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बेकार पड़ी सरकारी जमीनों से भरेगा खजाना, दिल्ली-मुंबई समेत कई शहरों में फ्लैट बेचेगी सरकार

Published: Tue, 03 Nov 2026 11:36 PM (IST)

राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (एनएलएमसी) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी उपक्रमों की जमीन बेचकर अब तक 9000 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

सरकारी उपक्रमों की बेकार पड़ी जमीन का मौद्रीकरण शुरू

सरकारी उपक्रमों की बेकार पड़ी जमीन का मौद्रीकरण शुरू

HighLights

  1. एनएलएमसी ने सरकारी जमीन बेचकर 9000 करोड़ रुपये जुटाए।

  2. चालू वित्त वर्ष में 15,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य।

  3. दिल्ली, विशाखापट्टनम में जमीन व फ्लैटों का मुद्रीकरण।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सरकारी उपक्रमों के विनिवेश के साथ इनकी जमीन की बिक्री को लेकर भी सरकार काफी सक्रिय दिख रही है। वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाली एजेंसी राष्ट्रीय भूमि मौद्रीकरण निगम (एनएलएमसी) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में विभिन्न सरकारी उपक्रमों की जमीन को बेचकर अब तक 9000 करोड़ रुपए जुटा चुका है।

उम्मीद की जा रही है कि अगले तीन-चार महीनों में और पांच-छह करोड़ रुपए की जमीन की सफल बिक्री हो जाएगी। दिल्ली, कोलकाता, मुंबई व प्रयागराज जैसी जगहों पर सरकारी उपक्रमों के फ्लैटों का भी मुद्रीकरण किया जाएगा। छह माह पहले तक सरकारी जमीन के मुद्रीकरण को लेकर कोई नीलामी नहीं हो रही थी।

एनएलएमसी के सीईओ रोहन चंद ठाकुर ने बताया कि सरकारी उपक्रमों की बेकार पड़ी या अतिरिक्त जमीन का मौद्रीकरण किया जा रहा है। इनकी बिक्री की प्रक्रिया पूरी करने व संबंधित काम को एनएलएमसी पूरा करता है। बदले में निगम शुल्क लेता है।

पिछले छह महीनों में मुख्य रूप से एमटीएनएल और बीएसएनएन की जमीन का मुद्रीकरण किया गया है और इससे 9000 करोड़ रुपए मिले हैं। उन्होंने बताया कि जमीन मुद्रीकरण के तहत दिल्ली के नजफगढ़ स्थित एचआईएल (इंडिया) लिमिटेड की 5.11 एकड़ जमीन की नीलामी होने जा रही है।

इस नीलामी के लिए 829.69 करोड़ रुपए का रिजर्व प्राइस रखा गया है और उम्मीद है कि नीलामी में रिजर्व प्राइस से अधिक राजस्व मिलेगा। इसे लेकर तीन नवंबर को निवेशकों के साथ बैठक की गई और 19 नवंबर तक वे इस बोली में हिस्सा लेने के लिए आवेदन कर सकेंगे। जमीन लेने वाले निवेशक इस पर उद्योग से लेकर फ्लैट, माल कुछ भी बना सकेंगे।

ठाकुर ने बताया कि गत 12 अक्टूबर को विशाखापट्टनम में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड की जमीन का 366 करोड़ में मुद्रीकरण किया गया। इसके लिए रिजर्व प्राइस 312 करोड़ रुपए रखा गया था।

इसके अलावा राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के 100 प्लाट के मुद्रीकरण की प्रक्रिया तीन नवंबर को पूरी हो रही है। इसलिए उनके मूल्य की सटीक जानकारी नहीं दी जा सकती है।

ठाकुर ने बताया कि कई सरकारी उपक्रम अपनी जमीन के मुद्रीकरण के लिए एनएलएमसी से संपर्क कर रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से स्टील और संचार विभाग के उपक्रम शामिल हैं। जमीन का मुद्रीकरण ई-नीलामी के जरिए किया जाता है।

हाल ही में आईडीबीआई बैंक में सरकार की 60.72 प्रतिशत की हिस्सेदारी 53,000 करोड़ में बेची गई है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने 80,000 करोड़ रुपए के विनिवेश का लक्ष्य रखा था जो पहले ही पूरा हो चुका है। जमीन के मुद्रीकरण से सरकार को राजस्व हासिल होने के साथ निजी सेक्टर को जमीन भी आसानी से मिल पाएगी।

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