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हैदराबाद के बाद अब बेंगलुरु के लॉ कॉलेज में CJI को बुलाने का विरोध, बीसीआई अध्यक्ष के खिलाफ भी नाराजगी

Updated: Mon, 17 Aug 2026 02:14 AM (IST)

देश के प्रमुख लॉ कॉलेज नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी बेंगलुरु के छात्रों और पूर्व छात्रों ने विश्वविद्यालय के आगामी दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को आमंत्रित करने का विरोध किया है।

हैदराबाद के बाद अब बेंगलुरु के लॉ कॉलेज में CJI को बुलाने पर विरोध (फोटो- पीटीआई)

हैदराबाद के बाद अब बेंगलुरु के लॉ कॉलेज में CJI को बुलाने पर विरोध (फोटो- पीटीआई)

HighLights

  1. एनएलएसआईयू में सीजेआई और बीसीआई अध्यक्ष के निमंत्रण पर छिड़ी बहस

  2. यह विरोध एनएएलएसएआर में हालिया विवाद के बाद सामने आया है

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। देश में मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश के प्रमुख लॉ कॉलेज नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी बेंगलुरु (एनएलएसआईयू) के छात्रों और पूर्व छात्रों ने विश्वविद्यालय के आगामी दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को आमंत्रित करने का विरोध किया है।

शनिवार को जारी एक खुले पत्र में 165 ग्रेजुएटिंग छात्र, 409 वर्तमान छात्र और 128 पूर्व छात्रों ने नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (एनएएलएसएआर) हैदराबाद के छात्रों के साथ बिना शर्त एकजुटता जताई। उन्होंने बीसीआई अध्यक्ष के हालिया आचरण की आलोचना की और अपने दीक्षांत समारोह में सीजेआई की प्रस्तावित भागीदारी का भी विरोध किया।

यह विरोध एनएएलएसएआर में हालिया विवाद के बाद सामने आया है। वहां के कुछ छात्रों ने सीजेआई सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने का विरोध किया था।

इसके जवाब में बीसीआई ने 13 अगस्त को राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि वे एनएएलएसएआर के 2026 बैच के स्नातकों को वकील के रूप में नामांकित न करें। कुछ घंटों बाद ही यह आदेश वापस ले लिया गया और मिश्रा ने छात्रों से माफी मांगी।

एनएलएसआईयू के बयान में कहा गया कि हम एनएएलएसएआर के उन साथी छात्रों के साथ बिना शर्त एकजुटता जताते हैं, जिन्होंने सत्ता के सामने सच बोलने का साहस और नैतिक दृढ़ता दिखाई।

छात्रों ने बीसीआई से एनएएलएसएआर के छात्र और फैकल्टी समुदाय से बिना शर्त माफी की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीसीआई ने छात्रों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करने की कोशिश की।

बयान में कहा गया कि मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि दीक्षांत समारोह में कौन आता है, बल्कि यह है कि भारत के प्रमुख लॉ स्कूलों के छात्र शक्तिशाली संस्थाओं और सार्वजनिक अधिकारियों से असहमति जताने पर अपने पेशेवर भविष्य के लिए भयभीत न हों।