INS निपुण नौसेना के बेड़े में शामिल, समुद्र में कैसे भारत की रक्षा करेगा ये युद्धपोत?
मुंबई में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की उपस्थिति में अत्याधुनिक डीप-सी डाइविंग वेसल 'आईएनएस निपुण' को भारतीय नौसेना बेड़े में शामिल किया गया।

नौसेना बेड़े में शामिल INS निपुण
HighLights
आईएनएस निपुण भारतीय नौसेना बेड़े में शामिल हुआ।
गहरे समुद्र में गोताखोरी और बचाव क्षमताएं बढ़ीं।
स्वदेशी निर्मित, 'आत्मनिर्भर भारत' का प्रतीक है।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुंबई के क्षितिज पर सोमवार का सूर्य भारतीय नौसेना के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय लेकर आया। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन की उपस्थिति में अत्याधुनिक डीप-सी डाइविंग वेसल ‘आइएनएस निपुण’ को आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना बेड़े में शामिल कर लिया गया।
पिछले साल ‘आइएनएस निस्तार’ के शामिल होने के बाद, यह इस श्रेणी का दूसरा युद्धपोत है, जो समंदर में भारत की मारक क्षमताओं को नई बुलंदी देता है।
INS निपुण की क्या हैं खासियत?
यह गहरे समुद्र में गोताखोरी करने वाला युद्धपोत है जो मुश्किल आपरेशन में मदद करेगा। इससे पानी के नीचे सहायता पहुंचाने की क्षमता में अहम बढ़ोतरी हुई है, जो बहुत कम नौसेनाओं के पास है।
‘फॉर बिनीथ, फ्यू बियांड’ (अथाह गहराई में, कुछ ही हैं जो वहां तक पहुंच सकते हैं) के प्रेरणादायी ध्येय वाक्य के साथ समुद्र की रहस्यमयी और चुनौतीपूर्ण दुनिया में उतरने वाला यह पोत उन चुनिंदा नौसेनाओं की कतार में भारत को लाकर खड़ा करता है, जो जटिल पनडुब्बी बचाव और गहरे समुद्र में गोताखोरी का अनूठा हुनर रखती हैं।
11.4 मीटर लंबे और 10,500 टन क्षमता वाले इस पोत को विशाखापत्तनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित किया गया है। यह 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प की वह गूंज है, जो हर देशवासी के सीने को गर्व से चौड़ा कर देती है।
‘आइएनएस निपुण’ केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि समुद्र की छाती चीरकर आपदा में फंसे नौसैनिकों के लिए देवदूत बनने वाला एक चलता-फिरता सुरक्षा कवच है। यह पोत 300 मीटर की गहराई तक जाकर कठिन गोताखोरी अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।
आधुनिक रिमोटली आपरेटेड व्हीकल्स (आरओवी), सैचुरेशन डाइविंग सिस्टम और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस यह पोत न केवल हमारी अपनी पनडुब्बियों के लिए संकटमोचन है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में भारत को 'पसंदीदा पनडुब्बी बचाव साझीदार' के रूप में स्थापित करता है।
वर्तमान में जब पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक समुद्री मार्गों पर मंडराते खतरों के कारण भू-राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है, तब ऐसी रणनीतिक क्षमताएं देश के सुरक्षा चक्र को अभेद्य बनाती हैं।
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने स्पष्ट किया, 'आज का दौर अनिश्चितताओं और तेजी से बदलते खतरों का है, जहां हर चुनौती से निपटने के लिए हमारी तैयारी त्रुटिहीन होनी चाहिए।
‘आइएनएस निपुण’ का बेड़े में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि भारत केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करना ही नहीं जानता, बल्कि महासागरों के अनंत विस्तार में शांति और मानवता की रक्षा के लिए सदैव तत्पर है।'
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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