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नेपाल त्रासदी: 1356 लोगों की मौत, 5500 लापता; अंधेरी सुरंगों में टिकी आखिरी उम्मीद

Published: Mon, 07 Sep 2026 10:51 PM (IST)

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के 12 दिन बाद भी 5,500 लोग लापता हैं, जबकि 1,356 लोगों की मौत ...और पढ़ें

नेपाल में अब भी 5,500 लोग लापता (फोटो-रॉयटर्स)

नेपाल में अब भी 5,500 लोग लापता (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. नेपाल में बाढ़-भूस्खलन से 5,500 लोग अब भी लापता।

  2. हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे 121 लोगों को निकालने का प्रयास।

  3. तिब्बत में भी सैकड़ों लोग लापता, भारतीय तीर्थयात्री शामिल।

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के 12 दिन बाद भी करीब 5,500 लोग लापता हैं। हर गुजरते दिन के साथ उनके जीवित मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है।

आपदा में अब तक 1,356 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती हाइड्रोपावर परियोजनाओं की भूमिगत सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालना है।

121 लोगों के फंसे होने की आशंका

रॉयटर्स के अनुसार, नौ जिलों में फ्लैश फ्लड के कारण हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में 121 के अब भी अंदर फंसे होने की आशंका है। रसुवा जिले की चिलिमे हाइड्रोपावर परियोजना में छह कर्मचारी लापता हैं। सांसद श्रीराम नेउपाने के मुताबिक, इनमें चार के जीवित होने की उम्मीद है।

सुरंगों में हवा के लिए छोटे वेंटिलेशन सिस्टम, आराम करने के कमरे और कुछ जगहों पर रसोई भी बनी होती है। इसलिए बचाव दल अभी उम्मीद नहीं छोड़ रहा है।

पीटीआई के अनुसार, कर्मचारियों को बाहर निकालने के अभियान में भारतीय सुरंग विशेषज्ञों की टीम भी जुटी है। आस्ट्रेलियाई सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स भी अभियान में मदद कर रहे हैं।

डिक्स ने 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के अभियान में अहम भूमिका निभाई थी।

इस बीच धादिंग जिले में बाढ़ से क्षतिग्रस्त पृथ्वी हाईवे के हिस्से को बहाल करने के लिए 252 मीटर लंबा अस्थायी ट्रैक तैयार किया गया है। यह मार्ग काठमांडू को पश्चिमी नेपाल से जोड़ता है।

13वें दिन मनाया गया शोक

आपदा में मारे गए लोगों के सम्मान में सोमवार को नेपाल में 13वें दिन का शोक मनाया गया। हिंदू परंपरा में मृत्यु के 13वें दिन को शोक की अवधि का अंतिम दिन माना जाता है। इस मौके पर नेपाल और विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों में शोक मनाया गया और राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहा।

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की है। इनमें बड़े ड्रोन, बेली ब्रिज, डीएनए जांच किट, सुरंग बचाव सूट और महामारी से बचाव के उपकरण शामिल हैं।

करीब 3,500 प्रभावित लोगों को रसुवा, नुवाकोट और धादिंग के विभिन्न आश्रय केंद्रों में रखा गया है।

राष्ट्रपति ने मांगा जलवायु मुआवजा

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने आपदा प्रभावित रसुवा और नुवाकोट का दौरा कर कहा कि नेपाल को जलवायु परिवर्तन की कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से नेपाल जैसे जलवायु-संवेदनशील देशों के लिए ‘जलवायु न्याय’ सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार देशों से मुआवजे की व्यवस्था करने की मांग की।

उन्होंने राजनीतिक दलों और नागरिकों से आरोप-प्रत्यारोप से बचकर राहत एवं बचाव अभियान में एकजुट होने की अपील की।

पर्यटकों के लिए खुला नेपाल

आपदा के बीच नेपाल ने पर्यटकों को देश आने का संदेश दिया है। पर्यटन मंत्री खडक राज पौडेल ने कहा कि देश पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘नेपाल कालिंग’ अभियान शुरू किया गया है। नेपाल की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की हिस्सेदारी करीब 6.7 प्रतिशत है। ऐसे में पर्यटकों की कमी आर्थिक संकट को और गहरा सकती है।

आपदा पीड़ितों का मजाक उड़ाने वालों पर कार्रवाई

नेपाल के साइबर ब्यूरो ने आपदा पीड़ितों के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक और नफरत भरी टिप्पणियां करने वालों की जांच के लिए 10 सदस्यीय टीम बनाई है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी चेतावनी दी है कि संकट में फंसे लोगों का मजाक उड़ाने या उन्हें परेशान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, लापता परिजनों की तलाश में मदद मांग रहे परिवारों की सोशल मीडिया पोस्ट पर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।

तिब्बत में भी सैकड़ों लोग लापता

उधर, चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी आपदा का असर जारी है। एएनआई के अनुसार, अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 43 शव बरामद किए जा चुके हैं और 500 से अधिक लोग लापता हैं। इनमें बड़ी संख्या भारतीय या भारतीय मूल के उन तीर्थयात्रियों की बताई जा रही है, जो कैलास पर्वत और मानसरोवर की यात्रा पर थे।

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खोज और बचाव अभियान में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। हालांकि, आपदा के बारे में समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने को लेकर चीन की आलोचना भी हुई है।

आईएएनएस के अनुसार, बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने तिब्बत में लापता भारतीयों के स्वजन से डीएनए नमूने जमा कराने की अपील की है।

दूतावास के मुताबिक, चीन के अधिकारियों ने डीएनए जांच शुरू करने की पुष्टि की है। नमूनों के मिलान के बाद संबंधित परिवारों को जानकारी दी जाएगी। दूतावास ने मदद के लिए हाटलाइन नंबर 0086-891-6817165 और 0086-183-0802-6705 भी जारी किए हैं।