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वंदे मातरम् न गाना क्या दंडनीय अपराध है? याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Published: Tue, 22 Sep 2026 12:38 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के सभी छंदों को अनिवार्य करने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब। (फाइल फोटो।)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय गीत के छंद बढ़ाने से इनकार किया।

  2. वंदे मातरम न गाने को दंडनीय बनाने पर कोर्ट करेगा विचार।

  3. केंद्र सरकार से याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा गया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस बात पर विचार करने से इनकार कर दिया कि क्या राष्ट्रीय गीत को दो स्टैंजा तक सीमित रखा जाए या छह स्टैंजा तक बढ़ाया जाए, लेकिन कोर्ट इस बात पर विचार करने के लिए सहमत हो गया कि क्या इसे न गाने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने बिजो इमैनुएल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उस मामले में तय किया गया कानून कि राष्ट्रगान न गाने के लिए किसी को दंडित नहीं किया जा सकता अभी भी लागू है।

केंद्र से जवाब दाखिल करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पीआईएल पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। हालांकि, इस चरण में केंद्र को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया। बेंच ने कहा कि कानून के तहत दंड के प्रावधानों की समीक्षा संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों के संदर्भ में की जा सकती है।

किसने दायर की याचिका?

यह याचिका कर्नाटक संगीत गायक टी.एम. कृष्णा ने दायर की है। उन्होंने वंदे मातरम् के सभी छह छंदों को गाने को अनिवार्य बनाने वाले कानून को चुनौती दी है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, कृष्णा ने तर्क दिया है कि आखिरी चार स्टैंजा में स्पष्ट रूप से हिंदू देवी-देवताओं के प्रति भक्ति का भाव है और इन्हें गाना अनिवार्य बनाना देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप का उल्लंघन है।

याचिका में उस संशोधन को भी चुनौती दी गई है जिसके तहत वंदे मातरम् को राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम के दायरे में लाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह मनमाना है, व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है और बहुसंख्यक धार्मिक संदेश को बढ़ावा देता है। जनहित याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय गीत को दो से बढ़ाकर छह स्टैंजा तक करने और इसे न गाने पर दंड का प्रावधान करने पर भी सवाल उठाए हैं।

सॉलिसिटर जनरल ने क्या कहा?

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस चुनौती का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जो लोग संविधान और कानून के शासन में विश्वास नहीं रखते और जिनकी सोच नक्सलवादी है, उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय गीत की भूमिका को भूलकर उस पर सवाल नहीं उठाने चाहिए।

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