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सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ रद की सभी FIR, CJP ने 5 सितंबर का मार्च वापस लिया

Updated: Tue, 01 Sep 2026 03:41 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर रद कर दी हैं, जिसके बाद CJP ने 5 सितंबर ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर रद की (फाइल फोटो)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर समेत देशभर में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर रद करने लेकिन आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लगभग तीन हजार लोगों पर कार्रवाई के सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है।

सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी की वार्ता में छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने का फैसला लिया गया था।

शीर्ष अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच देश भर में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर रद कर दीं।

साथ ही कोर्ट ने नीट 2026 की गड़बड़ियों के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों के मुआवजे के लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने और मुआवजा देने के भी आदेश दिये हैं।

इन आदेशों को देखते हुए सीजेपी ने पांच सितंबर का अपना प्रस्तावित विरोध मार्च वापस ले लिया है। कोर्ट में मौजूद सीजेपी के सह संयोजक सौरभ दास ने पीठ के समक्ष उपस्थिति होकर संगठन की ओर से प्रस्तावित पांच सितंबर का विरोध मार्च वापस लेने की घोषणा की और कोर्ट तथा सरकार को धन्यवाद दिया।

कोर्ट ने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष कोर्ट के समक्ष दिये गए वादे का पालन करेंगे।

केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर नीट विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज 13 एफआईआर रद करने की मांग की थी साथ ही कहा था कि देश के अन्य हिस्सों में इसी मामले में दर्ज एफआईआर भी रद कर दी जाएं।

केंद्र ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2873 ऐसे लोगों के खिलाफ नयी एफआईआर दर्ज करने की इजाजत मांगी थी जिन पर प्रदर्शन के दौरान शारीरिक चोट पहुंचाने या सार्वजनिक संपत्ति नष्ट करने के आरोप हैं।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जोयमाल्या बाग्ची और वी. मोहना की पीठ ने उसी याचिका पर फैसला लिया। साथ ही कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 में प्राप्त विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दिये गए आदेश में स्पष्ट किया है कि आदेश मामले की विशेष परिस्थितयों को देखते हुए दिए जा रहे हैं इन्हें भविष्य में बाध्यकारी नजीर नहीं माना जाएगा।

प्रदर्शन में शामिल गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2873 लोगों के खिलाफ शारीरिक चोट पहुंचाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में नई एफआईआर करने की इजाजत के मामले में कोर्ट ने पूछा कि क्या इन लोगों के खिलाफ अभी कोई एफआईआर दर्ज नहीं है?

इस पर सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि इनके खिलाफ भी उन्हीं 13 एफआईआर में मामला दर्ज है जिन्हें कोर्ट से रद करने की मांग की गई है ऐसे में इनके खिलाफ नयी एफआईआर दर्ज करनी होगी।

कोर्ट ने केंद्र का अनुरोध स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि इस मामले से संबंधित किसी और राज्य में कोई एफआईआर दर्ज है,जो कोर्ट के समक्ष नहीं है उसे भी आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और बंद माना जाएगा।

सुनवाई के दौरान केंद्र ने कोर्ट से कहा कि केंद्र सरकार आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने सहित अन्य आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि मुआवजे के मामले में नीति और तौर तरीके व प्रक्रिया पूरी करने के लिए तीन महीने का समय मांगा।

कोर्ट ने नीट से जुड़े मामले में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को पूरे देश के लिए एक समान नीति बनाने और तीन महीने के भीतर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का निर्देश दिया है।