विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने समेत SIR रोकने जैसी कई मांग, सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई संभव

Published: Tue, 13 Oct 2026 12:02 AM (IST)Updated: Tue, 13 Oct 2026 02:08 AM (IST)

विपक्ष ने 'वोट चोरी-एसआईआर' के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 'लोकतंत्र मार्च' निकाला।

विपक्ष ने 'वोट चोरी-एसआईआर' के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया

विपक्ष ने 'वोट चोरी-एसआईआर' के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

संजय मिश्र, नई दिल्ली। 'वोट चोरी-एसआईआर' को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निर्णायक जंग के लिए सड़क पर उतर चुके एकजुट विपक्ष ने सोमवार को बड़ा विरोध प्रदर्शन करते हुए सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला। चुनावों में भारी गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च अदालत में एक संयुक्त याचिका दाखिल कर ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की।

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में राजधानी के कनाट प्लेस के बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक 'लोकतंत्र के लिए मार्च' के इस बड़े विरोध प्रदर्शन में मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव से लेकर साैगात राय जैसे शीर्ष विपक्षी नेताओं ने हजारों लोगों के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया।

विपक्षी नेताओं ने सर्वोच्च अदालत की चौखट पर दस्तक देते हुए दायर अपनी संयुक्त याचिका में मतदाता सूची वोटर के 'विशेष सघन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के जरिए बहुत बड़ी संख्या में वोटरों के नाम काटे जाने की शिकायत, चुनावी धांधली के दावे करते हुए एसआईआर रोकने की मांग की है।

राजधानी दिल्ली में पांच घंटे से अधिक चले लोकतंत्र मार्च के दौरान दायर इस संयुक्त याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सपा के अखिलेश यादव, राजद के तेजस्वी यादव, माकपा के एमए बेबी, टीएमसी के सौगत राय, एनसीपी-एसी की सुप्रिया सुले, शिवसेना यूबीटी के संजय राउत, आइयूएमल के टी बशीर आदि याचिकाकर्ता हैं। हालांकि याचिका दाखिल करने वालों में पहला नाम राहुल गांधी का है।

PTI10_12_2026_000402B

सीजेआई की विपक्षी नेताओं को सलाह

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के वोट चोरी मुद्दे पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के अनुरोध को अस्वीकार कर दिए जाने के बाद विपक्षी नेताओं ने सोमवार को यह संयुक्त याचिका दाखिल की। सीजेआई ने विपक्षी नेताओं को उनसे मुलाकात की जगह याचिका दायर करने की सलाह दी थी।

राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की एसआईआर मामले में दखल की मांग की गई और बताया जा रहा कि सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करेगा। विरोध प्रदर्शन में जुटी बड़ी भीड़ के चलते राहुल और विपक्षी नेता शाम 4.30 बजे से पहले सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंच सके इसलिए उनकी कानूनी टीम ने यह याचिका दाखिल की।

हालांकि शाम करीब साढ़े छह बजे के बाद राहुल गांधी, खरगे, अखिलेश, तेजस्वी, प्रियंका गांधी समेत तमाम विपक्षी नेता मार्च करते हुए भारी पुलिस घेरे में सुप्रीम कोर्ट परिसर में दाखिल हुए। विपक्ष का लोकतंत्र मार्च कंस्टीच्यूशन क्लब से दोपहर दो बजे के बाद निकला और कई किलोमीटर घूमते हुए बाराखंबा रोड सर्किल पर पहुंचा।

20261012090L

राहुल-खरगे समेत तमाम विपक्षी नेताओं का मार्च

राहुल गांधी, खरगे और अखिलेश समेत तमाम विपक्षी नेता और सांसद बसों में सवार थे तो तमाम विपक्षी दलों, छात्र संगठनों के लोग बड़ी संख्या में उनके साथ पैदल मार्च कर रहे थे। बाराखंबा सर्कल पर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने मार्च रोकने का प्रयास किया। तब राहुल गांधी पैदल लोगों के साथ मार्च करने लगे और फिर तमाम नेता भगवान दास रोड पर जमा हो गए।

जब पुलिस ने यहां मार्च रोका तो राहुल, प्रियंका, अखिलेश, तेजस्वी, वामपंथी छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ही नहीं कांग्रेस शासित राज्यों के तीन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू, डीके शिवकुमार और रेवंत रेडडी समेत कई नेता एक ट्रक पर चढ़ गए और फिर बैरिकेड्स पार करके जुलूस आगे बढ़ा। इस दौरान ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे और पोस्टर लहराने के साथ-साथ पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह को लेकर भी नारबेजी हो रही थी।

दिलचस्प यह था कि कभी सड़क पर नहीं उतरने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर से लेकर वरिष्ठ वकील राजनेता अभिषेक मनु सिंघवी भी पैदल मार्च करते हुए पसीना बहा रहे थे। युवा कांग्रेस के कुछ लोग जेन-जी को प्रदर्शन में आकर्षित करने के लिए बैटमैन से लेकर कुछ अन्य मास्क पहने नजर आए।

WhatsApp Image 2026-10-12 at 6.45.06 PM

विपक्षी की संयुक्त याचिका में प्रमुख दस मांगे

राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की दायर संयुक्त याचिका में मांग की गई है कि एसआइआर से जुड़े सभी रिकार्ड, फाइलें, समझौते, मिनट्स, बैठक के रिकॉर्ड और आपत्तियों का रिकॉर्ड न्यायालय में रखा जाए।

बिहार में 24 जून 2025 को पहली बार एसआइआर शुरू करने के निर्णय से संबंधित प्रासंगिक इसीआइनेट और इरोनेट एक्सेस लॉग तथा पूरी फाइल नोटिंग भी सामने लाई जाए।

दूसरा एसआईआर के फैसलों की संवैधानिक वैधता की जांच की जए कि यह संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 तथा टीएन शेषन बनाम भारत संघ (1995) मामले में सुप्रीम कोर्ट के घोषित कानून के अनुरूप लिए गए हैं या नहीं।

फैसला अवैध है तो इसे रद्द किया जाए। तीसरा मतदाता सूचियों की तैयारी और संशोधन को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक या वैधानिक प्रावधानों के किसी भी उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

चौथा, चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि एसआइआर से संबंधित हर फैसला विधिवत दर्ज किया जाए। पांचवा ऑनलाइन फॉर्म-6 को निर्धारित नियमों के अनुरूप रखने का निर्देश

दिया जाए और निर्धारित फॉर्म से अलग कोई बदलाव न किया जाए। छठा एसआइआर की वर्तमान प्रकिया की ऑडिट जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित कर की जाए जिसमें तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को भी शामिल किया जाए।

सातवां, एसआईआर में हटाए गए मतदाताओं के नाम और कारण प्रकाशित करने का चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए।आठवां बिना नोटिस और सुनवाई किसी वोटर का नाम नहीं हटाया जाए।

नौवां एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसके अतिरिक्त चुनावी गडबड़ियाें को रोकने तथा वोटरों का अधिकार सुरक्षित रखने के लिए सर्वोच्च अदालत जो भी जरूरी समझे वह आदेश पारित करे।

यह भी पढ़ें- राहुल गांधी की याचिका में 14 गलतियां और 220 रुपये की शॉर्टफॉल, सुप्रीम कोर्ट ने निकाली कमियां

यह भी पढ़ें- 'CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने तक जारी रहेगा आंदोलन', राहुल गांधी का बड़ा दावा