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सागरमंथन संवाद में पीएम मोदी का संदेश: मुक्त, खुली और नियम आधारित वैश्विक समुद्री व्यवस्था का किया आह्वान

Published: Thu, 08 Oct 2026 02:00 AM (IST)

‘सागरमंथन-द ओशन डायलॉग’ में प्रधानमंत्री का संदेश पढ़ते हुए जहाजरानी सचिव विजय कुमार ने कहा कि भारत महासागरों को साझा ...और पढ़ें

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत समुद्र को नए उद्देश्य और संकल्प के साथ देख रहा

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत समुद्र को नए उद्देश्य और संकल्प के साथ देख रहा

HighLights

  1. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत समुद्र को नए उद्देश्य और संकल्प के साथ देख रहा

  2. प्रधानमंत्री मोदी ने मुक्त, खुली और नियम आधारित वैश्विक समुद्री व्यवस्था का किया आह्वान

पीटीआई, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को दुनिया में शांति, सहयोग और साझा प्रगति को बढ़ावा देने के लिए मुक्त, खुली और नियम आधारित वैश्विक समुद्री व्यवस्था का आह्वान किया।

‘सागरमंथन-द ओशन डायलॉग’ में प्रधानमंत्री का संदेश पढ़ते हुए जहाजरानी सचिव विजय कुमार ने कहा कि भारत महासागरों को साझा समृद्धि का माध्यम बनाने के पक्ष में है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत समुद्र को नए उद्देश्य और संकल्प के साथ देख रहा है। उन्होंने बताया कि देश के प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता लगभग दोगुनी हो गई है और जहाजों के बंदरगाह पर रुकने तथा माल चढ़ाने-उतारने में लगने वाला समय भी काफी कम हुआ है।

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय नाविक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री कार्यबल हैं। उन्होंने भारत के समुद्र से एतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि महासागर देश की अर्थव्यवस्था, लोगों और पूरी पृथ्वी के भविष्य के लिए व्यापक संभावनाएं रखते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महासागर देशों को अलग नहीं करते, बल्कि उन्हें जोड़ते हैं। समुद्र से जुड़ी किसी एक क्षेत्र की घटना का असर दूर-दराज के तटीय इलाकों तक पहुंच सकता है।

इसलिए वैश्विक समुद्री व्यवस्था में सहयोग और समन्वय जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ अपनी समुद्री दृष्टि को विभिन्न क्षेत्रों और महासागरों तक विस्तार दे रहा है। यह दृष्टि सहयोग, विश्वास, पारस्परिक सम्मान और साझा लाभ के सिद्धांतों पर आधारित है।