केरलम की जीत भी नहीं दूर कर पायी विपक्षी खेमे की मायूसी, किस पर फोड़ा हार का ठीकरा?
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों में केरलम में कांग्रेस की जीत के बावजूद विपक्षी खेमे में मायूसी छाई है।

केरलम की जीत भी नहीं दूर कर पायी विपक्षी खेमे की मायूसी। (फाइल)

समय कम है?
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अरविंद पांडेय, नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों में भले ही केरलम में कांग्रेस गठबंधन को जीत मिली है लेकिन इसके बाद भी बंगाल, तमिलनाडु, असम व पुडुचेरी में विपक्षी खेमे को जिस तरह से हार का सामना करना पड़ा है, उससे विपक्षी खेमे में भारी मायूसी दिखी।
यह बात अलग है कि इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने कुछ खोया नहीं बल्कि पाया ही है केरलम में उसकी जीत के बड़े मायने है, वह भी तब जब बंगाल व तमिलनाडु में विपक्षी दल ढेर हो गए। ऐसे में कांग्रेस की जीत विपक्षी खेमे में उसकी बढ़त बनाए हुए है। यही वजह है कि हार पर अक्सर कड़ी प्रतिक्रिया देने वाली कांग्रेस नतीजों के बाद बेहद सधी प्रतिक्रिया दे रही है।
राहुल ने केरलम की जनता को कहा धन्यवाद
पांच राज्यों के चुनाव नतीजों के के बाद कांग्रेस नेता व लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जहां केरलम की जीत पर राज्य के लोगों का धन्यवाद जताया है, वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि केरलम को छोड़ दें तो अन्य जो नतीजे आए है, वो हमारी उम्मीदों के अनुरूप नहीं है। लेकिन हम न निराश है न हताश। विचारधारा के लड़ाई हम लड़ रहे है। जल्द ही हम नतीजों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
असम में कमजोर संगठन और गुटबाजी से हारी कांग्रेस
वहीं असम में भी कांग्रेस पार्टी जीत की उम्मीद लगाए हुए थे, हालांकि नतीजों के बाद पार्टी नेताओं का कहना था कि वह परिसीमन के साथ राज्य में पार्टी का कमजोर संगठन व पार्टी नेताओं के बीच आपसी गुटबाजी पार्टी की हार का बड़ा कारण है। वहीं बंगाल व तमिलनाडु में कांग्रेस कहीं लड़ाई में नहीं थी। ऐसे में वहां की जीत-हार का उस पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
टीएमसी की हार के विपक्षी एकता को झटका
वैसे भी बंगाल में टीएमसी और कांग्रेस ने अलग-अलग ही चुनाव लड़ा था। केरलम में सीपीआइ(एम) को हार को भले ही कांग्रेस जीत के रूप में देख रही है लेकिन इसने विपक्षी एकता को ही कमजोर किया है। इन चुनावी नतीजों पर अभी भले ही विपक्ष खेमें में मायूसी है, लेकिन जल्द ही विपक्षी दलों के बीच इस करारी हार को लेकर घमासान देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह घमासान राष्ट्रीय स्तर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को लेकर दिखेगा, वहीं पार्टी के भीतर अंदरूनी खींचतान भी दिखेगा। खासकर तमिलनाडु में डीएमके भीतर स्टालिन के वर्चस्व को लेकर परिवार के भीतर यह खींचतान दिख सकता है।
वहीं टीएमसी के भीतर भी आपसी टकराव तेज हो सकता है। ममता बनर्जी भी राज्य में हार के बाद केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हो सकती है। इसका असर केंद्र की राजनीति में देखने को मिल सकता है।
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