रेलवे से हाईवे तक... मोदी कैबिनेट ने लगाई 5 फैसलों पर मुहर, बिहार समेत इन राज्यों को तोहफा
केंद्रीय कैबिनेट ने देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पांच महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव।
HighLights
केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का बड़ा कदम उठाया।
कैबिनेट ने रेलवे और हाईवे के 5 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी।
इन परियोजनाओं की कुल लागत 13041 करोड़ रुपये है।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रेल नेटवर्क को बढ़ाने और ट्रेनों से आवाजाही सुगम बनाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। 9,450 करोड़ रुपये की इन परियोजनाओं से बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में करीब 410 किलोमीटर नई रेल लाइनें जुड़ेंगी।
इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है। बंगाल, ओडिशा एवं झारखंड से जुड़े रेल यातायात को इन परियोजनाओं से बड़ा लाभ मिलेगा। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद बुधवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नई पटरियां सिर्फ ट्रेनों की संख्या बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि पूर्वी भारत में यात्री एवं माल यातायात को तेज व व्यवस्थित बनाने में भी सहायक होंगी।
सबसे महत्वपूर्ण परियोजना बंगाल के खड़गपुर से ओडिशा के भद्रक (रानीताल) के बीच 173 किलोमीटर की चौथी लाइन की है। इस पर 3,352 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह मार्ग बालेश्वर और रूपसा होते हुए भद्रक तक जाता है और ओडिशा के तटीय क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
अतिरिक्त लाइन बनने से मौजूदा ट्रैक पर ट्रेनों का दबाव घटेगा और यात्री ट्रेनों व मालगाड़ियों को अलग-अलग लाइन पर चलाने की सुविधा बढ़ेगी। परियोजना में दो बड़े, 41 मुख्य और 169 छोटे पुल बनाए जाएंगे।
भद्रक-हरिदासपुर के बीच 75 किलोमीटर की चौथी लाइन भी बनाई जाएगी। इस मार्ग पर तीसरी लाइन का काम पहले से चल रहा है और कई हिस्सों में पूरा हो चुका है। यह कारिडोर कोयला, बिजली, लोहा, स्टील और चूना पत्थर की ढुलाई के लिए अहम है। चौथी लाइन बनने से कटक समेत आसपास के व्यस्त हिस्सों में ट्रेनों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। यहां 18 बड़े और 106 छोटे पुल बनाए जाएंगे।
बंगाल एवं ओडिशा के इन दोनों रेल मार्गों का महत्व झारखंड के लिए भी है। यहां के खनिज एवं औद्योगिक क्षेत्रों से कोयला, लौह अयस्क एवं इस्पात जैसी वस्तुएं ओडिशा व बंगाल के औद्योगिक केंद्रों तथा बंदरगाहों तक पहुंचती हैं। अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से मालगाड़ियों को यात्री ट्रेनों के कारण कम इंतजार करना पड़ेगा। इसका सीधा असर माल ढुलाई की गति और औद्योगिक आपूर्ति पर पड़ेगा।ॉ
इनके अलावा आंध्र प्रदेश के गुम्मिडिपुंडी से तमिलनाडु के गुडुर के बीच 90 किलोमीटर की तीसरी व चौथी लाइन तथा ओडिशा के कटक से पारादीप (बड़ाबंधा) के बीच 72 किलोमीटर की तीसरी व चौथी लाइन बनाई जाएगी। पारादीप बंदरगाह से जुड़े मार्ग की क्षमता बढ़ने से बंदरगाह से माल की आवाजाही तेज होगी।
आठ जिलों को कवर करने वाली इन चारों परियोजनाओं से 6,448 गांवों की करीब 60 लाख आबादी को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। सालाना करीब 7.6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता बनेगी। इससे सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव और लाजिस्टिक्स लागत घटाने में मदद मिलेगी। रेल परिवहन बढ़ने से करीब 13 करोड़ लीटर तेल की बचत और 65 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान है जो 2.6 करोड़ पौधारोपण के बराबर है।
बिहार में एनएच-22 का मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड चार लेन होगा
कैबिनेट ने बिहार में एनएच-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड के 82.578 किलोमीटर लंबे हिस्से को चार लेन में अपग्रेड करने को भी मंजूरी प्रदान कर दी। इस परियोजना पर 3,590.73 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इससे मुजफ्फरपुर, मकसूदपुर, रुन्नी सैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुताही और सोनबरसा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में भीड़भाड़ काफी कम हो जाएगी।
सरकारी बयान के अनुसार, एनएच-22 का यह हिस्सा रणनीतिक व आर्थिक रूप से बहुत अहम है क्योंकि यह नेशनल फ्रेट ग्रिड से निर्बाध जुड़ाव सुनिश्चित करता है। इसे 80 किलोमीटर प्रति घंटा की औसत गति के लिए डिजायन किया गया है। इस पर सात बड़े पुल (जिनमें सालभर बहने वाली बागमती नदी पर बना 340 मीटर लंबा पुल शामिल), तीन रेलवे ओवर ब्रिज और दो फ्लाईओवर बनाने का प्रविधान भी है।
