पंजाब चुनाव पर कांग्रेस-आप में संग्राम, राहुल ने हमलों की थामी कमान; केजरीवाल ने खोला जवाबी मोर्चा
पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक कड़वाहटें एक ड्रग-संबंधित आत्महत्या मामले को लेकर खुले संग्राम में बदल गई हैं।

आप-कांग्रेस में संग्राम

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संजय मिश्र,नई दिल्ली। पंजाब की चुनावी आहट के साथ ही कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच राजनीतिक कड़वाहटें अब खुले संग्राम में तब्दील होती दिख रही है। नशे की घटना से जुड़े आत्महत्या मामले में सूबे की सत्ताधारी आप तथा मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के शीर्षस्थ नेताओं के बीच बुधवार को शुरू हुए तीखे वार-पलटवार इसके पुख्ता संकेत हैं।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आत्महत्या मामले में घिरे सूूबे के वित्तमंत्री हरपाल चीमा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए आप सरकार के पैटर्न को खतरनाक बता सोशल मीडिया पर बैक टू बैक जिस तरह सीधे हमला बोला उससे साफ है कि आप की घेरेबंदी के कांग्रेस के अभियान की रणनीतिक कमान पार्टी का शीर्ष नेतृत्व खुद संभालेगा।
पंजाब में आप-कांग्रेस आमने-सामने
कांग्रेस की इस रणनीति को भांपते हुए ही आप संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत उनके कई प्रमुख नेताओं ने भी तत्काल राहुल गांधी पर बेहद तीखे हमलों की शुरूआत कर दी।
तो एआइसीसी महासचिव सचिन पायलट से लेकर पंजाब कांग्रेस के तमाम दिग्गजों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से लेकर केजरीवाल पर जवाबी हमलों की बौछार लगा दी। फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद आप तथा कांग्रेस के रिश्ते बिगड़ने की शुरूआत हो गई थी।
दिल्ली चुनाव में आप की हार में कांग्रेस की भी भूमिका होने से नाराज केजरीवाल ने विपक्षी राजनीति की धारा का हिस्सा होते हुए भी तत्काल कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए से खुद को अलग कर लिया था दिल्ली की सत्ता से बेदखल होने के बाद पंजाब ही अब केवल आप का राजनीतिक आधार रह गया है।
जबकि 2029 क बड़ी लड़ाई के लिए राज्यों की सत्ता सियासत में अपना आधार जमाने की कोशिश में जुटी कांग्रेस के लिए पंजाब बेहद अहम है और पार्टी यहां केजरीवाल को दिल्ली का राजनीतिक इतिहास दुहराने का मौका नहीं देना चाहती।
नशा विवाद मामले में मान सरकार की आलोचना
पंजाब चुनाव की इस अहमियत के मद्देनजर ही नशा विवाद मामले में आप और मान सरकार पर प्रहार में देरी न करते हुए राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट में कहा 'पंजाब की आप सरकार में एक खतरनाक पैटर्न दिख रहा है।
सरकारी नाकामी पर सवाल करोगे तो जवाब धमकी और टार्चर से मिलेगा। बेटे को नशे का शिकार बनते देखने वाले दलित समुदाय से आने वाले गुलजार सिंह ने वित्तमंत्री से सिर्फ इतना पूछा कि सरकार ड्रग्स का कारोबार रोकने में इतनी बुरी तरह नाकाम क्यों है?
इस बात पर उन्हें इतना प्रताड़ित और अपमानित किया गया, माफी मांगने के लिए इतना दबाव बनाया गया कि उन्होंने जहर खा लिया। इलाज के अभाव में वे जिंदगी की जंग हार गए। पिछले हफ्ते मैंने एक युवा मोहनजीत सिंह से भी बात की जिन्हें मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ प्रदर्शन करने पर प्रताड़ित किया गया।
सरकार का काम जनता को जवाब देना
सरकार का काम जनता को जवाब देना है, सवाल पूछने वालों को कुचलना नहीं। गुलजार सिंह के परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिले। मुख्यमंत्री तत्काल वित्तमंत्री का इस्तीफा लें और सुनिश्चित करें कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो जिसकी एफआइआर में उनका नाम दर्ज किया जाए।'
राहुल के इस हमले ने आप नेताओं में कुछ ऐसी खलबली मचा दी कि अरविंद केजरीवाल, भगवंत मान से लेकर मनीष सिसोदिया सहित तमाम नेताओं ने अंधाधुंध जवाबी फायरिंग शुरू कर दी।
मान ने लाशों के ऊपर राजनीति न करने की नसीहत दी तो केजरीवाल ने एक्स पोस्ट में पंजाब में नशा लाने के लिए कांग्रेस और अकाली दल-भाजपा की पूर्व सरकारों पर आरोप लगाया।
राहुल पर लाशों के ऊपर गंदी राजनीति का आरोप लगाते हुए केजरीवाल ने किसी मंत्री या विधायक के मामले से कोई लेना-देना नहीं होने की बात कही। मनीष सिसोदिया ने एक कदम आगे बढ़ उन पर सज्जन कुमार को रोल मॉडल मनाने का आरोप जड़ दिया।
आप नेताओं की राहुल के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल ने गुलजार सिंह की मां और पत्नी का वीडियो साझा कर केजरीवाल पर मंत्री चीमा का बेशर्मी से बचाव करने की गंदी और संवदेनहीन राजनीति करने और हद तक गिर जाने का आरोप लगाया।
दिलचस्प यह रहा कि कांग्रेस के इस वीडियो पोस्ट को अपने एक्स हैंडल पर शाम को साझा करते हुए राहुल गांधी ने हमलों को दुहराते हुए कहा 'पंजाब के लोगों और खासकर दलितों को आप सरकार द्वारा सत्ता के दुरुपयोग को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए।
वाल्मिकी समुदाय के गुलजार सिंह पर उनके आखिरी दिनों में जो बीती है वो खुद उनकी मां, उनकी पत्नी की और उनके भाई की जुबानी सुनिए। शोकाकुल परिजन ही कह रहे कि उनसे उनके पारंपरिक अंतिम संस्कार का हक तक छीन लिया गया।
मैं फिर कह रहा हूं मुख्यमंत्री तत्काल वित्त मंत्री का इस्तीफा लें, एफआइआर में उनका नाम दर्ज हो और पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो। इससे कम कुछ भी न्याय नहीं, खानापूर्ति है।'
