ऑपरेशन सफेद सागर: वायुसेना के पराक्रम ने कैसे पलटा था कारगिल युद्ध का रुख?
कारगिल युद्ध में वायुसेना के ऑपरेशन सफेद सागर ने निर्णायक भूमिका निभाई, जिसमें मिराज-2000, मिग-21 और मिग-27 लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों के ठिकानों पर सटीक हमले किए।

ऑपरेशन सफेद सागर।
HighLights
ऑपरेशन सफेद सागर कारगिल युद्ध में निर्णायक साबित हुआ।
मिराज-2000 ने टाइगर हिल पर लेजर-निर्देशित बमों का इस्तेमाल किया।
वायुसेना के विमानों ने 16,000-18,000 फीट पर घुसपैठियों पर हमला किया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध में विजयी परचम फहराने में वायुसेना के ऑपरेशन सफेद सागर ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। वायुसेना के मिराज-2000, मिग-21 व मिग-27 लड़ाकू विमानों ने 16,000 से 18,000 फीट की ऊंचाई पर छिपे पाकिस्तानी घुसपैठियों के ठिकानों पर सटीक हमले कर युद्ध का रुख पूरी तरह पलट दिया था। इसी कारण पाकिस्तान को पहाड़ों से पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
वायुसेना के प्रवक्ता विंग कमांडर जयदीप सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान पहाड़ों में छिपकर नुकसान पहुंचा रहे घुसपैठियों को हटाने के लिए वायुसेना को हवाई मदद की जिम्मेदारी दी। हमला ज्यादा ऊंचाई पर मौजूद दुश्मन पर किया।
लेजर गाइडेड बम का भी इस्तेमाल
यह दुनिया भर में उस समय हवाई ताकत का इस्तेमाल करने वाली सबसे ऊंची जगहों में से एक थी। लेजर गाइडेड बम का इस्तेमाल किया। यही नहीं वायुसेना के हेलीकाप्टरों ने घायल सैनिकों को युद्ध के मैदान से सुरक्षित निकाला था। इसके अलावा बड़े विमानों ने अग्रिम हवाई अड्डों तक भारी सैन्य रसद पहुंचाई।
द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक परिसर में प्रदर्शित मिग-21 विमान उसी 17 स्क्वाड्रन गोल्डन एरोज का हिस्सा है, जिसका नेतृत्व कारगिल युद्ध के दौरान स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा ने किया था। अजय ने युद्ध के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया व उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
मिग-21 को 15 वर्षों तक उड़ाया
कारगिल युद्ध के अनुभवी व सेवानिवृत्त ग्रुप कैप्टन संजय मिश्रा ने बताया कि स्मारक परिसर में रखा मिग-21 वही विमान है जिसे उन्होंने लगभग 15 वर्षों तक उड़ाया था। सेवानिवृत्ति के बाद जब वह तोलोलिंग चोटी पर पहुंचे, तब उन्हें अहसास हुआ कि भारतीय सैनिकों ने कितनी कठिन परिस्थितियों में दुश्मन से लड़कर विजय हासिल की।
कारगिल युद्ध के दौरान मिराज-2000 विमानों ने टाइगर हिल व मुंथो ढालो जैसे महत्वपूर्ण दुश्मन ठिकानों पर हमले किए। 24 जून 1999 को मिराज-2000 विमानों ने लेजर-निर्देशित बमों से टाइगर हिल पर हमला किया।
हमले ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चोटी को दोबारा हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद मुझे तोलोलिंग पहाड़ी पर चढ़ने का मौका मिला। वहां से मुझे एहसास हुआ कि तोलोलिंग की लड़ाई कितनी मुश्किल थी, क्योंकि दुश्मन ऐसी ऊंचाई पर बैठा था जिसका उसे सामरिक लाभ मिल रहा था। फिर भी, बहादुर सैनिकों ने लड़ाई लड़ी और हमें जीत दिलाई।
मिराज-2000 बना था कारगिल युद्ध का गेम चेंजर
पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ उस समय 17 स्क्वाड्रन के कमांडिंग आफिसर थे। सैन्य विशेषज्ञ भी मिराज-2000 को कारगिल युद्ध का गेम चेंजर मानते हैं। मिराज-2000 फ्रांस में निर्मित बहुउद्देश्यीय व सिंगल इंजन वाला लड़ाकू विमान है। इसे विभिन्न प्रकार के बमों, मिसाइलों के साथ लेजर गाइडेड बम दागने की क्षमता के लिए जाना जाता है। वायुसेना के पास इस समय मिराज-2000 के तीन स्क्वाड्रन हैं।
