आजादी के बाद से लगातार बढ़ा भारत का वोटिंग ट्रेंड, चुनाव आयोग ने जारी किए आंकड़े
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, आजादी के बाद से भारत में मतदान प्रतिशत और डाले गए मतों की संख्या ...और पढ़ें

आजादी के बाद से भारत में बढ़ा मतदान प्रतिशत
HighLights
चुनाव आयोग: आजादी के बाद से मतदान प्रतिशत में वृद्धि।
बंगाल, पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान, 90% से अधिक रहा।
भारत का मतदान प्रतिशत कई बड़े लोकतंत्रों से बेहतर।
आईएएनएस, नई दिल्ली। चुनाव आयोग की ओर से जारी चुनावी आंकड़ों से पता चलता है कि आजादी के बाद हुए पहले चुनावों से लेकर अब तक कई राज्यों में मतदान प्रतिशत और डाले गए मतों की संख्या में लंबे समय से लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
ये रुझान लोकतांत्रिक भागीदारी मजबूत होने और जनसंख्या वृद्धि, पलायन व जनसांख्यिकीय बदलावों से जुड़ी चुनौतियों को भी दिखाते हैं।
मतदान में गिरावट या ठहराव अक्सर पुरानी मतदाता सूचियों के कारण होता है जिनमें मृत मतदाताओं, स्थानांतरित निवासियों या डुप्लिकेट मतदाताओं के नाम होते हैं, जबकि नए पात्र नागरिकों के नाम छूट जाते हैं। यही कारण है कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) आवश्यक है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में 1951 के चुनाव में मतदान लगभग 40 प्रतिशत था, जो लगातार बढ़कर 2026 में रिकार्ड 93.70 प्रतिशत हो गया। इस दौरान कुल डाले गए मत भी 76.35 लाख से बढ़कर 6.40 करोड़ हो गए।
पुडुचेरी ने चुनाव प्रक्रिया में बाद में हिस्सा लेना शुरू किया था, वहां मतदान प्रतिशत 1964 में लगभग 65-70 से बढ़कर 2026 में 91.19 प्रतिशत हो गया, जबकि डाले गए मतों की संख्या 1.71 लाख से बढ़कर 8.66 लाख हो गई।
असम में 1951 में लगभग 50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जो 2026 में बढ़कर 86.33 प्रतिशत हो गए। कुल मत 23.48 लाख से बढ़कर 2.16 करोड़ हो गए।
बीच के दशकों में कुछ उतार-चढ़ाव और मामूली गिरावट के बावजूद तमिलनाडु में मतदान 1967 में लगभग 70 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 86.03 प्रतिशत हो गया। डाले गए मत 1.59 करोड़ से बढ़कर 4.93 करोड़ हो गए।
केरल में 1957 में लगभग 85-90 प्रतिशत मतदान के साथ शुरुआत हुई और यह बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले राज्यों में से एक बना रहा, हालांकि 2026 में यह 79.53 प्रतिशत पर आ गया। डाले गए मत 58.50 लाख से बढ़कर 2.16 करोड़ हो गए।
बिहार में मतदान 1951 में लगभग 50 प्रतिशत से शुरू हुआ और धीरे-धीरे बढ़कर 2026 में 67.25 प्रतिशत हो गया। मतदाताओं की संख्या 1.02 करोड़ से बढ़कर 5.02 करोड़ हो गई।
दुनिया के बड़े लोकतंत्रों के मुकाबले में अधिक रहा मतदान प्रतिशत
चुनाव आयोग की ओर से जारी एक तुलनात्मक चार्ट के अनुसार, भारत में हालिया विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत दुनिया के अधिकतर प्रमुख लोकतंत्रों से कहीं अधिक रहा है।
आंकड़ों से पता चलता है कि कई भारतीय राज्य वैश्विक स्तर पर सबसे ऊपर हैं, जो चुनावी प्रक्रिया में लोगों की मजबूत भागीदारी को दर्शाता है।
बंगाल में सबसे अधिक 93.70 प्रतिशत मतदान हुआ, इसके बाद पुडुचेरी में 91.19 प्रतिशत, असम में 86.33 प्रतिशत, तमिलनाडु में 86.03 प्रतिशत, केरल में 79.53 प्रतिशत और बिहार में 67.25 प्रतिशत मतदान हुआ।
चार्ट में भारतीय राज्यों की जिन देशों की तुलना की गई है उनमें शामिल हैं- स्विट्जरलैंड (45 प्रतिशत), जापान (54 प्रतिशत), आयरलैंड (57 प्रतिशत), ब्रिटेन (60 प्रतिशत), मैक्सिको (62 प्रतिशत), इटली (64 प्रतिशत), अमेरिका (66 प्रतिशत), भारत का राष्ट्रीय औसत (67 प्रतिशत), स्पेन (68 प्रतिशत), फ्रांस (70 प्रतिशत), अर्जेंटीना (70 प्रतिशत), कनाडा (68 प्रतिशत)।
इजरायल (71 प्रतिशत), पोलैंड (72 प्रतिशत), ताइवान (74 प्रतिशत), आस्ट्रिया (75 प्रतिशत), नीदरलैंड (77 प्रतिशत), ब्राजील (79 प्रतिशत), दक्षिण कोरिया (80 प्रतिशत), इंडोनेशिया (81 प्रतिशत), जर्मनी (82 प्रतिशत), स्वीडन (84 प्रतिशत), बेल्जियम (88 प्रतिशत), आस्ट्रेलिया (90 प्रतिशत) और सिंगापुर (93 प्रतिशत)।
अनिवार्य मतदान के बावजूद पीछे :- मैक्सिको (62 प्रतिशत), अर्जेंटीना (70 प्रतिशत), ब्राजील (79 प्रतिशत), बेल्जियम (88 प्रतिशत), आस्ट्रेलिया (90 प्रतिशत) और सिंगापुर (93 प्रतिशत) में मतदान अनिवार्य है।
लेकिन इसके बावजूद इन देशों में मतदान प्रतिशत सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले भारतीय राज्यों से कम ही रहा है।
