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बेटे की शहादत के 22 साल बाद भी नहीं दिया गया प्लॉट, 80 साल की बुजुर्ग बोलीं- शौर्य चक्र वापस ले लो

Published: Wed, 09 Sep 2026 02:43 PM (IST)

मणिपुर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए बलिदान हुए असिस्टेंट कमांडेंट विवेक सक्सेना की 80 वर्षीय मां ने दो दशकों ...और पढ़ें

HighLights

  1. 80 वर्षीय मां ने 'शौर्य चक्र' वापस लेने की मांग की।

  2. बलिदानी बेटे के लिए 22 साल से वादे पूरे नहीं हुए।

  3. राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लखनऊ की रहने वाली 80 वर्षीय की सावित्री सक्सेना ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि या तो उनके बलिदान हुए बेटे को लेकर किए गए वादों को पूरा किया जाए, या फिर मरणोपरांत मिला 'शौर्य चक्र' और अन्य सम्मान वापस ले लिए जाएं।

पूरे मामले को ऐसे समझिए कि सावित्री सक्सेना के छोटे बेटे, असिस्टेंट कमांडेंट विवेक सक्सेना 8 जनवरी 2003 को मणिपुर में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए बलिदान हो गए थे। उनकी इस बहादुरी के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार 'शौर्य चक्र' और 'राष्ट्रपति पुलिस पदक' से सम्मानित किया गया था।

22 साल बीत गया, नहीं पूरा हुआ एक भी वादा

बता दें कि विवेक सक्सेना के बलिदानी होने का बाद सरकार की तरफ से परिवार को जमीन और एक स्मारक बनवाने जैसी कई सहायता देने का वादा किया गया था। लेकिन 22 साल बीत जाने के बाद भी परिवार दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुका है, और वादे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं।

ऐसे में परिवार का आरोप है कि उन्हें बार-बार यह साबित करने के लिए कहा गया कि वे उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं या नहीं। जबकि वे सालों से लखनऊ में ही रहे, यहीं पढ़ाई की, और शहीद बेटे की याद से जुड़ी चीजें भी यहीं एयरफोर्स स्टेशन पर मौजूद हैं।

अधिकारी पूछ रहे अजीबोगरीब सवाल

हद तो तब हो गई जब अधिकारियों ने यह तक पूछ लिया कि शादी से पहले मां कहां रहती थीं। परिवार का सवाल है कि जिस पते पर सरकार ने सालों पहले खुद 75000 रुपये का चेक भेजा था, उसी पते पर आज उनकी नागरिकता पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं?

आर्थिक सम्मान मिलने में भी लग गए 21 साल

इतना ही नहीं गौर करने वाली बात यह भी है कि शौर्य चक्र के साथ मिलने वाली मौद्रिक सहायता परिवार को साल 2024 में जाकर मिली। यानी बेटे की शहादत के पूरे 21 साल बाद। फाइलें अलग-अलग विभागों के चक्कर काटती रहीं और अधिकारी बार-बार वेरिफिकेशन के नाम पर लटकाते रहे।

सरकारी दफ्तरों का कटना पड़ रहा चक्कर

बलिदानी असिस्टेंट कमांडेंट विवेक सक्सेना की मां बतातीं हैं कि उनकी उम्र 80 वर्ष हो चुकी है। इस उम्र में सरकारी दफ्तरों के धक्के खाना उनके लिए शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कष्टदायक हो गया है। उनका कहना है कि अब उनमें और भागदौड़ करने की ताकत नहीं बची है।

अब आगे क्या चाहती हैं मां, क्या है मांगे?

पिछले 22 साल से अपनी मांग को लेकर दफ्तरों के चक्कर काट रही 80 वर्षीय सावित्री सक्सेना ने थक-हारकर अब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने का समय मांगा है। उन्होंने साफ कह दिया है कि यदि सरकार उनके शहीद बेटे के सम्मान में किए गए वादों को पूरा नहीं कर सकती, तो वे उनके मेडल, शौर्य चक्र और बाकी सम्मान वापस ले ले।