कर्नाटक SIR की ड्राफ्ट लिस्ट से 1 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम कटे, फाइनल लिस्ट में कैसे जुड़वाएं नाम?
कर्नाटक की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी गई है, जिसमें 1.07 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे राज्य में कुल वोटरों की संख्या 4.46 करोड़ हो गई है।

कर्नाटक SIR से एक करोड़ लोगों के नाम हटे (फाइल फोटो)
HighLights
कर्नाटक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 1.07 करोड़ नाम हटाए गए।
राज्य में अब कुल 4.46 करोड़ मतदाता शेष बचे हैं।
हटाए गए नामों में अनुपस्थित, डुप्लिकेट और मृत मतदाता शामिल।
डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। कर्नाटक की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सोमवार, 24 अगस्त को जारी कर दी गई। इस लिस्ट के मुताबिक वोटर लिस्ट से 1.07 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं, जिससे राज्य में वोटरों की संख्या घटकर 4.46 करोड़ रह गई है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए ज्यादातर नामों को लेकर बताया गया है कि ये लोग या तो अनुपस्थित मिले या वे दूसरी जगह चले गए। इसके साथ ही कुछ लोगों को डुप्लिकेट, मृत और अन्य' (ASDDO) कैटेगरी में रखा गया।
कर्नाटक में महिला वोटरों की संख्या ज्यादा
कर्नाटक की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के आंकड़ों के बारे में बताते हुए राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) वी. अंबु कुमार ने कहा कि वोटरों में 2.22 करोड़ पुरुष, 2.24 करोड़ महिलाएं और 2,871 अन्य शामिल हैं।
मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया वोटर CEO की आधिकारिक वेबसाइट https://voters.eci.gov.in/download-eroll?stateCode=S10 पर अपना नाम चेक कर सकते हैं।
नाम कटने के बाद भी जुड़ सकते हैं नाम?
मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अंबु कुमार ने कहा कि जिन इलाकों में ASDDO की संख्या ज्यादा है, वहां एक खास अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में वोटरों को 'फॉर्म 6' (नाम जुड़वाने के लिए) भरने में मदद की जाएगी। अभियान की तारीखों का एलान CEO ऑफिस की तरफ से अभी नहीं किया गया है।
चुनाव अधिकारी ने बताया, 43.81 लाख लोगों को नोटिस भेजे जाएंगे। ये नोटिस उन लोगों को भेजे जाएंगे, जिनके फॉर्म में लॉजिकल गड़बड़ियां थीं या जिनकी मैपिंग नहीं हो पाई। चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) को शक होता है कि कोई वोटर अयोग्य है, तो भी नोटिस जारी किया जा सकता है।
गिनती का काम पूरा होने के बाद, वोटरों को वही समस्याएं हो सकती हैं जो ASDDO लिस्ट के समय हुई थीं। जैसे गिनती का काम खत्म होने से 12 दिन पहले तक लोगों को पता नहीं था कि उनके नाम ASDDO लिस्ट में हैं, वैसे ही अब उन्हें यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि उन्हें नोटिस मिलेगा या नहीं, जब तक कि नोटिस असल में भेजा न जाए।ॉ
सुनवाई के दौरान वोटर का उपस्थित होना जरूरी
CEO ने कहा, हमारे पास सिर्फ यह आंकड़ा है कि कितने लोगों को नोटिस मिलेगा, और नोटिस बनने तक नाम पता नहीं चलेंगे।' हालांकि, पूरी प्रक्रिया ERO द्वारा नोटिस बनाने से लेकर उसे भेजने तक सिर्फ सात दिनों में पूरी होनी है।
वोटरों के लिए यह एक बड़ी बाधा बन सकती है, खासकर उन वोटरों के लिए जो दूसरे जिले या शहर में रहते हैं, लेकिन अपने मूल निर्वाचन क्षेत्र में रजिस्टर्ड हैं, क्योंकि वोटर को सुनवाई में खुद शामिल होना होगा। देखा जाए तो इस प्रक्रिया में अब अपना वोट बचाने की पूरी जिम्मेदारी वोटर पर डाल दी गई है।
गिनती के चरण के उलट, जब बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को वोटर्स को गिनती वाले फॉर्म देने का निर्देश दिया गया था और 18 साल से ज्यादा उम्र का परिवार का कोई सदस्य वोटर की तरफ से उन्हें भर सकता था, इस चरण में BLOs उस पते पर मौजूद किसी भी व्यक्ति को नोटिस दे सकते हैं।
नोटिस में 11 डॉक्यूमेंट्स में से कोई एक ऑनलाइन जमा करने के लिए QR कोड भी होगा, लेकिन सुनवाई के लिए सिर्फ वोटर को ही आना होगा।
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