80वां स्वतंत्रता दिवस: लाल किले से पीएम मोदी का पिछले 4 साल में सबसे छोटा भाषण, किस साल रहा सबसे लंबा संबोधन
पीएम मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से 75 मिनट का संबोधन दिया, जो पिछले चार वर्षों में उनका सबसे छोटा भाषण है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(फोटो: पीटीआई)
HighLights
पीएम मोदी का 80वें स्वतंत्रता दिवस पर 75 मिनट का भाषण।
यह पिछले चार वर्षों में उनका सबसे छोटा संबोधन रहा।
'शक्ति की सप्तधारा' से विकसित भारत 2047 का लक्ष्य।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। उनका आज का भाषण 75 मिनट तक चला, जो पिछले चार वर्षों में सबसे छोटा संबोधन है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री के रूप में दिए गए कुल 13 भाषणों में समय अवधि के लिहाज से चौथा सबसे छोटा भाषण रहा।
यह संबोधन 2025 दिए गए उनके 103 मिनट के भाषण की तुलना में काफी संक्षिप्त था। 2025 का भाषण उनके पूरे कार्यकाल का सबसे लंबा संबोधन था, जिसने 2024 के 98 मिनट के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था।
वहीं, पीएम मोदी का सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस भाषण वर्ष 2017 में रहा था, जब उन्होंने केवल 56 मिनट तक देश को संबोधित किया था।

पीएम मोदी के 13 वर्षों के भाषणों का सफर
वर्ष 2014 में देश की कमान संभालने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों की अवधि 56 मिनट से लेकर 103 मिनट के बीच रही है। उन्होंने 2014 में अपने पहले स्वतंत्रता दिवस पर 65 मिनट का भाषण दिया था। इसके बाद 2015 में 88 मिनट, 2016 में 96 मिनट, 2018 में 83 मिनट और 2019 में लगभग 92 मिनट तक उनका संबोधन चला।
इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने 2020 में 90 मिनट, 2021 में 88 मिनट, 2022 में 74 मिनट और 2023 में 90 मिनट का भाषण दिया। लगातार 13वीं बार लाल किले से देश की अगुवाई करते हुए पीएम मोदी ने पिछले वर्ष ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 12 बार के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था। अब वह केवल देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से पीछे हैं, जिन्होंने लगातार 17 बार यह गौरव हासिल किया था।
पूर्व प्रधानमंत्रियों के भाषणों से तुलना
यदि लाल किले से दिए गए ऐतिहासिक संबोधनों पर नजर डालें, तो पंडित जवाहरलाल नेहरू का 1947 का पहला भाषण 72 मिनट का था, जबकि 1954 में उन्होंने मात्र 14 मिनट का संक्षिप्त भाषण दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी 1966 में 14 मिनट का भाषण दिया था, जो इतिहास के सबसे छोटे संबोधनों में शामिल हैं।
इसके अलावा, 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री आई. के. गुजराल का भाषण 71 मिनट का रहा था। आधुनिक दौर में अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण काफी संक्षिप्त होते थे, जिन्होंने 2002 में 25 मिनट और 2003 में 30 मिनट का संबोधन दिया था। वहीं, डॉ. मनमोहन सिंह का 2012 का भाषण 32 मिनट और 2013 का भाषण 35 मिनट तक चला था।
विकसित भारत का दृष्टिकोण
समय अवधि कम होने के बावजूद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन का उपयोग देश के व्यापक आर्थिक विकास और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को तय करने के लिए किया। उन्होंने अपने भाषण के दौरान शक्ति की सप्तधारा का विचार देश के सामने रखा।
प्रधानमंत्री ने इन सात शक्तियों के जरिए भारत के विकास के अगले चरण का खाका खींचा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सात धाराएं देश की प्रगति को नई गति प्रदान करेंगी और 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में मुख्य आधार स्तंभ का कार्य करेंगी।

