Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 22, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    On This Day 22 July: भारत ने अंतरिक्ष में लगाई थी लंबी छलांग, मशहूर सिंगर मुकेश का हुआ था जन्‍म

    By TilakrajEdited By:
    Updated: Fri, 22 Jul 2022 08:03 AM (IST)

    On This Day 21 July इतिहास के पन्‍नों में आज का दिन यानि 22 जुलाई बेहद खास है। आज ही के दिन प्रणव मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। 1 ...और पढ़ें

    बालीवुड के शोमैन राज कपूर की आवाज कहे जाते थे मुकेश
    बालीवुड के शोमैन राज कपूर की आवाज कहे जाते थे मुकेश

    नई दिल्‍ली, आनलाइन डेस्‍क। भारत के लिए आज यानि 22 जुलाई का दिन बेहद मायने रखता है। भारत ने आज ही के दिन श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-2(Chandrayaan) का प्रक्षेपण कर अंतरिक्ष में एक लंबी छलांग लगाई थी। वहीं, संविधान सभा में तिरंगे (National Flag) को राष्ट्रध्वज के रूप में 22 जुलाई को ही अंगीकृत किया गया था। 2012 में 22 जुलाई को ही प्रणव मुखर्जी (Pranab Mukherjee) भारत के 13वें राष्ट्रपति निर्वाचित (India President) हुए थे। हिंदी फिल्‍मों के मशहूर गायक मुकेश (Bollywood Singer Mukesh) का जन्‍म भी आज ही के दिन हुआ था।

    श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण

    अंतरिक्ष की गहराइयों और चांद तारों की चाल पर नजर रखने वालों के लिए 22 जुलाई का दिन इतिहास में एक बड़ी घटना के साथ दर्ज है। दरअसल 2019 को आज ही के दिन चंद्रमा के अनछुए पहलुओं का पता लगाने के लिए भारत ने चंद्रयान-2 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) से शान के साथ रवाना किया गया। इसे ‘बाहुबली’ नाम के सबसे ताकतवर और विशाल राकेट जीएसएलवी-मार्क ।।। के जरिए प्रक्षेपित किया गया। इसे देश के अंतरिक्ष इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा गया।

    हेलीकाप्टर से पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर लौटे थे स्मिथ

    1983 में आज ही आस्ट्रेलिया के डिक स्मिथ हेलीकाप्टर से पूरी दुनिया का अकेले चक्कर लगाकर लौटे थे। उनकी उड़ान की शुरुआत पांच अगस्त, 1982 को हुई थी। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग चरणों में उड़ान भरते हुए 11 महीने में अपना मिशन पूरा किया था।

    बालीवुड के शोमैन राज कपूर की आवाज कहे जाते थे मुकेश

    कई हिट गाने देकर बालीवुड शोमैन राज कपूर की आवाज बन गए पाश्र्वगायक मुकेश का जन्म 1923 में आज ही दिल्ली में हुआ था। उनका पूरा नाम मुकेश चंद माथुर था। बहन की शादी में गाना गाता देखकर फिल्म निर्माता मोतीलाल ने उन्हें फिल्मों में गाने का मौका दिया था। देखते ही देखते अपनी खास आवाज के दम पर मुकेश ने एक अलग पहचान बना ली। वैसे तो मुकेश को राजकपूर की आवाज कहा जाता था, लेकिन कई अन्य अभिनेताओं के लिए भी उन्होंने एक से एक हिट गाने गाए थे। कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे, चांद आहें भरेगा, सावन का महीना ऐसे ही कुछ सुपरहिट गाने हैं। 27 अगस्त 1976 को उनका निधन अमेरिका के मिशिगन में हुआ।

    खबरें और भी

    बेहद खास रहा है 22 जुलाई का दिन

    • 2012 प्रणव मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति निर्वाचित।
    • 2001 : शेर बहादुर देउबा नेपाल के नये प्रधानमंत्री बने
    • 2001 : समूह-आठ के देशों का जिनेवा में सम्मेलन सम्पन्न।
    • 2003 : इराक में हवाई हमले में तानाशाह सद्दाम हुसैन के दो बेटे मारे गए।
    • 1731 : स्पेन ने वियना संधि पर हस्ताक्षर किए।
    • 1918 : भारत के पहले कुशल पायलट इन्द्रलाल राय प्रथम विश्वयुद्ध के समय लंदन में जर्मनी से हुई लड़ाई में मारे गए।
    • 1969 : सोवियत संघ ने स्पूतनिक 50 और मोलनिया 112 संचार उपग्रहों का प्रक्षेपण किया।
    • 1981 : भारत के पहले भूस्थिर उपग्रह एप्पल ने कार्य करना शुरू किया।
    • 1988 : अमेरिका के 500 वैज्ञानिकों ने पेंटागन में जैविक हथियार बनाने के शोध का बहिष्कार करने की प्रतिज्ञा ली।
    • 1999 : अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा समान कार्य के लिए समान पारिश्रमिक की कार्य योजना लागू।

    संविधान सभा में तिरंगे को राष्ट्रध्वज के रूप में किया गया अंगीकृत

    1947 में आज ही संविधान सभा में तिरंगे को राष्ट्रध्वज के रूप में अंगीकृत किया गया था। कई बदलाव के बाद इसका वर्तमान स्वरूप सामने आया था, जिसे संविधान सभा में रखा गया था। तिरंगे में केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टियां हैं। बीच वाली सफेद पट्टी में धर्म चक्र को स्थान दिया गया है। दरअसल, 19वीं सदी में जब भारत पर ब्रिटिश शासन था, तब अलग-अलग झंडे देश के विभिन्‍न राज्‍यों के शासकों इस्‍तेमाल करते थे। इसके बाद 21 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसी झंडे को भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज के तौर पर अपनाया। 15 अगस्‍त 1947 को आजादी मिलने के बाद इसमें बस एक ही बदलाव हुआ. तिरंगे में चरखे की जगह पर अशोक चक्र को दिखाया गया था।