संसद सत्र के सत्रावसान का अंतराल रिकॉर्ड की दहलीज पर, कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
संसद के मानसून सत्र का सत्रावसान 82 दिन बाद भी न होने का मामला अब रिकॉर्ड की दहलीज पर है। ...और पढ़ें
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संसद सत्र के सत्रावसान का अंतराल रिकॉर्ड की दहलीज पर।
HighLights
मानसून सत्र सत्रावसान में 82 दिन की रिकॉर्ड देरी दर्ज।
कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर परिसीमन बिल का आरोप लगाया।
सत्रावसान न होने से आगामी शीत सत्र पर अनिश्चितता।
संजय मिश्र, नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र खत्म होने के 82 दिन बाद भी सत्रावसान नहीं किए जाने का मामला अब संसदीय रिकॉर्ड बुक में दर्ज किए जाने की दहलीज पर पहुंच गया है। कांग्रेस के अनुसार उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि इससे पूर्व सत्र खत्म होने के 81 दिन बाद तक सत्रावसान का रिकॉर्ड रहा है।
मुख्य मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को सत्रावसान नहीं करने की सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि परिसीमन बिल लाने का एजेंडा भाजपा ने छोड़ा नहीं है। सत्रावसान के रिकॉर्ड बनने के दावे का सरकारी सूत्रों ने आधिकारिक खंडन नहीं किया है मगर उसके अनुसार यह रिकॉर्ड 87 दिनों का है। हालांकि संसदीय सचिवालय की ओर से 87 दिनों के इस रिकॉर्ड का ब्यौरा अभी साझा नहीं किया गया है।
13 अगस्त को ही समाप्त हुआ था मानसून सत्र
मानसून सत्र बीते 13 अगस्त को ही समाप्त हुआ था मगर मंगलवार तक 82 दिन बीतने के बाद भी इसका सत्रावसान नहीं हुआ था। सत्रावसान नहीं किए जाने का अर्थ यह है कि तकनीकी रूप से मानसून सत्र खत्म नहीं हुआ और सरकार तीन-चार दिनों की सूचना पर ही संसद की बैठक बुला सकती है।
लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए परिसीमन बिल लाने के पिछले अप्रैल में किए प्रयास के विफल रहने के बाद सरकार लगातार इसे दुबारा लाने की सियासी कसरत में जुटी है। खासकर बंगाल चुनाव के तत्काल बाद तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों और शिवसेना यूबीटी के छह सांसदों के टूट कर एनडीए संग आने के बाद परिसीमन बिल पर दो तिहाई बहुमत जुटाने के दांव-पेंच की सियासत लगातार गरम रही है।
सत्रावसान नहीं किए जाने विपक्ष सशंकित
विपक्ष सत्रावसान नहीं किए जाने को लेकर इसलिए सशंकित है। कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को इसे उठाते हुए एक्स पर पोस्ट में कहा 'मानसून सत्र स्थगित हुए 82 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक सत्रावसान नहीं किया गया है। परिसीमन विधेयक में क्या है, यह अब तक सामने नहीं आया है, लेकिन इनका मकसद साफ है कि किसी तरह से 2029 में सामने दिख रही करारी हार से भाजपा को कैसे बचाया जाए।'
'परिसीमन को लेकर अपने नए प्रस्ताव उन्हें विपक्ष के साथ साझा करने चाहिए। आखिर इन प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का साहस वे क्यों नहीं दिखा पा रहे हैं?'
जयराम ने यह भी कहा कि खुद को चाणक्य समझने वाले गृहमंत्री वोट चोरी पर विशेष सत्र बुलाने को लेकर गंभीर हैं तो सबसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा सुनिश्चित कर एसआईआर प्रक्रिया रोकनी चाहिए।
संविधान सत्रावसान के लिए कोई निश्चित दिन तय नहीं किए गए
सत्र खत्म होने के बाद सत्रावसान अमूमन दो से चार दिन में हो जाता है। हालांकि संविधान के अनुच्छेद 85 जिसके तहत संसद सत्र बुलाने के नियम हैं उसमें सत्रावसान के लिए कोई निश्चित दिन तय नहीं किए गए हैं। संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार 1952 के बाद से अब तक चार बार संसद का शीत सत्र नहीं हुआ है।
1975 में आपातकाल के दौरान, लोकसभा बीच में भंग होने के कारण 1979 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में और 2020 में कोविड महामारी के कारण शीत सत्र नहीं हुआ था। शीत सत्र नवंबर के तीसरे सप्ताह में बुलाया जाता है मगर सत्रावसान नहीं होने के कारण अभी इसकी तस्वीर साफ नहीं कि मानसूत्र सत्र ही जारी रखा जाएगा या अगले कुछ दिनों में सत्रावसान कर नए सिरे से शीत सत्र बुलाया जाएगा।
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