विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जयशंकर का चीन को कड़ा संदेश, बोले- 'अच्छे रिश्तों के लिए सरहद पर शांति और स्थिरता पहली शर्त'

Updated: Sun, 23 Aug 2026 02:10 AM (GMT+05:30)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को दो टूक कहा कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता सबसे बुनियादी जरूरत है।

भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने चीन को कड़ा संदेश दिया है (फोटो- एक्स)

भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने चीन को कड़ा संदेश दिया है (फोटो- एक्स)

HighLights

  1. विदेश मंत्री ने कहा - सीमा की स्थिति ही स्वाभाविक रूप से दोनों देशों के रिश्तों की स्थिति तय करेगी 

  2. कूटनीति की डगर: भारत को चीन समेत पूरी दुनिया के साथ आत्मविश्वास के साथ व्यापार करना होगा 

पीटीआई, नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को दो टूक कहा कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता सबसे बुनियादी जरूरत है। दोनों देशों के रिश्ते की दिशा और दशा प्राकृतिक रूप से सीमाई इलाकों के हालात पर ही निर्भर करती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 2020 की गर्मियों से लेकर 2024 के शरद ऋतु तक का समय बेहद तनावपूर्ण रहा, जिसकी मुख्य वजह सरहद पर उपजा गतिरोध था। हालांकि, पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक से जुड़े समझौतों के बाद कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के रास्ते खुले हैं, जिससे रिश्तों में स्थिरता की उम्मीद जगी है।

'आत्मनिर्भर' भारत और आत्मविश्वास के साथ वैश्विक व्यापार विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को दुनिया के हर देश के साथ, जिसमें चीन भी शामिल है, पूरे आत्मविश्वास के साथ व्यापार करना होगा।

वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच देश को अपनी आंतरिक ताकत और विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करना होगा। यदि पिछले दशकों की कमियों को समय रहते दूर कर लिया जाता, तो आज भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में और अधिक सशक्त भूमिका निभा रहा होता। मजबूत और आत्मनिर्भर भारत ही दुनिया की बड़ी ताकतों के साथ बराबरी की टक्कर ले सकता है।

रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि अमेरिका और चीन के रिश्तों पर टिप्पणी करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों महाशक्तियों के बीच का संबंध एक जटिल समीकरण है, जिसमें प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ कई मोर्चों पर सहयोग की गुंजाइश भी रहती है।

भारत के लिए इन वैश्विक समीकरणों का आकलन करने का एकमात्र पैमाना 'राष्ट्रीय हित' है। सीमाई मुद्दों पर भारत ने जिस अडिग रुख का परिचय दिया है, वही भावना भविष्य में भी देश की विदेश नीति का मुख्य आधार बनी रहेगी।

'लगातार आतंकवाद का इस्तेमाल करने के मामले में अनोखा है पाकिस्तान'

भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूदा रिश्तों के संदर्भ में जयशंकर ने कहा कि किसी भी रिश्ते के सफल होने के लिए उसे "आपसी हित" की कसौटी पर खरा उतरना होता है।

विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को दुनिया का एक "अनोखा" देश भी बताया क्योंकि कोई दूसरा देश ऐसा नहीं है जो किसी पड़ोसी पर हमला करने और दबाव बनाने के लिए "इतने व्यवस्थित" और लगातार तरीके से आतंकवाद का इस्तेमाल करता हो।

उन्होंने कहा, "मैं बस इतना कह सकता हूं कि किसी भी रिश्ते को सफल होने के लिए, उसे आपसी हित की कसौटी पर खरा उतरना होगा। उसे हमारे लिए भी फायदेमंद होना चाहिए।"

उन्होंने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से प्रत्यर्पित करने की ढाका की मांग पर पूछे गए सवाल का जवाब देने से इन्कार करते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा, "अब, काफी हद तक हमने अमेरिका के साथ अपने रिश्ते विकसित कर लिए हैं, लेकिन बात यह है कि पाकिस्तान इसलिए अनोखा नहीं है कि वह भारत का पड़ोसी है। हमारे और भी पड़ोसी हैं। ऐसे दूसरे देश भी हैं जिनके बीच आपस में समस्याएं हैं।

पाकिस्तान अनोखा इसलिए है क्योंकि आज के दौर में, कोई दूसरा देश ऐसा नहीं है जो किसी दूसरे पड़ोसी पर हमला करने और दबाव बनाने के लिए इतने व्यवस्थित और लगातार तरीके से आतंकवाद का इस्तेमाल करता हो।"