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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिया था पाक का साथ, क्या अजरबैजान थामेगा भारत का हाथ?

By Jaiprakash RanjanEdited By: Abhishek Pratap Singh
Published: Wed, 02 Sep 2026 04:02 PM (IST)

एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति अलीयेव की मुलाकात ने दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने का संकेत दिया है।

पीएम नरेन्द्र मोदी की अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात।

पीएम नरेन्द्र मोदी की अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय पीएम नरेन्द्र मोदी की अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ हुई मुलाकात ने दोनों देशों के संबंधों में लगातार बढ़ रहे तनाव को खत्म करने का संकेत दिया है।

संकेत है कि आपस में कोई रंजिश नहीं होने के बावजूद आपसी संबंधों में लगातार आ रही कटुता को दोनों देशों ने खत्म करने पर बात की है। राष्ट्रपति अलीयेव के साथ मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर इस बारे में लिखा और मुलाकात की फोटो भी लगाई। इसके जवाब में राष्ट्रपति अलीयेव के सोशल मीडिया हैंडल के जरिए एक पोस्ट किया गया, जिसमें यह जानकारी दी गई कि उनकी पीएम मोदी से द्विपक्षीय एजेंडे पर बात हुई है।

दोनों देशों के बीच सीधी दुश्मनी नहीं

भारत और अजरेबैजान के बीच द्विपक्षीय संबंधों की समस्या यह है कि इनके बीच किसी बात पर सीधी दुश्मनी नहीं है लेकिन दोनों देश एक दूसरे के दुश्मनों के दोस्त हैं। अजरेबैजान पाकिस्तान का समर्थन करता है जबकि भारत की दोस्ती अर्मेनिया के साथ हाल के वर्षों में लगातार बेहतर हो रही है।

पिछले हफ्ते एससीओ बैठक के दौरान भी अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान के साथ मुलाकात हुई थी। भारत को यह बात बहुत ही नागवार गुजरी थी कि अजरबैजान ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का खुला समर्थन किया था।

अजरबैजान ने भारत की तरफ से पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर किये गये हमले की निंदा की थी। इसके पहले जब अजरेबैजान व अर्मेनिया में नागार्नो-काराबाख सीमा पर युद्ध हुआ था तो पाकिस्तान ने तुर्की के साथ मिल कर अजरेबैजान की मदद की थी।

एससीओ में भारत ने दिया था अजरबैजान को झटका

पाकिस्तान व तुर्की अजरबैजान के साथ मिल कर मध्य एशिया में इस्लामिक देशों की शक्ति प्रदर्शित करने की भी मंशा रखते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने भी कड़ा रूख अख्तियार करते हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में अजरबैजान की पूर्ण सदस्यता के प्रस्ताव को समर्थन करने से मना कर दिया था।

अजरबैजान अभी तक इस संगठन का सदस्य नहीं बन पाया है। यह एक बड़ी वजह है कि राष्ट्रपति अलीयेव के रुख में बदलाव आया है। उनकी सरकार ने पिछले साल ही भारत के साथ संबंधों को आपसी हितों के आधार पर देखने का अनुरोध किया था।

इस साल के शुरुआत में चार वर्षों बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों की एक बैठक हुई है। इसके बाद मार्च-अप्रैल, 2026 में अमेरिका के हमले के बाद ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को जमीनी मार्ग से निकालने के लिए अजरेबैजान ने मदद की थी।

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