'जब हमारी क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी, तब रूस हमारे साथ खड़ा रहा', म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में बोले जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच 1950 के दशक से ही मजबूत संबंध रहे हैं और उन ...और पढ़ें

भारत और रूस के संबंध ऐतिहासिक रूप से बहुत अच्छे।
HighLights
भारत में अगले 5-10 सालों में ग्लोबल पावर बनने की क्षमता।
तेज विकास, अनुकूल डेमोग्राफिक प्रोफाइल और नए आर्थिक अवसर सहायक।
'मिडिल पावर' देशों का भविष्य अलग-अलग दिशाओं में जाएगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को रूस के साथ भारत के पुराने रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि जब दिल्ली की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता पर खतरा मंडरा रहा था और दुनिया का एक बड़ा हिस्सा सैन्य शासन का समर्थन कर रहा था, तब रूस हमारे साथ खड़ा था।
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच 1950 के दशक से ही मजबूत संबंध रहे हैं और उन रिश्तों की विरासत आज भी हमारे संबंधों को आकार दे रही है।
भारत और रूस के संबंध ऐतिहासिक रूप से बहुत अच्छे- जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के संबंध ऐतिहासिक रूप से बहुत अच्छे रहे हैं, खासकर 1950 के दशक से। उस इतिहास को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि रूस, जो पहले सोवियत संघ था, कई मौकों पर हमारे साथ खड़ा रहा, जब हमारी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा हमारे पड़ोसी देश में सैन्य शासन (पाकिस्तान) का समर्थन कर रहा था, रूस एक ऐसा देश था जिसके साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे थे, और उस विरासत ने कई तरह से हमारे संबंधों को आकार दिया है।
ग्लोबल ऑर्डर पर विदेश मंत्री जयशंकर का जवाब
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत में अगले पांच से दस सालों में ग्लोबल पावर की रैंकिंग में तेजी ऊपर उठने की क्षमता है। उन्होंने इसके लिए आने वाले दशकों में तेज विकास, मददगार डेमोग्राफिक प्रोफाइल और नए आर्थिक मौकों के उभरने का जिक्र किया।
रविवार को दिल्ली में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में जयशंकर के पूछा गया कि अगले पांच से दस सालों में ग्लोबल ऑर्डर में भारत की स्थिति क्या होगी। उन्होंने कहा कि जिन देशों को अभी मिडिल पावर माना जाता है, जरूरी नहीं कि वे सभी एक ही रास्ते पर चलें। कुछ शक्तियां ज्यादा मिडिल और कुछ अपर मिडिल हैं।
भारत के बारे में बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि देश के सामने तेज विकास के कई दशक हैं और तर्क दिया कि इसकी डोमोग्राफिक प्रोफाइल उस विकास को बनाए रखने में मदद कर सकती है।
ग्लोबल इकनॉमी में नई संभावनाएं उभर रही- जयशंकर
जयशंकर ने यह भी तर्क दिया कि भारत को शायद पहले की अर्थव्यवस्थाओं द्वारा अपनाए गए पारंपरिक औद्योगीकरण के रास्ते पर चलने की जरूरत न पड़े, क्योंकि तेजी से बदलती ग्लोबल इकनॉमी में नई संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने कहा कि मैं तो यही कहूंगा कि दुनिया अब कहीं ज्यादा क्रिएटिव है, जहां कई-कई संभावनाएं हैं, इसलिए हमें जरूरी नहीं कि औद्योगीकरण के पुराने रास्ते पर ही चलना पड़े।
मिडिल पावर्स के बीच भारत की जगह
जयशंकर ने कहा कि ग्लोबल पावर की रैंकिंग में बदलाव एक जैसा नहीं होगा, जो देश अभी 'मिडिल पावर' के तौर पर एक साथ गिने जाते हैं, वे भविष्य में अलग-अलग दिशाओं में जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मिडिल पावर्स में से कुछ आगे निकल जाएंगे, कुछ वहीं बने रहेंगे, और कुछ शायद थोड़ा पीछे छूट जाएंगे। यही सच्चाई है। यह ग्लोबल ऑर्डर में बदलाव का हिस्सा होगा।
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