गड्ढों से बेहाल बेंगलुरु: कभी सीवेज तो कभी केबल, बार-बार खुदाई से बने गड्डे बने मेधा की मौत का कारण
बेंगलुरु में इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के पास अनंतनगर मेन रोड पर बुधवार सुबह एक महिला मेधा की बाइक से गिरकर मौत ...और पढ़ें

बार-बार खुदाई से बने गड्डे बने मेधा की मौत का कारण
HighLights
बेंगलुरु में 13,000 किलोमीटर से ज्यादा सड़क नेटवर्क है
मार्च 2026 तक 41,150 गड्ढे चिन्हित किए गए थे
घर से सिर्फ 3 किमी दूर मेधा अकरश की मौत हुई
डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। बेंगलुरु में इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी के पास अनंतनगर मेन रोड पर बुधवार सुबह एक महिला मेधा की बाइक से गिरकर मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक खराब सड़क के कारण ब्रेक लगने से दोपहिया वाहन फिसल गई और मेधा सड़क पर गिर गईं और पीछे आ रहे मिनी गुड्स वाहन की चपेट में आ गईं।
वे घर से महज 3 किलोमीटर दूर थीं। बड़ी बात यह है कि बेंगलुरु की सड़कें बार बार बनती हैं लेकिन इस तरह के गड्डे आखिरकार जानलेवा साबित हो रहे हैं।
पुलिस ने तत्काल कारण अचानक ब्रेक लगाना बताया है, लेकिन स्थानीय निवासी खराब सड़क की स्थिति को मुख्य जिम्मेदार मान रहे हैं। अनंत नगर के निवासियों ने बुधवार शाम कैंडललाइट मार्च निकाला और चंदापुरा नगरपालिका परिषद पर सालों से उपेक्षा का आरोप लगाया।
बेंगलुरु की सड़क समस्या
शहर में 13,000 किलोमीटर से ज्यादा सड़क नेटवर्क है। मार्च 2026 तक 41,150 गड्ढे चिन्हित किए गए थे, जिनमें से 39,887 की मरम्मत हुई। इस पर करीब 33.85 करोड़ रुपये खर्च हुए। लेकिन समस्या बार-बार दोहराई जाती है।
पानी-सीवेज पाइपलाइन, बिजली केबल, गैस लाइन और ऑप्टिकल फाइबर के लिए सड़कें बार-बार खोदी जाती हैं। मरम्मत के बाद भी खराब गुणवत्ता और देरी से सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं।
2025 में बेंगलुरु में 807 घातक सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 891 लोगों की जान गई, यानी रोजाना दो से ज्यादा मौतें। उत्तर बेंगलुरु में सबसे ज्यादा 286, दक्षिण में 194, पूर्व में 170 और पश्चिम में 157 घातक दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। स्पीडिंग, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और हेलमेट न पहनना प्रमुख कारण बताए गए हैं, लेकिन सड़क की खराब हालत जोखिम बढ़ा देती है।
निवासी कहते हैं कि अनेकल तालुक की सड़कें पिछले चार साल से खराब हैं। कई शिकायतों और मरम्मत के बावजूद समस्या बनी हुई है। हाल ही में रिपेयर की गई जगहों पर भी कुछ महीनों में गड्ढे पड़ गए। स्कूल बसें भी इसी रास्ते से गुजरती हैं, जिससे बच्चों का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ गड्ढे भरने से समस्या नहीं सुलझेगी। एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, सख्त निगरानी और जवाबदेही जरूरी है, ताकि मरम्मत के बाद सड़कें फिर से खराब न हों। मेधा की मौत ने एक बार फिर याद दिलाया है कि सड़क सुरक्षा सिर्फ ड्राइविंग तक सीमित नहीं, बल्कि सुरक्षित सड़कों पर भी निर्भर करती है।
