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'आतंकवाद के जनक को ही अपनी हरकतें सुधारनी होंगी', UN में जयशंकर ने पाकिस्तान को लताड़ा

Published: Sat, 26 Sep 2026 11:35 PM (IST)Updated: Sun, 27 Sep 2026 02:07 AM (IST)

जयशंकर ने कहा कि कि आतंकवाद शांति के लिए एक लगातार खतरा बना हुआ है। यह खतरा राज्य-प्रायोजित हो सकता ...और पढ़ें

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में अपने तीखे भाषण में पाकिस्तान का पर्दाफाश किया

जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में अपने तीखे भाषण में पाकिस्तान का पर्दाफाश किया

HighLights

  1. जयशंकर ने कहा कि कि आतंकवाद शांति के लिए एक लगातार खतरा बना हुआ है

  2. एस जयशंकर बोले कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना बिल्कुल भी मंजूर नहीं

डिजिटल डेस्क, संयुक्त राष्ट्र। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हम इस महासभा में तब इकट्ठा हुए हैं जब संयुक्त राष्ट्र अपने अस्तित्व के नौवें दशक में प्रवेश कर रहा है। इसकी स्थापना अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने और इस दिशा में सामूहिक कदम उठाने के लिए की गई थी।

आगे कहा कि सदस्य देशों ने दोस्ताना संबंध विकसित करने और वैश्विक शांति को मजबूत करने का संकल्प लिया था। फिर भी, आज जब हम यहां मिल रहे हैं, संघर्ष और टकराव ही हमारी मुख्य चिंता बने हुए हैं।

उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने में विफलता न केवल सुरक्षा को कमजोर कर रही है, बल्कि प्रगति के लिए खतरा पैदा कर रही है और विकास की गति को भी धीमा कर रही है। आज की वैश्वीकृत दुनिया में, युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।

आतंकवाद शांति के लिए एक लगातार खतरा

जयशंकर ने कहा कि कि आतंकवाद शांति के लिए एक लगातार खतरा बना हुआ है। यह खतरा राज्य-प्रायोजित हो सकता है और इसका मकसद सीमा-पार की गतिविधियों को अंजाम देना हो सकता है, जो इसे वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बनाता है।

उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों में शामिल सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आतंकवाद के प्रति हमारी 'जीरो-टॉलरेंस' (सख्त) नीति में कोई ढील नहीं होनी चाहिए। खासकर इसके वित्तीय पहलुओं को उजागर किया जाना चाहिए और उनसे निपटा जाना चाहिए।

एस जयशंकर ने पाकिस्तान पर जमकर हमला बोला

एस जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का लगातार अभ्यास करने वाला देश है और उन्होंने कल दिए गए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने "तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया"।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि संघर्षों से दूर रहने वाले देशों को बिना किसी गलती के सज़ा भुगतनी पड़ रही है। जिन पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है, अक्सर उनकी बात सबसे कम सुनी जाती है। इस सभा को हालात की असलियत का सामना करना होगा।

उन्होंने कहा कि इस साल हम खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष देख रहे हैं, जो पहले से ही मुश्किल हालात को और बिगाड़ रहा है। हम लगातार जारी तनाव को लेकर बहुत चिंतित हैं।

 

कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना बिल्कुल भी मंजूर नहीं- जयशंकर

जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुज़रने वाले कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाना बिल्कुल भी मंजूर नहीं है। भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा व व्यापार का निर्बाध प्रवाह बनाए रखने की अपील करता है

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन में चल रहा संघर्ष, जो अब अपने पांचवें साल में है, उतनी ही चिंता की बात है। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है, अंतहीन युद्ध की जगह अब युद्ध को खत्म करने की कोशिश होनी चाहिए। भारत शांति लाने के लिए चल रही पहलों का समर्थन करता है। साथ ही, समुद्री यात्रियों की सुरक्षा और भोजन, अनाज व ऊर्जा की आपूर्ति पर ध्यान देने की भी तत्काल आवश्यकता है।

जयशंकर ने कहा कि भारत इस स्थिति को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार है, खासकर खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के मामले में। दुर्भाग्य से, पश्चिम एशिया या मध्य पूर्व में तनाव और हिंसा भी जारी है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि स्थायी शांति के लिए 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' (दो-राष्ट्र समाधान) की आवश्यकता है।

विदेश मंत्री बोले इस बीच, भारत फलस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत कार्यों में योगदान दे रहा है। हमें यह समझना चाहिए कि शांति का अर्थ केवल युद्ध का न होना नहीं है। यदि दुनिया लगातार खतरों और दबावों का सामना कर रही है, तो हम वास्तव में एक गहरी खाई के किनारे पर जी रहे हैं।

आगे कहा कि हमें उस खाई में धकेलने के लिए बस एक और कदम की जरूरत है। इसलिए, स्थिरता, सुरक्षा और पूर्वानुमान-योग्यता को मजबूत करना अनिवार्य है। ये शांति के लिए अनुकूल माहौल बनाने वाले महत्वपूर्ण तत्व हैं..."