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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 26, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    स्पीकर ओम बिरला के आपातकाल भाषण के मुरीद हुए पीएम मोदी, इमरजेंसी की तानाशाही से कर डाली तुलना

    By Agency Edited By: Nidhi Avinash
    Updated: Wed, 26 Jun 2024 05:08 PM (IST)

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( PM Modi ) ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ( Om Birla ) के आपातकाल भाषण की सराहना की । सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट कर पीएम मोदी ...और पढ़ें

    स्पीकर ओम बिरला के आपातकाल भाषण के मुरीद हुए पीएम मोदी (Image: ANI)
    स्पीकर ओम बिरला के आपातकाल भाषण के मुरीद हुए पीएम मोदी (Image: ANI)

    HighLights

    1. ओम बिरला लगातार दूसरी बार लोकसभा के स्पीकर चुने गए
    2. ओम बिरला के भाषण के मुरीद हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
    3. ओम बिरला ने की थी आपातकाल की कड़ी निंदा

    पीटीआई, नई दिल्ली। ओम बिरला लगातार दूसरी बार लोकसभा के स्पीकर चुने हए हैं। इस बीच ओम बिरला ने आपातकाल के दौरान अपनी जान गंवाने वाले नागरिकों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा, जिसके बाद विपक्ष ने नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया और अंततः सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। 

    बुधवार को लोकसभा में आपातकाल की निंदा करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओम बिरला की सराहना की। उन्होंने कहा कि उन दिनों पीड़ित सभी लोगों के सम्मान में मौन खड़े रहना एक अद्भुत भाव था।

    पीएम मोदी ने की तारीफ

    मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'मुझे खुशी है कि माननीय अध्यक्ष ने आपातकाल की कड़ी निंदा की, उस दौरान की गई ज्यादतियों को उजागर किया और यह भी बताया कि किस तरह लोकतंत्र का गला घोंटा गया।' उन्होंने कहा कि आपातकाल 50 साल पहले लगाया गया था, लेकिन आज के युवाओं के लिए इसके बारे में जानना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस बात का एक उपयुक्त उदाहरण है कि जब संविधान को रौंदा जाता है, जनमत को दबाया जाता है और संस्थाओं को नष्ट किया जाता है तो क्या होता है।

    'तानाशाही कैसी होती है...'

    मोदी ने कहा कि आपातकाल के दौरान की घटनाएं इस बात का उदाहरण हैं कि तानाशाही कैसी होती है।लोकसभा अध्यक्ष चुने जाने के कुछ समय बाद ही बिरला ने लोकसभा में आपातकाल की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पढ़ा और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार की आलोचना की। कांग्रेस सांसदों और कुछ अन्य विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच बड़ी संख्या में सांसद कुछ क्षणों के लिए मौन खड़े रहे।

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