए आवाज उठाई थी, अब उसका नया लक्ष्य सभी देशों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का लाभ दिलाना है। नई दिल्ली में आ ...और पढ़ें

    एआई समिट के दौरान पीएम मोदी

    एआई समिट के दौरान पीएम मोदी

    HighLights

    1. भारत का लक्ष्य सभी देशों को AI का लाभ दिलाना

    2. नई दिल्ली में AI इंपैक्ट समिट 'सर्वजन हिताय' नारे के साथ

    3. भारत अपना लोकतांत्रिक और सुरक्षित AI मॉडल पेश करेगा

    राजीव कुमार, नई दिल्ली। वर्ष 2023 में नई दिल्ली में आयोजित जी-20 देशों के समिट में भारत ने ग्लोबल साउथ यानी कि दुनिया के गरीब एवं विकासशील देशों को बराबर की वित्तीय सुविधा के लिए आवाज उठाई थी।

    इस बार भारत दुनिया के अमीर-गरीब सभी देशों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का लाभ सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी उठाने जा रहा है।

    भारत का लक्ष्य सभी देशों को AI का लाभ दिलाना

    भारत की कोशिश है कि दुनिया में ऐसे लोकतांत्रिक एआई का निर्माण किया जाए जो सबके लिए फायदेमंद और सुरक्षित हो। तभी सोमवार से नई दिल्ली में शुरू होने वाले एआई इंपैक्ट समिट का मुख्य नारा सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय रखा गया है।

    भारत ने एआई संबंधी अपनी जो नीति बनाई है, उसका उद्देश्य भी एआई का इस्तेमाल सबकी भलाई के लिए करना है और इस लाभ से कोई वंचित नहीं रह जाए, इसका भी ध्यान रखना है।

    अगले चार दिनों तक नई दिल्ली में आयोजित दुनिया के सबसे बड़े एआई इंपैक्ट समिट के आयोजक इलेक्ट्ऱानिक्स एवं आईटी मंत्रालय के सचिव एस.कृष्णन ने बताया कि हम दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि एआई में जो कुछ भी हो, वह मानव के विकास के लिए हो और सबके लिए हो।

    AI इंपैक्ट समिट 'सर्वजन हिताय' नारे के साथ

    एआई संसाधन सबके इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो। भारत यह भी चाहता है कि भारत समेत सभी गरीब देशों के विकास के साथ दुनिया की अर्थव्यवस्था पर एआई का सकारात्मक प्रभाव पड़े। हालांकि अमेरिका, चीन जैसे देश अपना एआई माडल लांच कर चुके हैं और फिलहाल दुनिया उनके माडल का ही अनुसरण कर रही है।

    आईटी मंत्रालय का कहना है कि भारत दुनिया के लिए भरोसेमंद एआई लाना चाहता है और ऐसा ही माडल हम इस समिट में लांच करने जा रहे हैं। एआई जो जानकारी दे, उसके माध्यम का भी पता होना चाहिए। एआई को लेकर दुनिया अभी सीखने की प्रक्रिया में है।

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    ओपनएआई के सीईओ अल्टमैन के मुताबिक भारत में एआई के सफल नेतृत्व की क्षमता है क्योंकि भारत अब सिर्फ एआई की इस्तेमाल करने वाला देश ही नहीं बल्कि इस प्रणाली को विकसित करने वाला भी बन गया है।

    इस एआई समिट में भारत अपना एआई माडल का भी ऐलान करने वाला है और माडल शिक्षा, स्वास्थ्य, स्किलिंग पर्यावरण, नारी विकास, कृषि, उद्योग जैसे सेक्टर को मुख्य रूप ध्यान में रखकर बनाया गया है।

    भारत अपना लोकतांत्रिक और सुरक्षित AI मॉडल पेश करेगा

    भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने सोमवार को एआई से जुड़े एक कार्यक्रम में कहा कि एआई एक दोधारी तलवार की तरह है। सरकार का काम है कि एआई से जुड़े सकारात्मक अवसर वाली धार को तेज करे तो इससे होने वाले नुकसान की धार को कुंद कर दिया जाए।

    उन्होंने कहा कि हम अभी यह नहीं जानते हैं कि एआई का लंबे समय में क्या परिणाम होगा खासकर आने वाले समय में हमारे बच्चों का पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। अगले चार दिनों तक 100 से अधिक देशों की बड़ी कंपनियों से लेकर विभिन्न सेक्टर की सैकड़ों कंपनियां इस एआई समिट में भाग ले रही है।

    देश-विदेश के 2.5 लाख से अधिक लोग एआई समिट में आने के लिए अपना पंजीयन करा चुके हैं। ओपन एआई के सीईओ सैम अल्टमैन, मेटा के मुख्य एआई वैज्ञानिक यान लेकुन,माइक्रोसाफ्ट के प्रसिडेंट ब्रैड स्मिथ, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, माइक्रोसाफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स जैसे कई टेक दिग्गज इस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ चुके हैं या आने वाले हैं।

    वैश्विक स्तर पर यह चौथा एआई समिट है, इससे पहले दक्षिण कोरिया में यह समिट हुआ थाएआई का वैश्विक बाजार 288 अरब डालर का हैआठ अरब डालर का है भारतीय एआई का बाजारअमेरिका और चीन है एआई का सबसे बड़ा निवेशक-