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डिग्री मिली पर नौकरी नहीं... नीति आयोग की नई रिपोर्ट में दिखी शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर की तस्वीर

Updated: Fri, 21 Aug 2026 09:35 PM (IST)

नीति आयोग की नई रिपोर्ट 'रीइमैजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित भारत@2047' ने भारत में शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर को उजागर किया है।

नीति आयोग।

नीति आयोग।

HighLights

  1. केवल 8.25% ग्रेजुएट ही शिक्षा अनुरूप काम करते हैं।

  2. नीति आयोग ने कमजोर प्रैक्टिकल लर्निंग को चुनौती बताया।

  3. उद्योग-जुड़े पाठ्यक्रम और वर्क-इंटीग्रेटेड डिग्री का सुझाव।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में उच्च शिक्षा का दायरा लगातार बढ़ रहा है और हर साल बड़ी संख्या में युवा डिग्री लेकर निकल रहे हैं, लेकिन डिग्री और रोजगार के बीच की कड़ी कमजोर बनी हुई है।

इसका एक संकेत यह है कि आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, केवल 8.25 प्रतिशत ग्रेजुएट ही ऐसे काम में हैं जो उनके शिक्षा स्तर के अनुरूप है। आधे से अधिक ग्रेजुएट इससे कम कौशल वाले काम कर रहे हैं।

18 अगस्त को जारी नीति आयोग की नई रिपोर्ट 'रीइमैजिनिंग स्किलिंग फार विकसित भारत@2047' इस समस्या की एक और परत सामने रखती है। रिपोर्ट के मुताबिक, समस्या सिर्फ बेरोजगारी की नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में मिलने वाली पढ़ाई, वास्तविक काम के लिए जरूरी कौशल और उद्योग की जरूरतों के बीच तालमेल की कमी की है।

नीति आयोग ने कमजोर प्रैक्टिकल लर्निंग, उद्योग से कम जुड़ाव, सतही इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप तथा करियर गाइडेंस की कमी को प्रमुख चुनौतियों में गिना है।डिग्री है, लेकिन नौकरी के लिए जरूरी कौशल नहींनीति आयोग के अनुसार, उच्च शिक्षा में बड़ी संख्या में छात्र सामान्य यानी जेनेरिक डिग्री कार्यक्रमों में दाखिला लेते हैं।

3.4 करोड़ अंडरग्रेजुएट छात्रों में 1.13 करोड़ अकेले बीए कर रहे हैं, जबकि बीए, बीएससी और बीकाम में कुल दाखिला दो करोड़ से अधिक है। रिपोर्ट का कहना है कि इन डिग्रियों का नौकरी से सीधा जुड़ाव कमजोर है। कई छात्र इन डिग्रियों को इसलिए भी चुनते हैं क्योंकि इनके जरिए सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने की पात्रता मिल जाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सामान्य बीए, बीकाम और बीएससी की डिग्रियां अपने आप सीधे रोजगार में नहीं बदलतीं। कई एंट्री-लेवल नौकरियों में भी टैली या आफिस एप्लीकेशन जैसे कार्यस्थल कौशल की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि सिर्फ डिग्री हासिल कर लेना और नौकरी के लिए तैयार होना दो अलग-अलग बातें बन गई हैं। इसका असर छात्र खुद भी महसूस कर रहे हैं।

नीति आयोग के अध्ययन में 80 प्रतिशत उच्च शिक्षा के छात्रों ने प्रैक्टिकल अनुभव और इंडस्ट्री एक्सपोजर की कमी को बड़ी समस्या बताया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप वास्तविक काम सीखने के बजाय केवल औपचारिकता बनकर रह जाती हैं। छात्र कंपनियों में जाते तो हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट काम, मार्गदर्शन और सीखने का अवसर नहीं मिलता।यही वह कड़ी है जो कालेज और नौकरी के बीच गायब है।

मसलन, अर्थशास्त्र पढ़ने वाला छात्र आर्थिक सिद्धांतों को अच्छी तरह समझ सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि उसे किसी कंपनी के वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करना आता हो। बीकाम का छात्र अकाउंटिंग पढ़ सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि उसे कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाले साफ्टवेयर की जानकारी हो। इसी तरह राजनीतिक विज्ञान का छात्र राजनीतिक सिद्धांत जानता हो, लेकिन जरूरी नहीं कि उसे रिसर्च, पालिसी एनालिसिस या पब्लिक अफेयर्स का व्यावहारिक अनुभव मिला हो।

नीति आयोग ने रास्ता सुझायानीति आयोग ने सामान्य डिग्री कार्यक्रमों को रोजगार से जोड़ने के लिए जाब-लिंक्ड स्पेशलाइजेशन, इंडस्ट्री से जुड़े पाठ्यक्रम और वर्क-इंटीग्रेटेड डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ाने का सुझाव दिया है। उदाहरण के तौर पर बीकाम के साथ एनालिटिक्स या डिजिटल मार्केटिंग, बीए के साथ रिटेल या हास्पिटैलिटी और बीएससी के साथ एप्लाइड टेक्नोलाजी जैसे विकल्प विकसित करने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में स्कूल स्तर से ही रोजगार और उद्यमिता से जुड़े सामान्य कौशल सिखाने की सिफारिश की गई है। कक्षा छह से सामान्य रोजगार और उद्यमिता कौशल तथा आगे चलकर व्यावसायिक विकल्पों से परिचय कराने का सुझाव है। साथ ही अप्रेंटिसशिप को पढ़ाई के बाद का विकल्प नहीं, बल्कि शिक्षा के साथ जुड़ा मुख्य रास्ता बनाने पर जोर दिया गया है।

वित्त मंत्री ने भी उठाया यही सवालवित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल में दिए एक इंटरव्यू में शिक्षा और रोजगार के इसी अंतर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा विश्वविद्यालयी पाठ्यक्रम छात्रों को न तो नौकरी के लिए पर्याप्त रूप से तैयार करते हैं और न ही उद्यमी बनने के लिए।

उन्होंने बीए में अर्थशास्त्र या राजनीतिक विज्ञान जैसे विषयों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि डिग्री के बाद छात्र के लिए आगे का स्पष्ट पेशेवर रास्ता क्या है। उनके मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था को ऐसा होना चाहिए कि छात्र या तो किसी नौकरी के लिए तैयार होकर निकले या अपना काम शुरू करने की क्षमता हासिल करे।