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भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी महिला नवी पिल्लई को मिला नोबेल शांति पुरस्कार

Published: Fri, 09 Oct 2026 02:41 PM (IST)Updated: Fri, 09 Oct 2026 02:45 PM (IST)

भारतीय मूल की दक्षिण-अफ्रीकी नागरिक नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार मिला है।

नवी पिल्लई को मिला नोबेल शांति पुरस्कार

नवी पिल्लई को मिला नोबेल शांति पुरस्कार

HighLights

  1. नवी पिल्लई को मिला नोबेल शांति पुरस्कार।

  2. भारतीय मूल की दक्षिण-अफ्रीकी नागरिक हैं पिल्लई।

  3. कानून विशेषज्ञ और रवांडा न्यायाधिकरण की पूर्व अध्यक्ष।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय मूल की दक्षिण-अफ्रीकी नागरिक नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार मिला है। इनके दादाजी तमिलनाडु के रहने वाले थे। ये कानून विशेषज्ञ और रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी हैं।

नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए नवनेथम 'नवी' पिल्लई को 2026 का NobelPeacePrize देने का फैसला किया है।

कौन हैं नवी पिल्लई?

भारतीय मूल के तमिल परिवार में जन्मीं पिल्लई एक अग्रणी वकील और कानून विशेषज्ञ बनीं। इनका जन्म 23 सितंबर, 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में उस दौर में हुआ, जब लोगों के रंगों के आधार पर भेदभाव होता था।

85 वर्षीय नवी पिल्लई को मुश्किल से मुश्किल मामलों को शांति से हल करने के लिए जाना जाता है। उनके इसी काम का ध्यान में रखकर नोबेल समिति ने उन्हें शांति के सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

नोबेल समिति ने सर्वोच्च शांति पुरस्कार के लिए नवी पिल्लई के नाम का एलान करते हुए कहा कि उनका काम शांतिपूर्ण ढंग से विवादों को सुलझाने, ताकतवर देशों और व्यक्तियों को जवाबदेह ठहराने और पीड़ितों की सुरक्षा में अंतरराष्ट्रीय कानून के महत्व को रेखांकित करता है।

Nobel Peace Prize (2)

नवी पिल्लई कई मामलों को शांति से सुलझाया

नवी पिल्लई दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट, रवांडा के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक ट्रिब्यूनल, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के तौर पर रह चुकी हैं।

नोबेल पुरस्कार विजेता नवी पिल्लई ने कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्रों पर संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग की अध्यक्षता भी की। वे म्यांमार पर नरसंहार के आरोपों से जुड़े मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में जज हैं।

पिल्लई ने बलात्कार, यौन हिंसा और मानवता के खिलाफ अपराध के संभावित कृत्यों के रूप में मान्यता देने वाले अहम फैसलों और प्रोपेगैंडा के जरिए उकसाने के मामलों में कानूनी कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई।

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