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देश में सार्वजनिक बस सेवा में 70% की कमी, 400 से ज्यादा शहरों में सुविधा ही नहीं

Published: Wed, 12 Aug 2026 05:45 PM (IST)

देश में शहरी सार्वजनिक बस सेवाओं में 70% की भारी कमी है, जिससे 400 से अधिक शहरों में संगठित सेवा उपलब्ध नहीं है।

देश में सार्वजनिक बस सेवा में 70% की कमी। (फाइल)

देश में सार्वजनिक बस सेवा में 70% की कमी। (फाइल)

HighLights

  1. शहरी बस सेवाओं में देशव्यापी 70% की भारी कमी।

  2. 400 से अधिक शहरों में संगठित बस सेवा अनुपलब्ध।

  3. पुरानी बसें प्रदूषण बढ़ा रही, नई बेड़े की आवश्यकता।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश का शहरी बस क्षेत्र गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। पूरे देश के स्तर पर शहरी आबादी की जरूरतों की तुलना में सार्वजनिक बस सेवाओं में 70% भारी कमी है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट और सीआईटीआईईएस फोरम की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 400+ शहरों में संगठित सरकारी बस सेवा उपलब्ध नहीं है। 13.3 बसे हीं प्रति लाख आबादी उपलब्ध हैं, जबकि केंद्रीय मंत्रालय का तय मानक 44 से 66 बसों का है।

एक लाख आबादी वाले क्षेत्रों के लोग अनौपचारिक साधनों पर निर्भर

55% सक्रिय शहरी बसें केवल आबादी वाले पांच राज्यों, जिनमें मध्य प्रदेश, क्षेत्रों के लोग पूरी पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश तरह अनौपचारिक महाराष्ट्र और कर्नाटक तक सीमित हैं। वहीं एक लाख आबादी वाले क्षेत्रों के लोग पूरी तरह अनौपचारिक साधनों पर निर्भर हैं।

प्रदूषण भी बढ़ा रहीं पुरानी बसें

40 हजार बसें 15 साल की सीमा पार कर चुकी हैं, जो प्रदूषण फैला रही हैं और रखरखाव में महंगी साबित हो रही हैं। 5.8 लाख बसे 2026 से 2030 के बीच में सेवा अवधि पूरी कर रिटायर होंगी, जिससे नए बस बेड़े की जरूरत बढ़ेगी।

क्या होगी चुनौती?

18-36 महीने: ई-बसों के ग्रिड कनेक्शन में देरी, डिपो प्रभावित ।
65% लागत वसूलीः परिवहन उपक्रम वित्तीय संकट में।
6.8 कर्मचारी / बसः कुशल मानक 4.5 से ज्यादा, लागत बढ़ा रहा है।

 

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