CEC का इस्तीफा, बैलेट से चुनाव और SIR... खरगे ने सरकार के सामने रखी 3 मांगें
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, एसआईआर ...और पढ़ें
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे(फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को चुनाव प्रणाली और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। खरगे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की तीन ऐसी मांगें हैं, जिन पर कोई समझौता नहीं हो सकता।
इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर प्रक्रिया को रद करना और ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराना शामिल है।
'तीन प्रमुख मांगें जिन पर समझौता संभव नहीं'
मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी की तीन प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। मतदाता सूची से जुड़ी एसआईआर प्रक्रिया को निरस्त किया जाए। आगामी सभी चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाएं।
खरगे ने कहा कि इन तीन मुद्दों को लेकर देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और विपक्षी इंडी गठबंधन के दल सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
नागरिक समाज के साथ खड़ी है कांग्रेस: खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी उन सभी सिविल सोसायटी सदस्यों और युवा संगठनों के साथ मजबूती से खड़ी है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में इन मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
इसके साथ ही खरगे ने दिल्ली में महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा और इसे बेहद निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि तानाशाह पूरी तरह घबराया हुआ है, अब ध्यान भटकाने की नई चालों के लिए तैयार रहिए।
चुनाव आयुक्तों की असहमति पर बवाल
कांग्रेस का हमला इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ है, रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों का कहना था कि ये आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे।
दो आयुक्तों द्वारा असहमति दर्ज कराए जाने की खबरों के बाद चौतरफा घिरे चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में अलग-अलग विचार और आपत्तियां आंतरिक चर्चा का हिस्सा होती हैं।
आयोग ने आगे कहा कि उसके सभी आदेश पूरी तरह कानूनी हैं और तय वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करके ही जारी किए जाते हैं।
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