बेंगलुरु में गो-अराउंड के दौरान इंडिगो A321 के टेल में हुई टक्कर, दूसरी कोशिश में विमान की सुरक्षित लैंडिंग
बेंगलुरु में इंडिगो के एयरबस A321 विमान में 'गो-अराउंड' के दौरान टेल स्ट्राइक की घटना सामने आई, हालांकि दूसरी कोशिश में विमान सुरक्षित उतर गया।

बेंगलुरु में गो-अराउंड के दौरान इंडिगो A321 के टेल में हुई टक्कर। (फाइल)
HighLights
बेंगलुरु में इंडिगो A321 विमान के टेल में टक्कर हुई।
'गो-अराउंड' के दौरान हुई घटना, दूसरी बार में सुरक्षित लैंडिंग।
सभी यात्री और क्रू सुरक्षित, DGCA कर रहा है जांच।
डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। इंडिगो के एयरबस A321 के पिछले हिस्से में टक्कर की एक और घटना सामने आई है। रविवार को गुवाहाटी-बेंगलुरु उड़ान भरने वाले एक विमान के साथ अपनी मंजिल पर 'गो-अराउंड' के दौरान ऐसी ही घटना हुई।
उड़ान (6E 6542) ने मंजिल पर पहली बार लैंडिंग की कोशिश को बीच में ही रोक दिया। ऊपर उठते समय विमान के पिछले हिस्से में टक्कर हुई। दूसरी कोशिश में विमान सुरक्षित उतर गया। DGCA इस ताजा टेल स्ट्राइक की जांच कर रहा है।
इंडिगो के प्रवक्ता ने कहा कि 6E 6542 को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तेज हवाओं के बीच लैंडिंग करते समय 'रनवे से असामान्य संपर्क' का सामना करना पड़ा।
सभी यात्री और क्रू सुरक्षित- इंडिगो
सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं और सुरक्षित रूप से बाहर निकल आए हैं। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत सभी संबंधित अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है और विमान की मेंटेनेंस जांच की जा रही है। जरूरी मंजूरी मिलने के बाद यह फिर से उड़ान भरेगा। हमेशा की तरह, हमारे यात्रियों और क्रू की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
DGCA ने इंडिगो के सामने यह मुद्दा उठाया है और एयरलाइन ने बताया है कि इस खास मामले के लिए पायलट ट्रेनिंग पर ध्यान बढ़ाया गया है।
पहले लैंडिंग के समय होती थीं ऐसी घटनाएं
लगभग एक साल पहले, ऐसी घटनाएं ज्यादातर लैंडिंग के समय होती थीं। अब ये 'गो-अराउंड' के समय ज्यादा देखी जाती हैं। एयरबस का खुद कहना है कि जब जमीन के पास 'गो-अराउंड' करना पड़ता है, तो टेल स्ट्राइक (विमान के पिछले हिस्से का जमीन से टकराना) का जोखिम ज्यादा होता है।
यूके के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो का कहना है कि A321 में प्रति लैंडिंग टेल स्ट्राइक की घटनाएं A320 की तुलना में चार गुना ज्यादा होती हैं। शायद ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें सामान्य 'फ्लेयर एटीट्यूड' से मार्जिन कम होता है।
अगर लैंडिंग के दौरान या उसके बाद टेल स्ट्राइक का पता चल जाता है, तो विमान के ढांचे को होने वाले नुकसान से उड़ान के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं होना चाहिए।
