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धरती पर अपना 'सूरज' बनाने की दौड़ में भारत की बड़ी छलांग, पहली बार PRAGYA ने बनाया प्लाज्मा

Published: Wed, 09 Sep 2026 06:05 PM (IST)

बेंगलुरु की स्टार्टअप प्रनोस फ्यूजन ने अपने कॉम्पैक्ट टोकामक रिएक्टर PRAGYA में पहली बार प्लाज्मा बनाया है, जो भारत के कृत्रिम 'सूरज' बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

HighLights

  1. प्रनोस फ्यूजन ने PRAGYA टोकामक में पहली बार प्लाज्मा बनाया

  2. यह रिएक्टर प्लाज्मा नियंत्रण और फ्यूजन तकनीकों के परीक्षण हेतु

  3. कंपनी का लक्ष्य 2030 तक नेट एनर्जी गेन रिएक्टर बनाना

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत कृत्रिम 'सूरज' बनाने की रेस में आगे बढ़ रहा है। इस कई में प्राइवेट सेक्टर ने न्यूक्लियर फ्यूजन को लेकर बड़ा कदम उठाया है।

बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी प्रनोस फ्यूजन ने अपने कॉम्पैक्ट टोकामाक (Tokamak) रिएक्टर PRAGYA में पहली बार प्लाज्मा बनाया है।

40 सेमी व्यास वाले इस टोकामाक रिएक्टर को कंपनी ने 8 महीने में विकसित किया है। इसका उपयोग कंपनी प्लाजमा को कंट्रोल करने, उसकी जांच करने और फ्यूजन से जुड़ी अन्य तकनीकों को टेस्ट करने के लिए करेगी।

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PRAGYA का काम क्या है?

PRAGYA फिलहाल बिजली उत्पादन के लिए नहीं बनाई गई है। इसे अभी सिर्फ टेस्ट के लिए बनाया गया है। योजना है कि इसे लगभग दो दशक तक चलाया जाए।

इस समय में हर साल करीब तीन हजार प्लाज्मा शॉट लेने का लक्ष्य रखा गया है, जिसका मतलब है कि रोज औसतन दस से बारह बार प्लाज्मा तैयार कर उससे संबंधित जानकारियां जुटाई जाएंगी। इन जानकारियों का उपयोग भविष्य में बड़े फ्यूजन रिएक्टर विकसित करने में किया जा सकेगा।

टोकामक क्या है और कैसे काम करेगा?

टोकामक ऐसी मशीन है, जिसमें बेहद गर्म प्लाज्मा चुंबकीय बल से कंट्रोल होता है है। फ्यूजन प्रक्रिया के लिए गैस को इतना अधिक तापमान दिया जाता है कि वह प्लाज्मा में बदल जाए।

इसमें छोटे परमाणुओं को एक-दूसरे से जोड़कर ऊर्जा उत्पन्न करने की कोशिश की जाएगी। सूरज में भी ऊर्जा इसी तरह से बनती है। वैज्ञानिक लंबे समय से पृथ्वी पर इस प्रक्रिया को कंट्रोल करने के तरीके से ऊर्जा स्रोत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

PRAGYA पर चलने वाले प्रयोग

PRAGYA के जरिए सबसे पहले प्लाज्मा को कंट्रोल करने के तरीकों को समझा जाएगा। साथ ही टोकामक के डिजाइन, प्लाज्मा कंट्रोल सिस्टम और प्लाज्मा की जांच करने वाली तकनीकों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

कंपनी ऊंचे तापमान वाले सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट पर भी रिसर्च करेगी। ये चुंबक फ्यूजन मशीनों में प्लाज्मा को संभालने के लिए मादगार साबित हो सकते हैं। लगातार प्रयोगों से बड़े स्तर पर डेटा उपलब्ध होगा, जो आगे फ्यूजन रिएक्टर तकनीक को बेहतर बनाने में काम आएगा।

2030 तक बनाएंगे 'सूरज'

प्रनोस फ्यूजन ने आगे की राह भी तय कर ली है। कंपनी 2027 तक एचटीएस मैग्नेट को एक्टिव करने का इरादा रखती है। इसके बाद 2030 तक प्रानीक्यू नाम के नेट एनर्जी गेन रिएक्टर विकसित करने का टारगेटय है।

नेट एनर्जी गेन का सरल अर्थ है कि फ्यूजन से प्राप्त ऊर्जा उसे चलाने में खर्च हुई ऊर्जा से अधिक हो, ताकि उस ऊर्जा का उपयोग अन्य मशीने चालान एमे किया जा सके।

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