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    'मेरे खिलाफ महाभियोग क्यों?' संसदीय समिति के सामने बोले जस्टिस यशवंत वर्मा

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 11:55 PM (IST)

    जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने आधिकारिक आवास से कथित बेहिसाब नकदी बरामदगी मामले में संसदीय समिति के समक्ष अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। उन्होंने बताया ...और पढ़ें

    जस्टिस वर्मा ने नकदी बरामदगी में संलिप्तता से किया इनकार।

    जस्टिस वर्मा ने नकदी बरामदगी में संलिप्तता से किया इनकार।

    HighLights

    1. जस्टिस वर्मा ने नकदी बरामदगी में संलिप्तता से किया इनकार।

    2. आग लगने के समय आवास पर नहीं थे, कोई नकदी नहीं मिली।

    3. अधिकारियों पर प्रक्रिया उल्लंघन का आरोप, महाभियोग पर सवाल।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने आधिकारिक आवास से कथित तौर पर बरामद बेहिसाब नकदी की जांच कर रही संसदीय समिति के समक्ष अपना जवाब दाखिल कर इस घटना में किसी भी तरह की संलिप्तता से स्पष्ट रूप से इनकार किया है।

    सूत्रों के अनुसार, उन्होंने समिति को बताया कि आग लगने के समय वह आवास पर मौजूद नहीं थे और परिसर से कोई नकदी बरामद नहीं हुई।

    समिति के समक्ष अपने जवाब में जस्टिस वर्मा ने सवाल उठाया कि उन पर महाभियोग क्यों चलाया जाना चाहिए, जबकि उनके अनुसार घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों - जिनमें पुलिस, अग्निशमन कर्मी और सुरक्षा बल शामिल थे - ने मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया।

    जस्टिस वर्मा ने क्या कहा?

    जस्टिस वर्मा ने यह दावा किया कि नकदी की कोई बरामदगी नहीं हुई और तर्क दिया कि अधिकारियों द्वारा घटनास्थल की सुरक्षा और जांच में हुई चूक का आरोप उन पर अनुचित रूप से लगाया जा रहा है, जबकि संसदीय जांच और न्यायिक कार्यवाही जारी है।

    अपने रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि कथित घटना में उनकी 'बिल्कुल कोई भूमिका नहीं' थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाले व्यक्ति नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग पहले पहुंचे थे, वे घटनास्थल को ठीक से सुरक्षित करने में विफल रहे।

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    याचिका पर फैसला सुरक्षित

    गौरतलब है कि पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत गठित संसदीय समिति की वैधता को चुनौती देने वाली जस्टिस वर्मा की रिट याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    इस याचिका में संसद के दोनों सदनों में समानांतर महाभियोग प्रस्तावों और राज्यसभा के उपसभापति द्वारा प्रयोग किए जाने वाले अधिकार से संबंधित संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं।

    (न्यूज एजेंसी ANI के इनपुट के साथ)